कोटा थर्मल-अस्तित्व के लिए जंग: रैली निकाल मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

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कोटा। मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर  मुख्यमंत्री के नाम दिए जाने वाले ज्ञापन को पढ़ कर सुनाते कर्मचारी नेता।
कोटा। थर्मल के गेट से मुख्य अभियंता कार्यालय की ओर रैली के रूप में जाते थर्मल के अधिकारी-कर्मचारी व ठेका श्रमिक।

न्यूज चक्र @ कोटा

कोटा थर्मल पावर प्रोजेक्ट की चार इकाईयों को बंद करने व अन्य इकाईयों को निजी हाथों में सौंपे जाने की कथित प्राासनिक कार्यवाही के विरोध में सोमवार को कोटा थर्मल बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले अधिकारियो-कर्मचारियों व ठेका श्रमिकों ने रैली निकाल कर मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव किया। यहां काफी देर नारेबाजी के साथ प्रर्दान कर उपमुख्य अभियंता को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया।

अपने आंदोलन के तहत समिति के सदस्य पहले थर्मल के गेट पर एकत्रित हुए। यहां से रैली के रूप में नारेबाजी करते हुए मुख्य अभियंता के कार्यालय पर पहुंचे। यहां उन्होंने कार्यालय का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। रैली का नेतृत्व आयोजन समिति के संयोजक रामसिह शेखावत, सह संयोजक आजाद शेरवानी, राकेश डंगोरिया, श्याम सुन्दर पंवार व इकबाल हुसैन कर रहे थे।

आंदोलनकारियों ने थर्मल प्रशासन और सरकार की कार्य प्रणाली पर आक्रोश जताने के साथ सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार एक ओर तो आवासन दे रही है कि ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है, वहीं दूसरी ओर गुपचुप तरीके से इस प्रक्रिया के लिए फाइल चलाई जा रही है। इस दोहरी नीति से सरकार व प्राासन की नीयत पर संदेह हो रहा है। यदि थर्मल की इकाईयों को बंद कर दिया गया तो हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। इसके चलते उनके परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पुराने उद्योगों को बंद कर बेरोजगारी को और बढ़ाने की बजाए नए रोजगार के साधन स्थापित करे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि कोटा थर्मल को निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा तो प्राइवेट कम्पनी बिजली की दर मनमर्जी से बढ़ाएगी। इससे आम जनता पर और भार बढ़ेगा।कोटा थर्मल ने उत्पादन में सदैव कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यह राजस्थान की शान है। मगर प्रशासन इसकी इकाईयों को बेवजह बार बार बंद कर घाटा साबित कर निजी हाथों में सौंपने पर तुला हुआ है। प्रशासन की इस मंशा को थर्मल के अधिकारी-कर्मचारी और ठेका श्रमिक कभी भी पूरा नहीं होने देंगे। जब तक प्रशासन अपना यह फैसला वापस नहीं ले लेगा, संघर्ष समिति आंदोलनरत रहेगी। कार्यालय में मुख्य अभियंता के मौजूद नहीं होने से संघर्ष समिति की ओर से उप मुख्य अभियंता केके शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया।