गर्व और खुशी से झूम उठा हिन्दुस्तान, अन्तरिक्ष की उड़ान में बना विश्व रिकॉर्ड

104 सैटेलाइट (उपग्रह) के साथ पीएसएलवी अंतरिक्ष रवाना, इनमें सबसे अधिक 96 सैटेलाइट अमेरिका के शामिल

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न्यूज चक्र@सेन्ट्रल डेस्क/श्रीहरिकोटा(आंध्र प्रदेश ) 

अंतरिक्ष में भारत ने आज बुधवार को ऐसा इतिहास रच दिया, जिसके आसपास भी अभी तक विश्व का कोई दूसरा देश नहीं है। इसरो ने यह रिकॉर्ड पीएसएलवी के माध्यम से सुबह 9.30 बजे 104 सेटेलाइट लांच कर बनाया है। खास बात यह है कि इसमें 96 सैटेलाइट तो विश्व की सबसे बड़ी शक्ति माने जाने वाले देश अमेरिका के ही हैं।

गौरतलब है कि अभी तक सबसे अधिक सैटेलाइट छोड़ने का रिकॉर्ड रूस के नाम है। रूस ने 37 सेटेलाइट एक साथ प्रक्षेपित किए थे । वहीं इसरो का खुद का रिकॉर्ड 23 सेटेलाइट एक साथ लांच करने का है। जो जून 2015 में बना था।
इसरो के सहारे भारत की अंतरिक्ष में उड़ान पर एक नजर:-
1975 में देश का पहला उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसका नाम महान भारतीय खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इस सैटेलाइट को कॉसमॉस-3 एम प्रक्षेपण वाहन के जरिए कास्पुतिन यान से प्रक्षेपित किया गया था। सबसे खास बात यह थी कि इस सैटेलाइट का निर्माण पूरी तरह से भारत में ही हुआ था।
क्या है इन्सेट, जानिये
भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (इन्सेट) बहुउद्देशीय उपग्रहों की एक शृंखला है। यह दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान, खोज और बचाव कार्य के लिए उपयोग होती है। इस शृंखला का पहला सैटेलाइट वर्ष 1983 में लॉन्च किया गया था। इससे भारत में रेडियो और टेलिविजन जैसी प्रसारण प्रणाली में क्रांति आ गई थी।

इसरो ने वर्ष 1990 में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी)को विकसित किया था। वर्ष 1993 में इस यान से पहला सैटेलाइट ऑर्बिट में भेजा गया। इससे पहले यह क्षमता केवल रूस के पास थी। 2008 में भारत और इसरो ने चंद्रयान बनाकर इतिहास रचा था। 22 अक्टूबर 2008 को पूरी तरह से देश में निर्मित इस मानव रहित अंतरिक्ष यान को चांद पर भेजा गया था। इससे पहले ऐसा सिर्फ छह देश ही कर पाए थे।

चांद तक पहुंचने के बाद भारत मंगल तक भी पहुंच गया। इसके साथ ही भारत उन गिनते के देशों की सूची में शामिल हो गया था, जहां के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ऐसा करने में सफलता हासिल की हो। वर्ष 2014 में मंगल ग्रह की परिक्रमा करने के लिए मंगलयान को छोड़ा गया था। इस मिशन की खासियत यह भी थी कि भारत ने पूरे अभियान को अमेरिका के मंगल मिशन की तुलना में 10 फीसदी कम कीमत में कर दिखाया था। वर्ष 2016 में इसरो ने एक बार फिर इतिहास रचा। इस वर्ष 28 अप्रेल को इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम के सातवें उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। इसके साथ ही भारत को अमेरिका के जीपीएस सिस्टम के समान अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम मिल गया। इससे पहले अमेरिका और रूस ने ही ये उपलब्धि हासिल की थी। जून 2016 में इसरो ने एक साथ 20 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का यह 36 वां प्रक्षेपण था। इसमें भारतीय उपग्रहों के साथ ही कनाडा, इंडोनेशिया, जर्मनी और अमेरिका आदि देशों के 17 छोटे सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे।