धनिया सेमिनार पर विशेष: विदेशों में हर साल एक्सपोर्ट हो रहा 12 लाख बोरी धनिया

    19 मार्च को कोटा में होने वाली सेमिनार में देशभर से 600 से अधिक धनिया व्यवसायी, निर्यातक व मसाला कम्पनियों के प्रतिनिधि धनिया पैदावार व क्वालिटी सुधार पर करेंगे मंथन, राजस्थान व मध्यप्रदेश के धनिये की डिमांड है सबसे ज्यादा

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    अरविन्द गुप्ता @ कोटा
    देश में कुल धनिये की 80 प्रतिशत पैदावार हाड़ौती व मालवा क्षेत्र में होने से क्वालिटी धनिये की खुशबू देश-विदेश में फैल रही है। फरवरी से जून तक चलने वाले सीजन में देशभर से लगभग 12 लाख बोरी धनिया 15 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट होता है। इसे ग्रेडिंग करके निर्यातक मूंदडा पोर्ट, कांदला पोर्ट, चेन्नई व केरल के पोर्ट से विदेशी कम्पनियों को भेजते हैं। गरम मसालों में 70 प्रतिशत धनिया बेस होने से इसकी मांग ज्यादा रहती है।
    खाद्य पदार्थ कन्वेन्सिंग एजेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाशचंद दलाल ने बताया कि सभी धनिया व्यापारियों की विश्वस्तरीय धनिया सेमिनार 19 मार्च, रविवार को यहां मेनाल रेजीडेंसी में आयोजित हो रही है। इस सेमिनार में विभिन्न राज्यों के मसाला उत्पादक, धनिया व्यापारी व एक्सपोर्ट से जुड़े विशेषज्ञों सहित 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
    पीसीके एग्रो हाउस के फाउंडर पीसी कनन ने बताया कि इस क्षेत्र में धनिये का अरोमा फ्लेवर व कलर क्वालिटी बढ़िया होने से विदेशों में इसे सर्वाधिक पसंद किया जाता है। मलेशिया, जापान, यूएसए, यूके, सिंगापुर, श्रीलंका, यूक्रेन, बुल्गारिया, मोरक्को, रूस व दुबई सहित खाड़ी देशों में धनिया एक्सपोर्ट हो रहा है।
    6 राज्यों से 15 कम्पनियों के प्रतिनिधि आएंगे
    सेमिनार में धनिया उत्पादक राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, आंध्रप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र,पचिम बंगाल आदि से बड़ी संख्या में धनिया व्यवसायी कोटा आ रहे हैं। आची मसाला, चेन्नई के फाउंडर एडी पदमसिंह आइशेक, निदेशक अश्विन, मैनेजर एडलबर्ट, एसजीआर-777, चेन्नई के मैनेजर सेंथिल मंगेश, पीसीके एग्रो हाउस के फाउंडर पीसी कनन, एक्सपोर्टर माहेश्वरन, वीकेएल, केरल के मैनेजर मयंक ठक्कर व अनूप, आरएमटी मसाला इंडस्ट्रीज, नागपुर के निदेशक मनीष सोनी, जेब्स इंटरनेशनल, बॉम्बे के निदेशक भास्कर भाई व शैलेष भाई, रामदेव फूलचंद, गुना के राजेन्द्र, राजकोट के वीपी एंड सन्स, गीताजंलि स्पाइसेस, गुना के मनोज कासट, रेपिड ऑर्गेनिक, सांचोर के योगेश जोशी, स्टार एग्री के अमित खंडेलवाल, गुजरात के धनिया ब्रोकर किरीट भाई, रामगंजमंडी के चिराग पटेल सहित कई अन्य कम्पनियों के प्रतिनिधि भविष्य के व्यापार व नई तकनीक पर संवाद करेंगे।

    जायका बढ़ाता है धनिये का अरोमा फ्लेवर
    धनिया विशेषज्ञ महावीर गुप्ता ने बताया कि हरे धनिये का प्रयोग गरम मसाला, ग्रेवी पाउडर, माउथ फ्रेशनर, दाल,ऑयल आदि में ज्यादा होता है। क्वालिटी व ग्रेडिंग सुधारने के लिए रोलर, चलना, डी-स्टोनर, सॉर्टेक्स मशीनों से धनिये को क्लीन व फिनिशिंग करते हैं। एमडीएच, एवरेस्ट, केच, एमटीआर, शक्ति मसाला जैसी प्रमुख कम्पनियां इसका प्रयोग करती हैं। केरल की सिंथाइट इंडस्ट्रीज लि.के निदेशक ने बताया कि ठंडे देशों में खाद्य तेलों में भारतीय धनिये का प्रयोग होने से वहां नियमित एक्सपोर्ट करते हैं। उन्होंने झालावाड़ में भी अपनी यूनिट खोली है। रेपिड ऑर्गेनिक, सांचोर के योगेश जोशी के अनुसार, यूएसए व यूके में ऑर्गेनिक धनिये की डिमांड होने से वहां एक्सपोर्ट करते हैं।
    कोटा भामाााह मंडी में प्रमुख धनिया व्यापारी शिवकुमार जैन, अशोक जैन, हेमंत जैन, कमल विजय, महावीर मित्तल, रामगंजमंडी के पीयूष व्यास, कुम्भराज के नितिन काबरा व बारां के रामस्वरूप आदि ने बताया कि धनिया व्यापारियों के दूसरे महाकुम्भ हाड़ौती में होने से उत्साह का माहौल है। कोटा देश में धनिया व्यापार का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहां कोटा, रामगंजमंडी, बारां, भवानीमंडी, छबड़ा कृषि उपज मंडी के अलावा मध्यप्रदेश की कुम्भराज, ब्यावरा, नीमच व गुना सहित आसपास के क्षेत्र से प्रतिवर्ष धनिये की बम्पर पैदावार पहुंचती है।
    परिशोधन तकनीक पर करेंगे संवाद
    एसोसिएशन के सदस्य किरीट भाई ने बताया कि इस विश्वस्तरीय सेमिनार में धनिये की आधुनिक बुवाई, बम्पर पैदावार, मौसमी प्रभाव व भविष्य के रुझान का आंकलन करेंगे। इसमें व्यापार में आ रहे निरंतर बदलाव व मांग के अनुसार स्तरीय क्वालिटी बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। धनिये की फसल का पूर्वानुमान, किसानों से सम्पर्क, गुणवत्ता, भविष्य की योजना आदि पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञों द्वारा धनिये की क्वालिटी को उच्च स्तरीय बनाने के लिए परिशोधन की अत्याधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे पूरे क्षेत्र से धनिये का निर्यात बढे़गा। इससे किसानों को दूरगामी लाभ होगा।