बून्दी: सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से तो गर्व व खुशी, मगर हकीकत कचोटने वाली

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न्यूज चक्र @ बून्दी
स्वच्छता मिशन के तहत हुए सर्वे में इस बार मानकों के आधार पर बून्दी को राज्य में सबसे स्वच्छ शहर होने का तमगा मिला है। इस सम्बन्ध में जिला प्रशासन की ओर से जारी बयान में नगर परिषद के सभापति महावीर मोदी व जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल ने सभी शहरवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही इससे प्रेरणा लेकर पूरे जिले को पूर्णतया स्वच्छ व आकर्षक बनाने का भी आमजन से अनुरोध किया है।
प्रशासन का कहना है स्वच्छता सर्वे में विभिन्न पक्षों की पड़ताल की गई थी। कचरा प्रबंधन, ठोस कचरा निस्तारण, भविष्य की योजनाओं, कार्य गुणवत्ता के साथ ही आमजन की राय लेते हुए सर्वे किया गया था। सभी बिन्दुओं में कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, श्रेष्ठ प्रयासों की बदौलत जिले को यह स्थान मिल सका। जिला कलक्टर ने आमजन से अनुरोध किया है कि वे इस उपलब्धि में और चार चांद लगाएं। ग्रामीण स्तर पर खुले में शौच मुक्ति के लिए चल रहे अभियान को भी नए जोश के साथ गति देते हुए जिले को पूर्ण स्वच्छ बनाएं।
शहरवासियों ने उठाए सवाल
बून्दी को मिले इस तमगे से स्वभाविक रूप से शहरवासियों को बहुत खुशी हुई है। मगर जो हकीकत है, उसके चलते वे इस उपलब्धि पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा के ही एक पार्षद ने कहा कि ये रेटिंग देने वालों को शायद स्वच्छता की समझ ही नहीं है। या फिर उन्होंने लंका गेट के नाले के हालात नहीं देखे। पुरानी कोतवाली से लेकर कागदी देवरा, चौमुखा बाजार, मीरा गेट तक भरे हुए गंदे नाले-नालियां नहीं देखीं। यहां बहता रहने वाला गंदा पानी नहीं देखा। इसी प्रकार भाजपा से ही पूर्व पार्षद रामराज अजमेरा ने इस उपलब्धि पर पहलेे तो खुुशी जताई। मगर यह भी कहा कि जब बून्दी को सफाई के मामले में राज्य में प्रथम माना गया है तो फिर दूसरे जिलों की बदहाली तो सोच से भी परे है। वहां के लोगों का क्या हाल होगा, समझा जा सकता है। रजत गृह कॉलोनी निवासी महेश शर्मा व नारायण मीणा ने बताया कि यहां कभी-कभी ही महिला सफाईकर्मी आती हैं। मगर वे भी नालियों की सफाई नहीं करती हैं। इसके अलावा कॉलोनी में कहीं भी कचरा पात्र नहीं होने से खाली पड़े प्लॉटों को ही लोगों ने कचरा पात्र बना डाला है। इससे कई जगह गंंन्दगी के ढेर नजर आते हैं। इन्हेेेे उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। शहरवासी इस बात भी आश्चर्य जता रहे हैं कि नगर परिषद में विपक्ष के नेता के तौर पर कांग्रेस नेता लोकश ठाकुर ही मात्र परिषद की खामियों पर बोलते नजर आते हैं, बाकी कांग्रेसी पार्षदों व कांग्रेस के दिग्गजों की क्या मजबूरी है ?