सरकार ने बताया- कोटा में कृषि भूमियों के पंजीयन में क्यों आ रही बाधा

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न्यूज चक्र @ कोटा
90 बी के तहत नगर विकास न्यास कोटा के खाते में दर्ज कृषि भूमियों का तकनीकी रूप से स्वामित्व नगर विकास न्यास, कोटा का होने, बेचानकर्ता (खातेदार) के अलग होने से इसकी पंजीयन प्रक्रिया में तकनीकी बाधा है। नगर विकास न्यास कोटा के क्षेत्राधिकार में 300 कृषि भूमि आवासीय योजनाएं अनुमोदित हैं। प्रशासन शहरों के संग अभियान के बावजूद भी इनमें शत-प्रतिशत भूखण्डधारियों को पट्टों का वितरण नहीं किया जा सका। राज्य सरकार ने विधायक राजावत के तारांकित प्रश्न पर यह अहम जानकारी दी।

इसी क्रम में सरकार ने यह भी बताया कि गत 5 वर्षों में कोटा में पट्टे जारी करने से नगर विकास न्यास को 63 करोड़ तथा नगर निगम को 1.60 करोड़ रूपए की आय हुई। इस अवधि में नगर निगम कोटा को कच्ची बस्ती के 2 हजार 28 पट्टों से 80 लाख 22 हजार 2 रुपए तथा स्टेट ग्रान्ट एक्ट में 217 पट्टों से 80 लाख 24 हजार 172 रुपए की आय हुई। वहीं इस अवधि में नगर विकास न्यास को 12 हजार 914 पट्टे जारी करने से 62 लाख 9313 हजार 257 रुपए की आय हुई है।

सरकार ने विधायक राजावत को यह भी बताया कि प्रशासन शहरों के संग अभियान 2012 में नगरीय विकास विभाग ने पत्र दिनांक 17 अक्टूबर 2012 के द्वारा पट्टा देने की प्रक्रिया को सरल करने के लिए नियमों में शिथिलता प्रदान की थी। मगर मई 2014 में इस अभियान की समाप्ति के पश्चात विभाग के आदेश दिनांक 21 जुलाई 2015 के द्वारा किसी भी भूखण्ड अथवा मकान के पट्टे के लिए पंजीकृत इकरारनामा/विक्रय पत्र को अनिवार्य कर दिया गया। सरकार ने बताया कि नगरीय विकास विभाग के द्वारा 31 मई 2013 तक के अपंजीकृत इकरारनामे के आधार पर 31 दिसम्बर 2015 तक पट्टे जारी करने की छूट दी गई थी। इस अवधि में नगर विकास न्यास कोटा ने 991 पट्टे जारी किए। इससे उसे 2 करोड़ 91 लाख 1हजार 603 रुपए की आय हुई। वहीं विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने इस रियायत को अपर्याप्त बताते हुए इस अवधि को बढ़ाने की मांग की। इस पर सरकार ने इस अवधि को 2 मई 2016 से बढ़ाकर 20 सितम्बर 216 कर दिया ।