अब कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन सरकार के निशाने पर क्यों ?

    हकीकत : निरंतर लाभ में बिजली पैदा कर रही पुरानी 4 इकाइयों पर क्यों मंडराए खतरे के बादल। 3 वर्ष में कोटा में एक भी नया उद्योग नहीं खुला, जो उद्योग चल रहे हैं, उन्हें भी निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी।

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    अरविन्द गुप्ता @ कोटा

    राज्य को 24 घंटे उर्जा देने वाले कोटा थर्मल पावर स्टेशन की चार इकाइयों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैंं। उर्जा विभाग इन इकाइयों को मिल रहा कोयला छबड़ा सुपर क्रिटिकल की निर्माणाधीन यूनिट-5 एवं 6 के लिए भेजने की योजना बना चुका है। इसकी भनक मिलते ही इंजीनियर्स, कर्मचारियों एवंं ठेका श्रमिकों में आक्रोश है। उन्होंने 6 मार्च को एक घंटे काली टोपी पहनकर सामूहिक विरोध प्रदर्शन किया। इसके बदले शाम को एक घंटे अतिरिक्त कार्य किया। विरोध प्रर्दान में थर्मल के ठेका श्रमिकों व कर्मचारियों से लेकर अधीक्षण अभियंता तक सभी उच्च अधिकारी भी शामिल हुए। थर्मल में लगभग 700 इंजीनियर्स एवं कर्मचारी कार्यरत हैं। लगभग 2500 से अधिक ठेका श्रमिकों के 10 हजार सदस्यों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।

