अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामला: तीन आरोपी दोषी करार, असीमानंद बरी

दस साल बाद आया फैसला, एक दोषी की हो चुकी है मौत, 16 मार्च को सुनाई जाएगी सजा

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Swami Asimanand

न्यूज चक्र @ जयपुर
दरगाह बम ब्लास्ट मामले में दस साल बाद बुधवार को कोर्ट के फैसले में तीन अरोपियों को दोषी करार दिया गया है। वहीं बाकी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया। बरी होने वालों में स्वामी असीमानंद भी शामिल हैं।
एनआईए की विशेष अदालत ने जयपुर में अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामले में अपना फैसला सुनाया है। पहले कोर्ट को 25 फरवरी को फैसला सुनाना था, लेकिन विस्तृत फैसला होने की वजह से न्यायधीश दिनेश गुप्ता ने इसे 8 मार्च तक के लिए टाल दिया था। अपने फैसले में कोर्ट ने देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया है। एक आरोपी सुनील जोशी की वर्ष 2007 में मौत हो चुकी है। दोषी पाए गए आरोपियों में से देवेन्द्र गुप्ता पर साजिश रचने और ब्लास्ट में मदद करने का आरोप है। वहीं भावेश पटेल पर साजिश में शामिल होने का आरोप है। 16 मार्च को सजा सुनाई जाएगी।
यह है मामला
अजमेर दरगाह शरीफ में रोजा इफ्तार करने वाले जायरीनों पर 11 अक्टूबर 2007 की शाम काली साबित हुई थी। इस दिन शाम करीब सवा छह बजे दरगाह में एक ब्लास्ट हुआ था। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं पन्द्रह अन्य लोग गम्भीर घायल हुए थे। ब्लास्ट के लिए दरगाह में दो रिमोट बम प्लांट किए गए थे, लेकिन इनमें से एक ही फटा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से करीब 149 गवाह पेश किए गए, जिसमें से करीब 26 महत्वपूर्ण गवाह पक्षद्रोही हो गए। इस मामले की सबसे पहले राजस्थान एटीएस ने जांच शुरू की । एटीएस ने पूरे मामले में तीन आरोपी देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा और चन्द्रशेखर लेवे को साल 2010 में गिरफ्तार कर लिया। वहीं 20 अक्टूबर 2010 को मामले से जुड़ी पहली चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गई, लेकिन इसके बाद अप्रैल 2011 में गृह विभाग द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी करके मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए ने मामले में जांच आगे बढ़ाई और हर्षद सोलंकी, मुकेश बसानी, भरतमोहनलाल रतेश्वर, स्वामी असीमानंद, भावेश अरविन्द भाई पटले और मफत उर्फ मेहूल को गिरफ्तार किया. वहीं मामले में तीन चार्जशीट और पेश की। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 442 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, जिसमें से 26 गवाह पक्षद्रोही हो गए। वहीं बचाव पक्ष की तरफ से 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 2 गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष भी मानता है कि जो गवाह पक्षद्रोही साबित हुए हैं, वे काफी महत्वपूर्ण हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले में कई आरोपियों को झूठा फंसाने की बात भी कही है। मामले में कोर्ट ने लंबी सुनवाई की है, ऐसे में अब सबकी नजरें कोर्ट पर टिकी हुई हैं।

पहले इस मामले में आरएसएस से जुड़े इंद्रेश कुमार और प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम भी सामने आया था, लेकिन जांच कर रही एनआईए ने इन दोनों के अलावा दो अन्य लोग जयंत भाई और रमेश गोहिल को क्लीन चिट दे दी थी। एनआईए ने 6 फ़रवरी 2017 जिस दिन सुनवाई पूरी हुई थी उसी दिन एक रिपोर्ट अदालत में पेश की थी, जिसमे कहा गया कि इंद्रेश, प्रज्ञा, रमेश और जयंत के खिलाफ मामला चलाने लायक साक्ष्य नहीं है। इस रिपोर्ट को कोर्ट अपने रिकॉर्ड पर ले चुकी है।

14 आरोपियों में से 3 दोषी करार

मामले में पहले एटीएस और बाद में एनआईए ने कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से आठ आरोपी अभी जेल में हैं। इनमें से दो को दोषी करार दिया गया है। जबकि एक अन्य दोषी की गिरफ्तारी के पहले ही मौत हो गई थी। वहीं 4 अभी भी फरार हैं। इनके अलावा एक आरोपी जमानत पर बाहर है।