राज्य में डिमांड कम थी तो क्यों खरीदी 475 करोड़ रुपए की बिजली : धारीवाल

राज्य के पूर्व गृह मंत्री ने कोटा थर्मल पावर प्रोजेक्ट की चार यूनिटों को बंद कर देने व थर्मल को निजी कम्पनी को सौंपे जाने की आशंका के बीच राज्य सरकार की नीयत पर उठाए गम्भीर सवाल

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न्यूज चक्र @ कोटा

राज्य के पूर्व गृह मंत्री एवं कांग्रेस नेता शांति धारीवाल  कोटा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंकाओं को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर खूब बरसे । सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ तो राज्य में बिजली की डिमांड कम बताकर कोटा थर्मल की 4 यूनिटों को बंद करवा दिया गया, वहीं बीते चार माह में दूसरे राज्यों से महंगी दर पर 475 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई। यह साफ बताता है कि राज्य सरकार क्या करने जा रही है। जनता के पैसों को इस तरह बर्बाद करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए । धारीवाल शनिवार शाम कोटा थर्मल बचाओ अभियान के तहत थर्मल के मेन गेट पर आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

धारीवाल ने कहा कि सरकार थर्मल को बंद करने के जो तीन कारण बता रही है, वे पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने ये कारण गिनाते हुए बताया कि एक, बिजली की डिमांड कम बताई जा रही है, दूसरा बंद की गई  चारों यूनिटों को 25 साल पुरानी होने से नकारा बताया जा रहा है, तीसरा, वेरिएबल कॉस्ट 3.38 रुपए आना बताई जा रही है।

मगर धारीवाल ने आंकड़े  देते हुए पूछा कि बिजली की डिमांड नहीं है तो सरकार कटौती क्यों कर रही है। कोटा के कई क्षेत्रों में आज ही सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली बंद रही। दूसरा, देश में 60 से ज्यादा बिजलीघर 40 से 45 वर्ष पुराने हैं, मगर अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। दिल्ली का बदरपुर प्लांट तो 1971 से चल रहा है। कोटा थर्मल तो 1983 में ही बना है। कांग्रेस सरकार ने इसकी 7 इकाईयां स्थापित कर राज्य को विद्युत उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया था।
तीसरा, थर्मल से 2 वर्ष पहले 4.20 रुपए प्रति यूनिट बिजली बन रही थी, अधिकारियों ने इसमें सुधार किया, और मजदूरों की मेहनत की बदौलत इस वर्ष थर्मल सबसे सस्ती 05 रु. प्रति यूनिट की दर पर बिजली पैदा कर रहा है। इसे सरकार 4 रुपए से 12 रुपए यूनिट की दर से बेच रही है। इसलिए सरकार द्वारा बताए गए तीनों कारण खोखले साबित होते हैं।
पूर्व मंत्री ने यह दावा भी किया कि समीप के कॉल ब्लॉक से अच्छी क्वालिटी का कोयला उपलब्ध कराया जाए तो कोटा थर्मल से  और भी सस्ती बिजली मिल सकती है, लेकिन सरकार की नीयत खराब है।

2004 में ही सरकारी पावर प्लांट बेचना तय कर लिया था 

धारीवाल ने भाजपा सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि 2004 में बारां जिले के कवाई में अडानी ग्रुप के पावर प्लांट की स्थापना के समय ही सरकारी पावर प्लांटों को धीरे-धीरे इस ग्रुप को ही बेचना तय कर लिया गया था। इसी नीयत से 26 फरवरी,2016 को राज्य मंत्रिमंडल ने छबड़ा थर्मल को एनटीपीसी को देने के लिए मंजूरी दी। अब इसी माह कालीसिंध थर्मल को विनिवेश के बहाने निजी क्षेत्र को बेचने की नीयत से टेंडर खोले जाएंगे। धारीवाल का यह भी आरोप था कि गहलोत सरकार ने पावर प्लांट खोलने और रोजगार देने का काम किया था, मगर वसुंधरा सरकार उद्योगों को बंद करके बेचने की तैयारी में लगी हुई है। इस पर भी कोटा से चुने हुए सभी जनप्रतिनिधि चुप हैं। नदीपार क्षेत्र के डेढ़ लाख लोगों की आजीविका कोटा थर्मल से ही जुडी हुई है। इसलिए इसे किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार द्वारा गठित दो कमेटियों ने कोटा थर्मल को नकारा बताकर बंद करने की सलाह दी है। इसमें एक केन्द्रीय कमेटी ने 25 वर्ष पुराने थर्मल की पहली यूनिट को 2018 में, दूसरी यूनिट को 2019 में, तीसरी को 2024 में तथा चौथी यूनिट को 2025 में बंद कर देने को कहा है। मगर सरकार जल्दबाजी में क्यों है, 2018 तो आने दे। उससे पहले सरकार ही चली जाएगी, लेकिन कोटा थर्मल की यूनिटें किसी भी सूरत में बंद नहीं होने देंगे। थर्मल पर कोटा शहर को गर्व है।

कोटा थर्मल बंद करने से किसका विकास?

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि कोटा थर्मल बचाओ संघर्ष समिति के इस आंदोलन में कांग्रेस सहित पूरे शहर की जनता, हर संगठन साथ है। भाजपा के राज में पहले यहां जेके बंद हुआ, फिर आईएल बन्द हुआ, अब कोटा थर्मल को बंद करके सरकार किसका विकास करना चाहती है। कोटा के सांसद लोकसभा में सवाल बहुत पूछते हैं, लेकिन जनता को बताएं कि उनमें से कितने सवालों से कोटा को क्या-क्या लाभ मिला।
सभा को कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव पंकज मेहता, पूर्व यूआईटी चेयरमैन रविन्द्र त्यागी, प्रदेश सचिव शिवकांत नंदवाना, जिलाध्यक्ष गोविन्द शर्मा, पीसीसी सदस्य राजेन्द्र सांखला व इंटक के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश श्रीमाली ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत श्रमिकों से रोजगार छीनकर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की है। औद्योगिक नगरी कोटा में उद्योगों को बंद करने का जो खेल खेला जा रहा है, जनता अगले चुनाव में इसका करारा जवाब देगी। सभा में कांग्रेस  देहात जिला अध्यक्ष रुक्मणी मीणा , पार्षद अनिल सुवालका आदि कांग्रेसी भी मौजूद थे । मेन गेट पर थर्मल के श्रमिक, कर्मचारी व अभियंता भी सभा को सुनते रहे।