    गौरतलब है कि विगत 34 वर्षों में निर्धारित पर्यावरण एवं तकनीकी मापदंडों के अनुसार सर्वाधिक बिजली पैदा करने वाले कोटा सुपर थर्मल को देश के सर्वश्रेष्ठ बिजलीघरों में से एक माना जाता है। 7 इकाइयों वाले इस पॉवर प्लांट की क्षमता 1240 मेगावाट है। जिससे 2 करोड़ 40 यूनिट सस्ती बिजली रोज पैदा हो रही है। यह बिजलीघर 1990 से 2014 तक प्रतिवर्ष बिजली उत्पादन में केंद्र व राज्य स्तर से निरंतर विोष उत्पादकता पुरस्कार अर्जित करने का कीर्तिमान बनाया है। सभी मापदंडों पर खरा उतरा आरवीयूएनएल संयुक्त संघर्ष समिति के प्रवक्ता श्री संजय जोाी ने बताया कि वर्तमान में यहां कोयले की खपत मात्र 0.625 से 0.642 किग्रा प्रति किलोवाट घंटा है। हीट रेट निर्धारित मानक 2500 से भी कम 2425 से 2450 किलोकैलोरी रहती है। 210 मेगावाट की इकाइयों में प्रतिदिन कोयल की खपत 2750 से 3150 टन के बीच होती है। नई यूनिटों के मुकाबलें पुरानी चारों यूनिटों में कोयले की खपत कम रहती है। जिससे इनसे पैदा होने वाली बिजली की प्रति यूनिट दर इस समय मात्र 2.56 रूपए आ रही है, जो निजी बिजलीघरों से काफी कम है। पुरानी इकाइयों के नवीनीकरण में ये हुए कार्य- – दो वर्ष में 30 साल पुरानी इकाइयों के जीण्रोद्घार व आधुनीकीकरण पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए। – कोयले की अनलोडिंग के लिए 250 करोड़ की लागत से नया वेगन ट्रिपलर निर्माणाधीन है। – 34 वर्ष पुरानी इकाइयों से 90 प्रतिशत से अधिक पीएलएफ पर बिजली उत्पादन किया जा रहा है, जो देश में सर्वश्रेष्ठ है। – 2014-15 में प्लांट का पीएलएफ 93.14 प्रतिशत रहा, जिसे 2015-16 में यूनिटें बंद करवाकर 82 प्रतिात कर दिया गया। इस वर्ष यह पीएलएफ फिर से बढè चुका है। 200 करोड़ घाटे की भरपाई की कोटा थर्मल की चालू इकाइयों को वर्ष 2015-16 में स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर, जयपुर द्बारा राज्य में बिजली की मांग कम बताते हुए बार-बार बंद कराया गया, जिससे थर्मल का पीएलएफ 92.58 प्रतिात से घटकर 17.48 प्रतिात रह गया था। 2014-15 में 3.81 रुपए प्रति यूनिट लागत से गणना की जाए तो थर्मल को एलडी के कारण 655 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा। बंद यूनिटों को चालू करने (लाइटअप) करने पर 30 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च हुआ। केवल प्लांट के रखरखाव पर 10 करोड़ 50 लाख का खर्च हुआ। लेकिन सीएमडी श्री एनके कोठारी की नियुक्ति के बाद प्लांट के संचालन में कई बड़े सुधार करके इसे लाभ की स्थिति में लाया गया। इसमें कोयले की क्वालिटी में सुधार करना, ऑपरेशन व मेंटीनेंस की प्रभावी मॉनिटरिंग, हीट रेट व ट्रिपिंग में कमी और निरंतर चलने के कीर्तिमान बनाकर यूनिटों से अधिकाधिक बिजली पैदा की गई। जिससे प्रति यूनिट लागत 2.56 रूपए तक आ गई, इस बिजली को 6 से 7 रुपए में बेचा जाता है। जबकि सरकार निजी क्षेत्र से बिजली 10 से 12 रुपए प्रति यूनिट में खरीद रही है। वर्तमान में कोटा थर्मल लगभग 82 करोड़ रुपए से अधिक लाभ में चल रहा है। चालू यूनिटों को बंद कराने से हुआ घाटा कोटा उत्तर से भाजपा विधायक प्रहलाद गुंजल ने मार्च,2016 में विधानसभा में कोटा थर्मल की चालू इकाइयों को बार-बार बंद करने मुददा उठाया तो बताया गया कि कोयले एवं ऑयल की लागत बढèने तथा एलडी से बंद करवाने पर अप्रेल,2015 से फरवरी,2016 तक कोटा थर्मल को 195 करोड़ रू का घाटा हुआ। गत ढाई वर्ष में कोटा थर्मल की इकाइयों को 103 बार बंद करके 23 करोड़ रू का नुकसान हुआ। विधानसभा में उर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि सरकार यूनिट-1 को 2018 में, यूनिट-2 को वर्ष 2019 में तथा इसके 5 वर्ष बाद यूनिट-3 तथा यूनिट-4 को भी बंद करना चाहती है। सवाल यह कि लाभ में चल रही सरकारी बिजलीघर की इकाइयों को बंद करके राज्य सरकार निजी क्षेत्र को बड़ा लाभ क्यों पहुंचाना चाहती है? प्रदेा कांग्रेस कमेटी के महासचिव पंकज मेहता ने कहा कि राज्य में बिजली की मांग कम नहीं होने के बावजूद एलडी ने इसे बार-बार बंद करवाकर नुकसान पहुंचाया। गर्मी को देखते हुए गांवों में निरंतर बिजली कटौती की जा रही है, दूसरी ओर राज्य सरकार थर्मल की चालू इकाइयों को बंद करने पर आमादा है। शहर में सेमकोर, आईएल, ओपीसी जैसे उद्योग बंद होने के बाद राज्य सरकार 3 वर्ष में कोटा को नया उद्योग लगाने की बजाय पुराने उद्योगों को बंद करने पर आमादा है। कोटा थर्मल को बंद करने से 10 हजार से अधिक श्रमिकों के सामने आजीविका संकट खड़ा हो जाएगा। इसे बंद करने का सड़कों पर विरोध किया जाएगा।