अजीबो-गरीब:भोपा का गाल आसानी से फूटा तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे

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न्यूज चक्र @ नमाना (बूंदी)
जिला मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर दूर स्थित अंथड़ा गांव में हर छह माह बाद अष्टमी पर भरने वाला अरणा माताजी का एक दिवसीय मेला भरा। इसमें सुबह से ही हजारों की तादाद में दूर-दराज तक के गांवों से ग्रामीण श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ना शुरू हो गया था। इस मेले का खास आकर्षण गाल फोड़ने की रस्म होती है। जिस भोपा के गाल फोड़े जाते हैं, अगर वह आसानी से फूट जाएं तो आगामी फसल अच्छी होने की मान्यता है। इस बार भी गाल आसानी से फूट जाने पर ग्रामीणों ने खुशी मनाई।
परम्परा के अनुसार मेले की शुरुआत गांव के पटेल मूलचंद नागर के घर से अरणा माताजी के लिए पूजा जाने से हुई। इसके बाद सुबह नौ से दस बजे के बीच थानक पर भोपा के गाल फोड़ने की रस्म अदा की गई। इस दौरान थानक पर केवल पुरुष ही चढ़ सकते हैं। महिलाओं के चढ़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है।

घरों पर नहीं चढ़ाई जाती पट्टियां
गौरतलब है कि अंथड़ा सहित आसपास के हाड़ा का पीपलदा,लीलेड़ा व्यासान आदि गांवों में किसी प्राचीन मान्यता के चलते घरों के ऊपर पट्टियां नहीं चढ़ाई जाती हैं। इसकी जगह वैकल्पिक तरीकों से छत को ढका जाता है। ऐसा माना जाता है कि जिस भी घर पर पट्टियां चढ़ाई गईं तो उस घर में कोई अनिष्ठ हो गया। युवा पीढ़ी तो इसका अंधविश्वास का कारण भी नहीं बता पाई। वहीं अब आरसीसी के चलन में आ जाने से कुछ घरों की छत इससे बन गई है।