सोनू निगम की परेशानी पर बवाल करने वालों, जरा ये पढ़ लो

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सोनू निगम की भावना साफ प्रकट हो रही है कि वे किसी के धार्मिक रीति-रिवाज, कर्मकांड के खिलाफ नहीं हैं। बस उनकी बात यह है कि उन्हें (कर्मकांड को ) इस तरह से परफोर्म क्यों किया जाए कि दूसरों की परेशानी का सबब बनें। मैं खुद इसका भुगत-भोगी हूं । करीब सात साल पहले दैनिक भास्कर जोधपुर से रीजनल इन्चार्ज के रूप में कोटा ट्रांसफर होने पर यहां जिस एरिया में मकान लिया, वहां पास ही में मस्जिद थी। ऑफिस से रात को तीन बजे बाद घर आता था, चार बजे करीब नींद लगती थी…..और पांच बजे…….जोर से लाउडस्पीकर गूंजना शुरू…..अब मेरी नींद की तो बज गई ना बैंड….ठीक से नींद नहीं निकाल पाने के कारण तबीयत खराब रहने लगी…..काम पर असर पड़ने लगा….चार जिलों की खबरों की जिम्मेदारी थी…. कुछ दिन में ही मकान बदल कर आकाशवाणी कॉलोनी में लिया, तब जाकर आराम मिला। अब मेरी इस व्यथा पर भी कोई मुझे किसी धर्म का विरोधी समझे तो समझे…..ये उसकी कमजर्फी होगी। और बड़ी बात तो यह है कि सोनू निगम ने केवल अजान पर ही ट्विट नहीं किया है, उन्होंने मंदिरों व गुरुद्वारों तक पर बात कही है… मैंने उनके पूरे ट्विट पढ़ें हैं….मगर अफसोस है कि केवल अजान की बात को ही हाईलाइट किया जा रहा है.. । उन्होंने भी समस्या को नींद से ही जोड़ा है, तो क्या बुराई है। ये क्यों जरूरी है कि भक्ति का दिखावा लाउडस्पीकर पर चीख-चीख कर हो। असली भक्ति कभी भी दिखावे की मोहताज नहीं होती है।
-राजीव सक्सेना