नेशनल धनिया सेमिनार: देशभर के एक्सपर्ट व बड़े व्यापारियों ने की अहम चर्चा

9 राज्यों के 650 धनिया व्यवसायियों सहित आयात-निर्यात एवं मसाला कंपनियों के प्रतिनिधियों ने किया धनिया क्वालिटी एवं पैदावार का आंकलन

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Deputy Director Spice Board Guna (MP) D Ajay

न्यूज चक्र @ कोटा
सम्भागीय आयुक्त रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि इस बार हाड़ौती में धनिये की पैदावार अच्छी है। भामाशाह मंडी में विभिन्न जिंसों की प्रतिदिन होने वाली एक-डेढ. लाख बोरी की आवक को देखते हुए मंडी एरिया के विस्तार की आवश्यकता है। इसके लिए मंडी से आगे की वनभूमि के बदले इतनी ही सिवाय चक भूमि वन विभाग को देकर यहां उसका विस्तार किया जा सकता है। मीणा रविवार को होटल मेनाल रेजिडेंसी में खाद्य पदार्थ कनवेंसिंग  एजेंट एसोसिएशन, कोटा की ओर से आयोजित नेशनल धनिया सेमिनार-2017 को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
सम्भागीय आयुक्त मीणा ने आगे कहा कि राजस्थान व मध्यप्रदेश में गेहूं के साथ सरसों व धनिये की पैदावार बढ़ाने के लिए नहरों से टेल क्षेत्र तक किसानों को हर साल बुवाई से 8-10 दिन पूर्व पानी दिया जा रहा है। उन्होंने हाड़ौती के किसानों से नहरी पानी की बर्बादी रोकने की अपील करते हुए कहा कि वे छोटी माइनर से रात में पानी चालू छोड़कर उसे बहा देते हैं। पैदावार बढ़ाने के लिए इस बर्बादी को रोकना होगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पाइस बोर्ड, गुना के उपनिदेशक डॉ. डी. अजय ने बताया कि गत वर्ष भारत से बीस देशों को 40 हजार टन धनिया निर्यात किया गया। धनिये की पैदावार राजस्थान, मध्यप्रदेश व गुजरात में सर्वाधिक होती है। बोर्ड में देश की 5हजार 848 मसाला निर्यातक कम्पनियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें 214 कम्पनियां राजस्थान की हैं। शैड्यूल में धनिया सहित 52 स्पाइस शामिल हैं। मसाला बोर्ड नए प्रॉडक्ट, सीड्स मशीनों व रिसर्च के लिए अनुदान भी देता है। धनिये को हाइजनिक रखने के लिए बोर्ड किसानों को त्रिपाल शीटें देता है। वरिष्ठ सदस्य मदनलाल दलाल ने कहा कि धनिया क्वालिटी और नई तकनीक पर देशभर के विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, कोटा के अध्यक्ष अविनाश राठी ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस वर्ष धनिये की बम्पर पैदावार
हॉर्टिकल्चर विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रामवतार शर्मा ने एक प्रजेंटेशन में बताया कि राजस्थान देश में सर्वाधिक धनिया उत्पादक राज्य है, इसमें कोटा सबसे अग्रणी है। वर्ष 2016-17 में राज्य में धनिये की बम्पर 1 लाख 90 हजार मैट्रिक टन पैदावार होने का अनुमान है। इसमें से 1 लाख 72 हजार मैट्रिक टन पैदावार केवल हाड़ौती अंचल में होगी। राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, असम, उडीसा, आंध्रप्रदेश व उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों की 6 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि में धनिया होता है। इसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का है। धनिया पाउडर में वैल्यू एडिशन व क्वालिटी कंट्रोल के लिए राज्य सरकार ने 5 कोल्ड स्टोरेज बनाए, जिनमें से 3 रामगंजमंडी व 2 कोटा में हैं। असनावर में धनिया पाउडर प्लांट लगाया गया, जहां ग्रेडिंग व सोलटेक्स मशीनों से पाउडर बनता है। उन्होंने बताया कि धनिये में लोंगयो रोग से बचाव के लिए एसीआर-1 तकनीक के बीज तैयार किए गए हैं, किसान इसका प्रयोग करें।
प्रतिवर्ष 100 करोड़ का एक्सपोर्ट
राजस्थान व मप्र के धनिये की अरोमा खुशबू से प्रभावित चेन्नई की प्रमुख निर्यातक कंपनी आची मसाला के मैजेनर ए.एडलबर्ट तथा क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर श्रीकांत ने भारत व रूस के धनिया निर्यात की तुलना करके बताया कि तापमान व टेस्ट प्रोफाइल से धनिये की क्वालिटी की डिमांड होती है। वे प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए का धनिया निर्यात कर रहे हैं। अरोमा खुशबू के कारण राजस्थान व मप्र के धनिये की आस्ट्रेलिया, यूएसए, न्यूजीलैंड, कनाडा, खाड़ी के देशों व यूरोप में डिमांड ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा कि धनिये में फूड सैफ्टी कंट्रोल किया जाए। इसे ग्लोबल स्टेंडर्ड के अनुसार रखना होगा। पेस्टीसाइड्स का प्रयोग कम हो तथा बेक्टिरिया से बचाव हो।
कोरिएंडर हब बना कोटा
तमिलनाडु के निर्यातक पीसीके माहेश्वरन ने कहा कि आज 10 से 12 लाख बोरी धनिया (कोरिएंडर) एक्सपोर्ट हो रहा है। धनिये की दरें कम हो या ज्यादा, कलर व क्वालिटी बेहतरीन होने से ग्लोबल डिमांड पर कोई असर नहीं पड़ता। हमारा धनिया पाकिस्तान व श्रीलंका में जाता है, लेकिन रूस व बल्गारिया हमसे प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। वहां तापमान कम रहने से धनिये में ऑयल कंटेंट ज्यादा होता है। यहां का ईगल, सिंगल पैरट व डबल पैरट धनिया दुनियाभर में मशहूर हैं। इसलिए इसे कोरिएंडर हब कहते हैं।
क्वालिटी कंट्रोल व पैदावार पर हुए विशेष सत्र
एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाशचंद दलाल व सचिव रतनलाल गोचर ने बताया कि सेमिनार के दूसरे सत्र में 9 राज्यों के प्रतिनिधियों ने समूह चर्चा की। धनिया प्रॉडक्शन एवं क्वालिटी पर अमित खंडेलवाल, राजेन्द्र अग्रवाल,चिराग पटेल, पंकज ठक्कर, हेमंत जैन, आदित्य मोटा, मनोज कासट व कैलाश खंडेलवाल ने चर्चा की। तीसरे सत्र में धनिया पैदावार के मूल्यों पर सुमित गोयल, मयंक अग्रवाल, ए. एडलबर्ट,  िशवकुमार जैन, जितेंद्र कक्कड़, मयूर मेहता, कमल शर्मा व प्रेमचंद मोटा ने अपने उपयोगी सुझाव दिए।