अखबार मालिकों के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड अवमानना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/ सेन्ट्रल डेस्क

देशभर  के समाचार पत्र संस्थानों के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड लागू नहीं कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के मामले में जारी सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई।  पत्रकारों व गैर पत्रकारों की अलग-अलग याचिकाओं पर संयुक्त रूप से लम्बे समय तक यह सुनवाई चली। देश का शीर्ष कोर्ट इस पर फैसला बाद में सुनाएगा।

पत्रकारों-गैर पत्रकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजालविस, परमानंद पाण्डे व  प्रशांत भूषण ने पैरवी की। इन्होंने जोरदार तरीके से तर्क रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी समाचार पत्र संस्थान  अपने पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेजबोर्ड  के अनुरूप एरियर व वेतनमान नहीं दे रहे हैं। उलटे वेजबोर्ड की मांग करने वाले कर्मचारियों को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है। इनमें टर्मिनेशन, सस्पेंशन, ट्रांसफर व धमकाना शामिल है। इस सम्बन्ध में कोर्ट के समक्ष कर्मचारियों के हलफनामे व समाचार पत्र संस्थानों की बैलेंसशीट भी पेश की गई। साथ ही वकीलों ने ऐसे समाचार पत्र संस्थानों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने, मजीठिया वेजबोर्ड लागू करवाने व   प्रताडि़त किए गए कर्मचारियों को रिलीफ दिलवाने की भी गुहार लगाई। दूसरी ओर समाचार पत्र संस्थानों के वकीलों ने 20 जे की आड़ लेते हुए कोर्ट से कहा कि कर्मचारियों ने स्वेच्छा से बेजबोर्ड नहीं लेने का सहमति पत्र दिया है।  अन्य कई मुद्दों को उठाकर भी इन वकीलों ने अपने क्लाइंट्स का बचाव करने का प्रयास किया। इन्होंने इस बात को नकारा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है । कर्मचारियों को प्रताड़ित नहीं किए जाने की भी बात कही।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस रंजन गोगई की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई बंद करने और फैसला रिजर्व रखने (बाद में घोषित करने) का आदेश दिया। इस दौरान कोर्ट में  देशभर से बड़ी संख्या में आए पत्रकार मौजूद रहे।

यह है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी, 2014 को मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पत्रकारों व गैर पत्रकार कर्मियों को वेतनमान, एरियर सहित अन्य  परिलाभ देने के आदेश दिए थे। इसके अनुसार समाचार पत्र संस्थानों को यह वेतनमान नवम्बर 2011 से लागू करना था। लेकिन समाचार पत्र संंस्थानों ने इसे लागू नहीं किया। इनमें देश के अधिकतर  बड़े समाचार पत्र जैैैेसे राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान टाइम्स, नवभारत टाइम्स, पंजाब केसरी आदि शामिल रहे। मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने से बचने के लिए   समाचार पत्र संस्थानों ने अपने कर्मियों पर दबाव बना या उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर  मजीठिया वेजबोर्ड के परिलाभ नहीं चाहने की घोषणा करने वाले परिपत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। जिन कर्मचारियों ने इनकी बात नहीं मानी उन्हे विभिन्न तरीके से प्रताड़ित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों, श्रम विभाग तथा सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालयों को समाचार पत्र संस्थानों में  मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी । मगर ये भी इसमें खरे नहीं उतरे। इस पर बड़ी संख्या में देशभर के पत्रकारों व गैर पत्रकारों ने अलग-अलग समूहों में या व्यक्तिगत रूप से अपने-अपने अखबारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं दायर की थीं।