छोटी नहीं बड़ी गड़बड़ है: कोटा थर्मल पावर प्रोजेक्ट की बंद इकाईयों से उठ रहे गम्भीर सवाल

प्रोजेक्ट का भविष्य अंधकार में, गर्मी के बावजूद 15 दिन से लोड डिस्पेच सेन्टर, जयपुर के निर्देश पर थर्मल की 7 में से 5 दुरुस्त इकाईयां भी बंद, जबकि बिजली की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही है कटौती

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न्यूज चक्र @ कोटा
बिजली उत्पादन में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने वाले कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेान ऊर्जाहीन करने का दुष्चक्र थम नहीं रहा है। 124 0 मेगावाट क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहे कोटा थर्मल में 850 मेगावाट क्षमता की 5 इकाइयां 15 दिन से बंद पड़ी हैं। इससे वित्त वर्ष 2016-17 में 31 मार्च तक कोटा थर्मल को लाखों रुपए का नुकसान हो जाएगा। एक यूनिट को बंद और दोबारा चालू कराने पर करीब 22 लाख रुपए का फ्यूल खर्च होता है। चालू वित्त वर्ष में राज्य लोड डिस्पेच सेन्टर, जयपुर ने ग्रिड में फ्रीक्वेंसी 50 से अधिक र्दााकर कोटा थर्मल की चालू इकाइयों को 35 बार बंद करवाया। जबकि मार्च में गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ती जा रही है।
पिछले 10   वर्षों  में कोटा थर्मल ने प्रतिवर्ष सर्वाधिक बिजली पैदा कर राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार अर्जित किए। हर साल मार्च में सर्वाधिक बिजली पैदा करने का रिकॉर्ड बनाया, मगर इस बार राज्य सरकार ने मार्च महीने में थर्मल को लगातार 15 दिन तक बंद रखने का रिकॉर्ड बना दिया है। कोटा के वाशिंदे इस पर सवाल उठा रहे हैं कि जब गर्मी के मौसम में उद्योग, कृषि सहित व्यवसाय व घरेलू क्षेत्र में भी बिजली की मांग बढ़ जाती है तो ऐसा निर्णय क्यों लिया गया ?
विधायक प्रहलाद गुंजल ने गत वर्ष 16 मार्च को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव-131 के तहत एसएलडीसी से कोटा थर्मल की इकाईयों को बार-बार बंद कराने की जानकारी मांगी थी। इस पर ऊर्जा राज्यमंत्री ने बताया था कि वर्ष 2015-16 में कोटा थर्मल की इकाइयों को अंतिम 4 माह में 70 बार बंद कराया गया। तब सरकार ने अधि.त रूप से कहा था कि कोटा थर्मल को बंद करने की कोई योजना नहीं है।
लेकिन इस वर्ष 25 मार्च, 2017 तक एलडी ने थर्मल की चालू 7 यूनिटों से 35 बार उत्पादन बंद कराया। इससे थर्मल को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। विवस्त सूत्रों के अनुसार, कोटा थर्मल से इस वर्ष 7405 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की गई,जबकि 35 बार यूनिटें बंद करवाने से 2207.85 मिलियन यूनिट बिजली का घाटा हुआ। यदि पूरी क्षमता से प्लांट चालू रखा जाता तो 31 मार्च तक 9602 मेगावाट बिजली पैदा हो जाती। पिछले 2 वष्रों में कोटा थर्मल की चालू इकाइयों को जबरन बंद करवाने से 4230 मिलियन यूनिट का घाटा पहंुचा। कोटा थर्मल से लगभग 3 रुपए प्रति यूनिट सस्ती बिजली जारी रखने की बजाय अडानी थर्मल प्लांट, कवाई से 3.48 रुपए प्रति यूनिट से बिजली खरीदी जा रही है। इसका भार आम जनता पर पड़ रहा है।
तकनीकि मानदंडों पर खरा
राज्य में बिजली की मांग ज्यादा होने पर सरकार ने गत 2 वर्ष में 1432 मिलियन यूनिट बिजली अन्य क्षेत्रों से 3.31 रुपए प्रति यूनिट की दर पर खरीदी, जिस पर 474 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च हुए। उल्लेखनीय है कि कोटा थर्मल में लगभग 3.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली पैदा होती है, जबकि सौर क्र्जा की लागत 4.34 रुपए आती है। निजी पावर प्लांट के दबाव में सरकार ने कोटा थर्मल को बार-बार बंद करने का प्रयास किया। यदि कोटा थर्मल को नजदीकी कोल ब्लॉक से क्वालिटी कोयला आवंटन होने लगे तो प्रति यूनिट दर में 20 पैसे की और गिरावट आ सकती है। वर्तमान में निम्न ग्रेड का कोयला मिलने के बावजूद इसकी स्टेान हीट रेट 2560 ही है। मापदंडों के अनुसार यह 2561 से अधिक न होनी चाहिए। सारे मापदंडों पर खरा उतरने के बाद भी कोटा थर्मल से बिजली उत्पादन बंद करवाना न्यायोचित नहीं है।
27 लाख घरों में अभी बिजली नहीं पहुंची
राज्य में कई जिलों के गांवों में बिजली नहीं मिल रही है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 95 लाख मकानों में से 68 लाख को बिजली मिल रही है, जबकि शेष 27 लाख घरों में अंधेरा है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षपर्यंत बिजली कटौती की जाती है। इसका मुख्य कारण यह कि राज्य में बिजली की मांग आपूर्ति से कई गुना ज्यादा है। जबकि राज्य सरकार बिजली उत्पादन बढ़ाने की बजाय उल्टी चाल चल रही है। सरकारी क्षेत्र में सस्ती बिजली पैदा कर लाभ में चल रहे कोटा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की 4 इकाईयों को 2 वर्षों से दबावपूर्वक बंद कराया जा रहा है। इससे बिजलीघर को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। इसी हफ्ते बिहार में बिजली के दाम 55 प्रतिशत तक बढ़ा दिए। उसी तर्ज पर राजस्थान सरकार ने निजी क्षेत्र के बिजलीघरों को लाभ देने का प्रयास किया तो जनता पर महंगी बिजली का भार पड़ेगा।
नदी पार क्षेत्र की 2 लाख आबादी प्रभावित
नदी पार क्षेत्र की 20 से अधिक कॉलोनियों व आवासीय बस्तियों में रहने वाले 2 लाख से अधिक नागरिकों में इन दिनों कोटा थर्मल में उत्पादन बंद होने से चिंता व्याप्त है। उत्तर क्षेत्र में इस एकमात्र उद्योग के कारण ही 30 वर्षों के भीतर आबादी विस्तार के साथ व्यापार-व्यवसाय सहित सुविधाएं भी विकसित हुई हैं। सकतपुरा, नांता, कुन्हाड़ी में रहने वाले ठेका श्रमिकों का कहना है कि उनका रोजगार बंद हुआ तो हजारों चूल्हे बंद हो जाएंगे। वे कोटा से पलायन करने पर मजबूर हो जाएंगे। उनकी आजीविका थर्मल से ही जुड़ी है। सोमवार को बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक विरोध प्रर्दान कर थर्मल से बिजली उत्पादन चालू रखने के लिए मुख्यमंत्री के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपेंगे।
कोटा थर्मल में 5 वर्षों में उत्पादन (मिलियन यूनिट)
वर्ष        ग्रोस जनरेशन    एलडी से हानि   नेट जनरेशन
12-13   10041             301                 9740
13-14    10256             805               9451
14-15    9682               776                8906
15-16    9791               2022              7769
16-17    9602               2208              7394

