बच्चों को स्वस्थ रखना है तो पेरेन्ट्स को यह जानना जरूरी

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न्यूज चक्र @ बून्दी

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 फरवरी(शुक्रवार) को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। इसके तहत जिले में 1 से 19 आयु वर्ग के करीब 5 लाख 35 हजार बच्चों को कृमि नियंत्रण की दवा एल्बेण्डाजॉल नि:शुल्क दी जाएगी। अभियान में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का योगदान रहेगा। सीएमएचओ डॉ. सुरेश जैन ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
डॉ. जैन ने बताया कि इस कार्यक्रम की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए प्रचार शुरू कर दिया गया है। उनके साथ उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश शर्मा, पीएमएओ डॉ. नवनीत विजय व अस्पताल के उप नियंत्रक डॉ. ओपी वर्मा ने प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी क्रम में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवपुरा में छात्र-छात्राओं की चित्रकला, वाद-विवाद, भाषण, नारा लेखन आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई गईं। इनमें विजेता रहे छात्र-छात्राओं को 9 फरवरी (गुरुवार) को आयोजित होने वाले जिला स्तरीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवपुरा में ही आयोजित होगा। इसमें जिला कलेक्टर नरेश कुमार ठकराल, विधायक अशोक डोगरा व नगरपरिषद के सभापति महावीर मोदी सहित अन्य जनप्रतिनिधि बच्चों को नेश्नल डी-वर्मिंग डे के अवसर पर एल्बेण्डाजॉल गोलियां वितरित करेंगे।
सीएमएचओ डॉ. जैन ने बताया कि इस बार 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर राज्य में अनुमानित 2 करोड़ 17 लाख से अधिक बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों सहित सभी राजकीय व निजी विद्यालयों, मदरसों, केन्द्रीय व नवोदय विद्यालयों में कृमि मुक्ति की दवा एल्बेण्डाजॉल नि:शुल्क खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत में 1 से 14 वर्ष की आयु के 22 करोड़ बच्चों की आंतों में कृमियों के संक्रमण का जोखिम है। इसके चलते बच्चों के शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को कृमि खा जाते हैं। इस वजह से उनमें रक्त की हानि, कुपोषण और शरीर की बढ़त रुक जाने जैसी समस्याएं हो जाती हैं। कृमियों के अत्यधिक संक्रमण के कारण बच्चे इतने बीमार या थके हुए रहने लगते हैं कि वे स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान देने या स्कूल जाने तक में असमर्थ हो जाते हैं। सीएमएचओ ने बताया कि आंगनबाड़ी और स्कूल आधारित कृमि मुक्ति एक सुरक्षित, सरल व कम लागत वाला कार्यक्रम है। जिससे असानी से करोड़ों बच्चों को कृमि मुक्त किया जा रहा है। एल्बेण्डाजॉल की गोली खाने से कुछ बच्चों में उबकाई आना, उल्टी, पेट में हल्का दर्द, दस्त व थकावट जैसी सामान्य समस्याएं हो सकती हैं। यह खासकर ऐसे बच्चों में होता है जिनमें कृमि संक्रमण काफी अधिक हो। इसलिए बच्चों, परिजनों व अध्यापकों को घबराना नहीं चाहिए। बच्चों को पहले ही इस बात की जानकारी देते हुए उन्हें दवा खाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

सफाई का ध्यान रखें महिलाएं

आरसीएचओ डॉ. जेपी मीणा ने बताया कि 1 से 2 वर्ष के बच्चों को कृमि नाशक दवा की आधी गोली व 2 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली खिलाई जाएगी। किसी कारणवश शेष रहे बच्चों को मॉपअप दिवस 15 फरवरी को यह दवा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डिवîमग की दवा का किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इससे बच्चों के पेट के कृमि की समस्या का समाधान होने व उन्हें समुचित पोषण मिलने से उनका समुचित शारीरिक व मानसिक विकास हो सकेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण हो रही अस्वस्थता को वर्ष 2020 तक समाप्त करने का ग्लोबल टारगेट निर्धारित किया है। बच्चों में कृमि संक्रमण नियंत्रण करने के उद्देश्य से राजस्थान में कृमि मुक्ति कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2012 में की गई थी। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने 10 फरवरी के दिन को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस घोषित किया था। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के अभाव व संक्रमित मिट्टी के सम्पर्क में आने पर पेट में कृमि पैदा हो जाते हैं। बच्चों के नाखून छोटे व साफ रखने, साफ पानी पीने, महिलाओं द्बारा खाना बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखने, ढकने तथा अपने आसपास सफाई रखकर कृमि से बचा जा सकता है। उन्होंने शौचालयों के उपयोग व साबुन से हाथ साफ करने की नियमित आदत डालने की भी सलाह दी।