यूपी का अगला सीएम भी हो सकता है चाय वाला

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युवा अवस्था में केशव प्रसाद मौर्य अशोक सिंघल के साथ।
बाल अवस्था में केशव प्रसाद मौर्य

न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क
लगभग साल भर पहले जब फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य को यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष की कमान दी गई थी। उस समय किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि उनका कद इतना बढ़ जाएगा कि वे राज्य के सीएम पद के सबसे प्रमुख दावेदार बन जाएंगे। यहां एक और बड़ी बात पीएम नरेन्द्र मोदी और केशव प्रसाद मौर्य के जीवन की समानता है। वह यह कि मौर्य ने भी बचपन में मोदी के समान चाय बेचने का काम किया था।
न्यूज 18 न्यूज नेटवर्क के अनुसार कौशाम्बी जिले के एक किसान परिवार में पैदा हुए केशव प्रसाद मौर्य ने संघर्ष के दौर में पढ़ाई के लिए अखबार बेचने के साथ चाय की दुकान भी चलाई थी। चाय पर जोर देने का कारण साफ है कि कहीं न कहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी इस पेशे से जुड़ाव रहा है। ऐसे में मौर्य को सहानुभूति मिलना तय माना जा रहा है।
मौर्य आरएसएस से जुड़ने के बाद विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल में भी सक्रिय रहे। इस दौरान उन्हें अशोक सिघल की नजदीकी का फायदा मिला। वीएचपी और बजरंग दल में वह करीब बारह साल रहे। वर्ष 2012 में इलाहाबाद की सिराथू सीट से वह विधायक बने। वर्ष 2016 में वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने। उनका सियासी कद तेजी से बढ़ा। उनके निजी सचिव ने इस बात की पुष्टि की है कि मौर्य ने बचपन में चाय भी बेची थी। लेकिन अब वह बड़े नेता हैं और आक्रामक भाषण देने के लिए जाने जाते हैं। राम जन्म भूमि आंदोलन और गोरक्षा आंदोलनों में वह जेल यात्रा कर चुके हैं।
अब करोड़ों की है सम्पति, दर्ज हैं कई मामले
मौर्य और उनकी पत्नी के पास करोड़ों की सम्पति है। इलाहाबाद में वह पेट्रोल पम्प, अस्पताल, एग्रो ट्रेडिग कम्पनी, कामधेनु लाजिस्टिक आदि के मालिक हैं। सामाजिक कार्यों के लिए कामधेनु चेरिटेबल सोसायटी बनाई हुई है। बताया गया कि मौर्य पर विभिन्न धाराओं में 11 मुकदमे दर्ज हैं।
जातिगत समीकरण का मिला फायदा
मौर्य कोइरी समाज के हैं। यूपी में कुर्मी, कोइरी और कुशवाहा ओबीसी में आते हैं। कल्याण सिह के बाद वह पहले नेता हैं जिन्होंने इस पिछड़े वोट बैंक को बीजेपी की ओर खींचा। बीएसपी के साथ रहे मौर्य नेताओं को तोड़ भाजपा से जोड़ा।