बीपीएल से करोड़पति और केबिनेट मंत्री, फिर गैंगरेप का आरोपी, अब जेल में

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लखनऊ। पुलिस हिरासत में गायत्री प्रजापति।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव के पैर दबाते हुए गायत्री प्रजापति। (फाइल फोटो) इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह किस योग्यता के आधार पर बीपीएल से करोड़पति बना।

न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क/लखनऊ

यूपी की निवर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को पुलिस ने आखिरकार बुधवार को लखनऊ से गिरफ्तार कर ही लिया। यही पुलिस सोलह दिन से उन्हे फरार बता रही थी। यह अलग बात है कि इस बीच वे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ चुनावी सभा में मंच साझा करते दिखे, अकेले चुनाव प्रचार करते दिखे, मतदान केन्द्र में वोट डालते भी दिखे। वे अमेठी सीट से प्रत्याशी थे । हालांकि हार गए। उनकी गिरफ्तारी से पहले मंगलवार को प्रजापति के तीन सहयोगियों सहित उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में अब छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
लखनऊ पुलिस का कहना है कि प्रजापति कई दिन से हरियाणा की ओर छिपे हुए थे। 26 फरवरी के बाद से वे फरार चल रहे थे। राज्यभर में यह मसला भारी गर्माने के बावजूद तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की थी। इस पर जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां से आदेश जारी हुए,तब जाकर ही प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकी थी। मगर समाजवादी पार्टी के रहते यूपी पुलिस को वे दिखाई नहीं दिए। मगर जैसे ही भाजपा की सरकार बनती दिखी कि उसी पुलिस को वे मिल गए।
कौन हैं गायत्री प्रजापति और कैसे आए सपा के करीब
गायत्री प्रजापति समाजवादी पार्टी और यूपी के एक कद्दावर मंत्री और नेता रहे हैं। उन पर केवल गैंगरेप के ही नहीं, बल्कि खनन मंत्री रहने के दौरान अवैध खनन की गतिविधियों में शामिल रहने के भी आरोप हैं। गायत्री और खनन विभाग के अफसरों पर सीबीआई का शिकंजा कसने का संकेत मिलते ही अखिलेश यादव ने उन्हें सरकार से बर्खास्त कर दिया था। मगर बाद में मुलायम सिह के कहने पर गायत्री को पार्टी में वापस लेने के बाद उन्हें मंत्री भी बना दिया गया था। प्रजापति मुलायम के खास माने जाते हैं। बड़ी बात यह भी है कि उनके बेटे अनुराग और अनिल पर भी रेप के आरोप हंै। अमेठी की एक लड़की ने अनुराग पर रेप का आरोप दर्ज कराया था। गायत्री के बेटों के नाम बीस से ज्यादा कम्पनियां हैं। इस प्रकार वे अरबों रुपयों के मालिक हैं। दोनों बेटों की पढ़ाई अमेठी में ही हुई। दोनों ग्रेजुएट हैं। बड़ा बेटा अनुराग पिता के साथ ही कमिशन एजेंट के तौर पर काम करता था।
क्या है गैंगरेप का पूरा मामला
अमेठी से विधायक का चुनाव लड़े गायत्री प्रजापति व उनके छह साथियों के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में एक महिला की ओर से रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी। चित्रकूट निवासी इस महिला की यह रिपोर्ट पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिखी थी। इससे पहले काफी प्रयास के बावजूद पुलिस ने उसकी बिलकुल भी सुनवाई नहीं की थी। इस महिला का आरोप है कि गायत्री के सरकारी आवास पर उसे चाय में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश कर दिया गया था। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया। उसका यह भी आरोप है कि गायत्री और उसके साथियों ने तीन साल तक उसके साथ गैंगरेप किया। उसकी अश्लील तस्वीरें लीं और इनके दम पर वे उसे तीन साल तक धमकी देते रहे। मगर जब आरोपियों ने उसकी बेटी को भी अपना शिकार बनाने की कोशिश की तब जाकर उसने यह केस दर्ज कराया।
ऐसे बने डीलर से करोड़पति
वर्ष 2002 तक गायत्री बीपीएल कार्ड धारक थे। मगर दस साल की अवधि में ही राजनीति ने उन्हें यूपी के करोड़पति मंत्रियों में शामिल कर दिया। वर्ष 2002 में गायत्री प्रजापति ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफनामा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्ति 91 हजार 436 रुपए बताई गई थी। इसके बाद से वे समाजवादी पार्टी के करीब आए और कुबेर बनते चले गए।
सबसे पहले वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी ने गायत्री को अमेठी से टिकट दिया। वे पहली बार में ही चुनाव जीत गए। बाद में वे राज्यमंत्री से केबिनेट मंत्री बन गए। अखिलेश मुख्यमंत्री बने और अमेठी से जीत के लिए उन्होंने गायत्री को फरवरी 2013 में सिचाई राज्य मंत्री बना दिया। अमेठी में सोनिया-राहुल गांधी परिवार का प्रभाव माना जाता रहा है।
इसके बाद मुलायम सिह ने उन्हें कुछ महीने बाद जुलाई में ही खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार दे दिया। फिर करीब छह महीने बाद ही गायत्री वर्ष 2014 में केबिनेट मंत्री के तौर पर अखिलेश सरकार में शामिल कर लिए गए। धीरे-धीरे उन पर भ्रष्टाचार के कर्इ आरोप लगने लगे। इस दौरान अखिलेश सरकार को उस समय तगड़ा झटका लगा जब हाईकोर्ट ने खनन विभाग में अनिमियताओं को लेकर सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। इसके अलावा गायत्री पर जमीनों के अवैध कब्जे, सरकारी जमीन बेच देने, पद के दुरुपयोग जैसे गम्भीर आरोप भी लगे। मगर सरकार इन सब पर भी खामोश रही। मगर गैंगरेप के आरोप ने आखिर उन्हें जेल पहुंचा ही दिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश कियाा। मगर रिमांड नहीं मांगी जाने से प्रजापति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वर्ष 2002 में उन्होंने जहां 91 हजार 436 रुपए की संपत्ति घोषित की थी, मगर 15 साल बाद 2017 में यह 10 करोड़ 2 लाख 51 हजार 101 रुपए हो गई।