ऊर्जा धरोहर कोटा थर्मल बचाने के लिए निकली वाहन रैली

कोटा की साख : थर्मल बचाओ संघर्ष समिति ने प्लांट के निजीकरण की आांकाओं के बीच विरोध रैली निकालकर दिखाई एकजुटता, कोटा के विकास पर बिजली नहीं गिरने देने का लिया सर्वदलीय संकल्प

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न्यूज चक्र @ कोटा

देश के ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर कीर्तिमान बनाने वाले कोटा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को निजीकरण से बचाने के लिए सोमवार को श्रमिक, कर्मचारियों व अभियंताओं ने विशाल वाहन रैली निकाल सरकार को चेताया। थर्मल के गेट से रवाना होकर यह यह रैली कलक्ट्रेट पहुंची। यहां प्रदर्शन के बाद जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। गर्मी के इस मौसम में जबरदस्त बिजली की मांग के बावूजद 10 मार्च से बंद पड़ी थर्मल की चार यूनिटों के चलते यहांं सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में बलवती हुई थर्मल के निजीकरण की आशंका के चलते एक माह से जारी आंदोलन के बावजूद भी सरकार की ओर से कोई अधिकारिक वक्तव्य नहीं आया है। इससे भी इस आशंका को पूरी तरह बल मिल रहा है। साफ माना जा रहा है कि राज्य सरकार इसे हर हालत में निजी हाथों में सौंपने पर अड़ी हुई है। 34 वर्ष पुराने कोटा थर्मल के इतिहास में यह पहला मौका है जब सरकार ने लगातार 30 दिन तक 4 चालू यूनिटों से उत्पादन बंद करवा रखा है।
रैली को सम्बोधित करते हुए थर्मल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक रामसिंह शेखावत ने कहा कि कोटा थर्मल शहर की ऊर्जा धरोहर ही नहीं है, अपितु इससे हजारों परिवारों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। इसकी 4 यूनिटें स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर,जयपुर द्वारा नियोजित साजिश के तहत 10 मार्च से ही बंद हैं। जनवरी, 2017 में कोटा थर्मल की यूनिट-2 ने मात्र दो कोल मिलों से निरंतर बिजली पैदा करने का कीर्तिमान बनाया था। इसके बावजूद राज्य सरकार निजी कम्पनियों के दबाव में थर्मल की चालू यूनिटों को जबरन बंद करवाकर कोटा थर्मल को करोड़ों रुपए की उत्पादन हानि पहुंचा रही है। कोटा थर्मल जैसे देश के सर्वश्रेष्ठ बिजलीघर की छवि को बिगाड़ने का यह सुनियोजित खेल है।
कोटा के हित में सड़कों पर उतरे कर्मचारी व श्रमिक
एचएमएस के प्रदेश महामंत्री मुकेश गालव ने कहा कि आईएल के बाद कोटा थर्मल जैसे बड़े उद्योग को बंद करने का प्रयास शहर के विकास पर बिजली गिराने जैसा है। दुर्भाग्य से निरंतर लाभ में चल रहे कोटा थर्मल को चालू रखने के लिए कर्मचारियों, श्रमिकों व अभियंताओं को सड़कों पर आंदोलन करना पड़ रहा है। एकीकृत कर्मचारी संघ की अध्यक्ष हंसा त्यागी ने कहा कि कोटा थर्मल बचाने के लिए आमरण अनशन भी करना पड़ा तो वे सबसे आगे रहेंगी। महिला मुख्यमंत्री गरीब ठेका मजदूरों की रोजी-रोटी छीनने का प्रयास नहीं करें। संघर्ष समिति के सह-संयोजक शिवपाल चौधरी, आजाद शेरवानी, चंद्रोखर चौधरी, श्याम सुंदर पंवार व राकेश डगोरिया ने कहा कि थर्मल बचाओ आंदोलन सर्वदलीय जन आंदोलन बन चुका है। यह तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार इसकी चारों यूनिटों को बंद करने तथा निजीकरण करने का निर्णय वापस न ले ले।
जनता पर गिरेगी निजी क्षेत्र की महंगी बिजली की मार
संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल की ओर से जिला कलक्टर को दिए ज्ञापन में कहा गया है किं रामगढ़ में स्थित 1000 मेगावाट क्षमता के राजवेस्ट निजी बिजलीघर ने सरकार ने 3.50 रुपए में बिजली खरीदने की दर तय की। बाद में घाटा बताकर उस प्लांट को बंद कर दिया गया तो सरकार ने उससे 4.50 रुपए की दर से बिजली खरीदने का दुबारा एग्रीमेंट कर उसे फिर से चालू करवाया। इसी प्रकार कवाई में चल रहे अडानी पावर प्लांट की बिजली दरें भी कोटा थर्मल से अधिक हैं। ऐसे में प्रति यूनिट 3.05 रुपए की दर से सस्ती बिजली पैदा कर रहे कोटा थर्मल को निजी कम्पनियों के दबाव में बंद करना राज्य के हित में नहीं है। बर्तमान में 1240 मेगावाट क्षमता के कोटा थर्मल की 2 यूनिटें ही चालू हैं, 850 मेगावाट की शेष 5 यूनिटें बंद पड़ी हैं। सरकार गर्मी में भी बिजली की मांग नहीं होना बता रही है, वहीं रोज बिजली कटौती झेल रहे उद्यमियों, व्यापारियों व नागरिकों में आक्रोश है।
संघर्ष समिति का कहना है कि महाराष्ट्र में एनरोन कम्पनी 3-4 वर्ष में बिजली के मनमाने दाम वसूल करने लगी तो जनविरोध के दबाव में उसे राज्य छोडकर जाना पड़ा। राज्य में आरवीयूएनएल के अधीन कोटा, छबड़ा, झालावाड़, सूरतगढ़ पावर प्लांट को अगले 2 वर्षों तक पूरी क्षमता से चलाया जाए तो सरकार इन्हें लाभ की स्थिति में कर सकती है। इससे जनता को सस्ती दरों पर बिजली मिलती रहेगी। वहीं प्लांट को निजी कम्पनी को बेचने पर कुछ समय बाद ही वह दर बढ़ा कर मनमाने दाम वसूलना शुरू कर देगी। इसका सीधा खामियाजा जनता को उठाना पड़ेगा।
कोटा थर्मल एक नजर में-
– 17 जनवरी,1983 में स्थापित। वर्तमान 7 इकाईयों की क्षमता 1240 मेगावाट।
– न्यूनतम स्टाफ, लगभग 700 अभियंता, कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ। करीब 2 हजार ठेका श्रमिक।
– 7394 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन 2016-17 में।
– पहले वर्ष 41.54 प्रतिात पीएलएफ था, 2012-13 में 94 प्रतिशत कर राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया।
– 2015-16 में एसएलडीसी द्वारा 103 बार चालू यूनिटों को बंद करवाने से 125 करोड़ की हानि।
– जनरेशन लोड कम करवाने से 5524 एमयू की उत्पादन हानि से 1601 करोड़ रुपए का नुकसान।
– 2015-16 में 200 करोड़ का घाटा, 90 प्रतिशत घाटा एलडी के कारण रहा।
– 2016-17 में लाभ की स्थिति में 3.05 पैसे प्रति यूनिट बिजली उत्पादन।
– पुरानी 4 यूनिटों के नवीनीकरण पर 250 करोड़ रुपए खर्च।
– नए वेगन ट्रिपलर नं. 6 के निर्माण पर 187 करोड़ रुपए खर्च।