प्रेमी के साथ खुदकुशी करने वाली लड़की की आखिरी ख्वाहिश-सोलह शृंंगार कर साथ में जलाया जाए

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Vinod and Satyabhama

न्यूज चक्र @ कोटा
डेढ़ सौ फीट ऊंची गैपरनाथ महादेव की पहाड़ी से शुक्रवार दोपहर एक प्रेमी जोड़े ने कूदकर जान दे दी। पुलिस करीब तीन घंटे की मशक्कत से दोनों की लाशों को ऊपर ला सकी। मौके से लड़की का सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें उसने सुसाइड के लिए खुद को जिम्मेदार बताते हुए ख्वाहिश जताई है कि सोलह शृंगार कर प्रेमी के शव के साथ जलाया जाए। चट्टानों पर दोनों की लाशें बुरी तरह खून से लथपथ पड़ी हुईं थीं।

पुलिस के अनुसार सत्यभामा पुत्री प्रेमशंकर व विनोद प्रकाश पुत्र प्रभुलाल दोनों मूल रूप से टोंक के निवासी थे। लेकिन सत्यभामा करीब तीन साल से अपने परिवार के साथ यहां बोरखेड़ा इलाके में रह रही थी। वहीं विनोद भी परिवार के साथ जयपुर के महेश नगर में रहने लगा था। उसके पिता एलआईसी में कार्यरत हैं। विनोद की शादी हो चुकी थी, मगर उसने पत्नी को छोड़ दिया था। वह स्कूलों में कम्प्यूटर पार्ट्स सप्लाई करता था।
जानकारी के मुताबिक विनोद सुबह जयपुर से कोटा पहुंचा। इसके बाद टैक्सी करके युवती के बोरखेड़ा स्थित घर पहुंचा। वहां उसने सत्यभामा के परिजनों से गैपरनाथ महादेव के दर्शन करने जाने की बात कही। दोनों ग्यारह बजे करीब घर से रवाना होकर दोपहर एक बजे गैपरनाथ पहुंचे। वहां उन्होंने टैक्सी ड्राइवर से आधा घंटा रुकने की बात कही। इसके थोड़ी देर बाद ही दोनों पहाड़ी से नीचे कूद गए। यह नजारा देख घबराया हुआ ड्राइवर वहां से भागा और अपने मालिक को घटना की जानकारी दी। कार मालिक ने पुलिस को सूचना दी।
इस पर मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीम को करीब तीन सौ फीट की गहराई से लाशों को उपर लाने में तीन घंटे लग गए। चट्टानों पर क्षत-विक्षत हो खून से लथपथ पड़े दोनों के शवों को कपड़ों में बांधकर निकालना पड़ा।
ऐसे हुई पहचान
दोनों के पास से मिले आईडी प्रूफ और ड्राइविंग लाइसेंस से इनके नाम और पते की जानकारी मिली। यहां उल्लेखनीय है कि सत्यभामा की बड़ी बहन की दो महीने बाद शादी होने वाली है। उसके पिता के अनुसार दोनों की काफी समय से जान-पहचान थी।
यह लिखा है सुसाइड नोट में
पुलिस को मौके से मिले सत्यभामा के एक पेज के सुसाइड नोट पर 9 मई की तारीख दर्ज है। इससे अनुमान है कि उसने तीन दिन पहले ही आत्महत्या की तैयारी कर ली थी। इसमें यह भी लिखा है कि मेरी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं है। शायद मेरी उम्र इतनी ही थी। विनोद ने मेरा हर काम में साथ दिया, मेरा इलाज करवाया, मेरे साथ कुछ गलत नहीं किया। मुझे बीमारी से ठीक करने में विनोद ने बहुत मेहनत की है। आज उसकी बदौलत मैं पूरी तरह ठीक हूं।
साथ ही लिखा है कि आज 9 मई को मैं मर गई तो मुझे विनोद के साथ जला देना और अगर जिन्दा बची तो उसके साथ शादी करवा देना। किसी पर कोई पुलिस केस मत करना।
परिवारजनों से माफी मांगते हुए उसने लिखा है कि प्लीज, मुझे माफ कर देना, मैंने सबका बहुत दिल दुखाया है। परिवार के लिए लिखा है कि वो सबको बहुत प्यार करती है। पापा के लिए लिखा है कि गांव के घर की दीवार बनवा देना। रामायण-शांति पाठ करवा देना, हवन करवा लेना। रुकू की शादी अच्छे से करवा देना। अपनी आखिरी इच्छा के रूप मेें सत्यभामा ने सुसाइड नोट में लिखा है कि सोलह शृंगार कर उसे विनोद के साथ ही जलाया जाए।