ऑडिट रिपोर्ट : सरकारी प्लांटों का विनिवेश ठीक नहीं
17 फरवरी, 2017 को ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव को दी गई ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार व आरवीयूएनएल अपने संयंत्रों से सस्ती बिजली की उपलब्धता को देखते हुए उनके ऑपरेशन सिस्टम को पुनगर्ठित व मजबूत करें। छबड़ा थर्मल प्लांट का 100 प्रतिशत विनिवेश करना उचित नहीं है। दिसंबर,2015 से फरवरी,2017 तक की गई ऑडिट में विनिवेश के प्रयासों को अनुपयोगी निर्णय माना गया। उल्लेखनीय है कि अर्नेस्ट व यंग कम्पनी की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार व आरवीयूएनएल बोर्ड ने कालीसिंध थर्मल व छबड़ा थर्मल में राज्य सरकार की इक्विटी को किसी सरकारी या निजी कम्पनी में विनिवेश करने का निर्णय किया। 23 फरवरी,2016 को राज्य मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृति दे दी। उसके बाद से छबड़ा थर्मल को एनटीपीसी में विनिवेा करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, छबड़ा थर्मल के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) तथा प्री-इन्फोर्मेशन मेमोरेंडम (पीआईएम) तैयार किया गया। लेकिन छबड़ा थर्मल का 24 जून,2016 तक तथा कालीसिंध थर्मल का 25 नवंबर, 2016 तक तैयार करना था, इसमें कालीसिंध थर्मल का पूरा नहीं किया गया। यंग एंड अर्नेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, छबड़ा थर्मल व 2 सुपर क्रिटिकल यूनिटों के लिए 31 मार्च, 2016 तक राज्य सरकार की शेयर पूंजी 1171 करोड़ रुपए तथा इक्विटी अनुपात 325 प्रतिात है। जबकि कालीसिंध में सरकार की शेयर पूंजी 1846 करोड़ रुपए तथा इक्विटी अनुपात 400 प्रतिशत होने के बावजूद पहले छबड़ा के विनिवेश का निर्णय क्यों लिया जा रहा है। छबड़ा थर्मल का विनिवेश के वहां से पहले बिजली ली जाएगी, जिससे कोटा थर्मल की 4 इकाइयों से उत्पादन बंद रहेगा।