मां का शव लिए बर्फबारी में फंसा सेना का जवान

0
377

न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क / कश्मीर

कश्मीर में हो रही भीषण बर्फबारी में सेना का एक जवान अपनी मां के शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव ले जाने के लिए चार दिन से परेशान है। मगर उसे अभी तक सेना से मदद नहीं मिली है। वहीं सैन्य अधिकारियों का कहना है कि हेलिकॉप्टर भेज दिया गया है। जल्द ही पहुंच जाएगा।
कश्मीर में भीषण बर्फबारी अभी तक सेना के बीस जवानों सहित पच्चीस लोगों की मौत का कारण बन चुकी है। टेलीग्राफ अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार पठानकोट में तैनात 25 साल के मोहम्मद अब्बास अपनी मां के शव को कंधे पर लेकर भीषण बर्फबारी के बीच अपने पैत्रक गांव की ओर बढ़ रहे हैं। जहां उन्हें मां का अंतिम संस्कार करना है। उनके साथ पचास लोग और हैं। अब्बास का आरोप है कि उन्हें सैन्य प्रशासन ने हेलिकॉप्टर नहीं दिया। वे और उनके साथी इस कारण चार दिन से खतरनाक मौसम के बीच चल रहे हैं।
अब्बास पंजाब के पठानकोट में तैनात थे। उनकी मां सकीना बेगम उनके साथ ही रहती थी। 28 जनवरी को उनकी मां का निधन हो गया। वे मां का अंतिम संस्कार पैत्रक गांव करनाह में करना चाहते हैं। यह गांव कुपवाड़ा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर है।
अब्बास के भाई शाह नवाज का कहना है कि हम पठानकोट से पहले जम्मू पहुंचे, वहां से श्रीनगर। यहां सेना ने मां के शव को ले जाने के लिए हेलिकॉप्टर देने का वादा किया था, लेकिन सुविधा नहीं दी गई। इस कारण बाद में अब्बास और मैं शव के साथ कुपवाड़ा के लिए रवाना हुए, ताकि आगे मदद मिल जाए। एविएशन अधिकारियों से सम्पर्क करने पर यहां भी निराशा हाथ लगी।
वहीं कुपवाड़ा जिले के अधिकारियों का कहना है कि अब्बास को हेलिकॉप्टर की पेशकश की गई थी, लेकिन उसके परिवार ने लेने से इनकार कर दिया। सेना के अधिकारियों के दावे पर अब्बास ने सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि कुपवाड़ा कैम्प में तो उसका फोन भी नहीं उठाया जा रहा।
नवाज ने कहा कि इसके बाद वे चित्रकूट से अपने रिश्तदारों और कुछ मजदूरों के साथ द्रांगियारी से कुपवाड़ा के लिए रवाना हुए। वहां मौसम बेहद खराब था, लेकिन गांवों वालों ने काफी मदद की। वहां से भी हम लगातार सेना से सम्पर्क के लिए कॉल करते रहे आर चार दिन तक हेलिकॉप्टर का इंतजार किया, लेकिन सेना से मदद नहीं मिली। इस पर पैदल ही वहां से रवाना होना पड़ा। नवाज ने कहा कि हम करीब बारह घंटों से चल रहे हैं। करीब तीस किलोमीटर और चलना है। दूसरी ओर कुपवाड़ा के आर्मी ऑफिसर का कहना है कि हेलिकॉप्टर यहां से भेज दिया गया है, जल्द ही वहां पहुंच जाएगा। हालांकि इसी के साथ नवाज ने यह भी कहा कि द्रांगियारी की आर्मी यूनिट ने हमारी मदद की है। हम कुल पचास लोग हैं। इनमें से चालीस लोग रास्ता बना रहे हैं। बाकी के दस लोग मां के शव को कंधे पर लेकर चल रहे हैं। गौरतलब है कि भारी बर्फबारी के चलते कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में बिजली और संचार लाइनें ठप हो गईं थीं, जो बाद में ये बहाल कर दी गईं। मगर कई इलाकों में अभी भी फोन, इंटरनेट और बिजली सुविधा बहाल नहीं हुई है।