कार्यकर्ता का हाथ तोड़ने वाले की गर्दन मरोड़कर हाथ में दे दूंगा

विधायक पति के द्वारा थानाधिकारी को थप्पड़ मारने के मामले में रिटायर्ड एएसपी नवनीत महर्षि के बयान पर विधायक भवानी सिंह राजावत ने दी उन्हे चुनौती, कहा-वर्दी से भी बड़ा है जनप्रतिनिधि का सम्मान

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MLA Bhawani Singh Rajawat (file photo)

न्यूज चक्र @ कोटा
महावीर नगर थानाधिकारी को थप्पड़ मारने का विवाद लगातार गर्माता जा रहा है। एक ओर जहां विभिन्न समाजों के लोग इस मसले पर पक्ष-विपक्ष में खेमाबंदी कर रहे हैं तो स्वभाविक रूप से विपक्षी पार्टियों के नेता पुलिस के समर्थन में उतर गए हैं। इसी क्रम में विधायक भवानी सिंह राजावत ने रिटायर्ड एएसपी नवनीत महर्षि के बयान पर उन्हे चुनौती देते हुए कहा कि ”अगर वो एचएचओ होते और मैं सामने होता तो ऐसा दुस्साहस करने वाले अधिकारी की गर्दन मरोड़कर उसके हाथ में दे देता।’’ राजावत शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी व जिला प्रभारी मंत्री प्रभुलाल सैनी की फीडबैक बैठक  को संबोधित कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि 20 फरवरी को महावीर नगर थाने में एक विवाद के बीच रामगंजमंडी विधायक चन्द्रकांता मेघवाल के पति नरेन्द्र मेघवाल ने थानाधिकारी श्रीराम बड़ेसरा को थप्पड़ मार दी थी। इसके बाद पुलिस ने वहीं मौजूद विधायक सहित उनके पति को बुरी तरह पीटने के साथ उनके समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी लाठीचार्ज किया था। इसके बाद मचे बवाल व भाजपाइयों की मांग पर सीआई सहित छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था। वहीं पुलिस विधायक व उनके पति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग पर अड़ी हुई है। इसी को लेकर जिले के थानों सहित राज्य के कई अन्य थानों में पुलिसकर्मियों ने मैस का बहिष्कार कर दिया। इसी क्रम में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी अपने पूर्व सहकर्मियों के पक्ष में उतर आए। इनमें रिटायर्ड एएसपी योगेन्द्र जोशी व नवनीत महर्षि प्रमुख रूप से शामिल रहे। महर्षि ने बयान दिया था कि मैं अगर एसएचओ होता तो हाथ उठाने वाले कार्यकर्ता का हाथ तोड़कर उसके हाथ में दे देता। इसी पर राजावत ने आगे कहा कि भाजपा कार्यकर्ता इतने कमजोर नहीं हैं कि कोई भी उनके हाथ पैर तोड़ दे। हाड़ौती का जांबाज कार्यकर्ता चम्बल का शेर है, जो आत्मसम्मान से जीना जानता है।
राजावत ने प्रोटोकोल का भी मसला उठाया
राजावत ने यह भी कहा कि पुलिस की वर्दी के सम्मान से बड़ा सम्मान जनप्रतिनिधि का है। प्रोटोकोल में अगर विधायक थाने में जाता है तो थाना इन्चार्ज को उसे सेल्यूट मारकर सम्मान से आसन देना चाहिए, लेकिन सम्मान की जगह पुलिस अपमान करे, ढाई लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक से मारपीट करने लग जाए, यह लोकतंत्र के लिए बहुत घातक है। राजावत ने यह भी कहा कि माना विधायक पति ने पुलिस ज्यादती के विरोध में संयम तोड़कर आवेश में थाना इन्चार्ज पर हाथ उठा लिया था तो तत्काल उसे गिरफ्तार कर कार्रवाई करते। इसकी बजाय आपा खोकर बदले की भावना से वहां प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया, कार्यकर्ताओं के साथ साथ राहगीरों, दुकानदारों, ठेले वालों और खरीदारी करने वाले आम आदमियों को भी पीटा। यही नहीं लाइट बंद कर कई लोगों के हाथ-पैर तोड़ दिए, सिर फोड़ दिया। यह वर्दी का कौन सा कर्त्तव्य था, जिसने ये करतब दिखाया। आए दिन थानों में निर्दोष लोगों को पीट-पीट कर मार देने की घटनाएं होती हैं। कोटा जिले के चेचट थाने में ही महिला कांस्टेबल से बलात्कार कर उसे मार दिया गया था। तब वर्दी का सम्मान कहां चला गया था। एक थप्पड़ में तो वर्दी के मान-सम्मान की बात याद आ गई, लेकिन ऐसे कारनामों पर तो वर्दीधारियों को आत्मचिन्तन भी करना चाहिए कि पुलिस का काम कानून और व्यवस्था को कायम रखना है, बेवजह लाठीचार्ज करना नहीं। लाठी पुलिस को रक्षा के लिए दी गई है, ना कि लोगों को पीटने के लिए।