मायावती की नई ‘माया’, बाहुबली मुख्तार अंसारी परिवार की शरण में

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को चौंकाने वाला फैसला किया। कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश के जिस बाहुबली मुख्तार अंसारी को उन्होंने ही आपराधिक छवि के कारण पार्टी से निकाला था, माया अब जीत के लिए उसी की शरण में पहुंच गईं। गौरतलब है कि मायावती इस बार विधानसभा चुनाव में जीत के लिए दलित-स्वर्ण की जगह दलित-मुस्लिम का पासा चल रही हैं। उत्तर प्रदेश में यह गणित सफल हो जाने पर किसी भी पार्टी के लिए जीत की गारंटी बन जाता है। वहीं उनके इस फैसले से माया पर विरोधी पार्टियों सहित आमजन के भी तीख्ो हमले शुरू हो गए हैं। खास बात यह रही है कि मुख्तार अंसारी, उसके भाई व बेटे को विधानसभा चुनाव में टिकट देने की घोषणा के लिए बुलाई गई पत्रकार वार्ता में मायावती ने अजीब-अजीब तर्क देकर मुख्तार अंसारी को ‘बेचारा’ व खुद को बाहुबली राजनीति का विरोधी साबित करने की भी असफल कोशिश की।
मायावती ने पत्रकार वार्ता में मुख्तार अंसारी को बहुजन समाज पार्टी में शामिल किए जाने की घोषणा की। अखिलेश यादव के द्बारा समाजवादी पार्टी से ठुकरा दिए जाने के बाद से कई दिनों से अंसारी परिवार के बसपा में शामिल होकर हाथी की सवारी करने की अटकलबाजियां गर्म थी। मायावती ने आज इस पर मुहर भी लगा दी। मायावती ने परिवार के तीन लोगों को बीएसपी का टिकट भी थमा दिया। उल्लेखनीय है कि करीब छह माह पहले मुख्तार ने शिवपाल यादव के दम पर उनकी पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय किया था। मगर इसी घटना ने मुलायम सिंह के परिवार के परिवार में जो फूट डाली, उसने समाजवादी पार्टी का पूरा खाका ही बदल कर डाल दिया। सीएम अखिलेश ने अपने ही पिता मुलायम को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा कर खुद इस पद को हथिया लिया। इस दौरान जो घटनाक्रम चला उससे केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरा देश पूरी तरह वाकिफ है।

किसको, कहां से मिला बीएसपी का टिकट?
मुख्तार अंसारी परिवार को बीएसपी में शामिल करने के साथ ही मायावती ने तीन सदस्यों को टिकट देने का ऐलान भी कर दिया। इसमें मऊ से स्वयं मुख्तार अंसारी को, घोसी से मुख्तार के बेटे अब्बास को, वहीं मोहम्मदाबाद से मुख्तार के भाई सिबकतुल्ला अंसारी को टिकट दिया गया। यहां यह भी गौरतलब है कि इन तीनों सीटों पर पार्टी पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। मगर अंसारी के लिए इन तीनों का टिकट काट दिया गया। इनमें से मोहम्मदाबाद से पूर्व में घोषित किए गए उम्मीदवार विनोद राय मायावती के इस फैसले के बाद बागी हो गए हैं।
यह कहा बागी विनोद राय ने
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मदाबाद से बीएसपी प्रत्याशी रहे विनोद राय ने कहा कि , ‘मायावती ने हमको बुलाया था। हमसे कहा कि इस समय स्थिति थोड़ी खराब है। सपा और कांग्रेस के गठबंधन से अल्पसंख्यक वोट उधर जा रहा है। इसलिए हमें उनका जवाब देना है। इस पर हमने बहन जी से कहा कि आपने हमें बुला कर टिकट दिया था। अगर बीएसपी मोहम्मदाबाद सीट पर शिबगतुल्ला को टिकट देती है तो मैं अपने समर्थकों से बात कर उसे हराने के लिए सलाह लूंगा। मैं तो बस चाहता हूं इस गुंडे को क्षेत्र से दूर रखा जाए.’ इस सीट पर फिलहाल सिबकतुल्ला अंसारी विधायक हैं।

कौन है मुख्तार अंसारी?
बाहुबली मुख्तार अंसारी साल 1996 में बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया था। चार बार विधायक रहा मुख्तार पिछले 11 साल जेल में बंद है। पहली बार 1996 में बीएसपी के हाथी पर सवार होकर मऊ से विधायक बने बाहुबली मुख्तार बाद में दो बार निर्दलीय विधायक बने। 2012 में समाजवादी पार्टी की लहर में भी मुख्तार अपनी पार्टी के निशान पर जीत गया। मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी 1985 में सबसे पहले राजनीति में आए। लेफ्ट पार्टी के टिकट पर वे लगातार चार बार मोहम्मदाबाद से विधायक रहे।

यूपी विधान सभा में अफजाल अंसारी लेफ्ट के आखिरी विधायक थे। बाद में वे समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार होकर गाजीपुर से सांसद भी बने। अंसारी भाईयों में सबसे बड़े सिबगतुल्लाह अंसारी भी विधायक हैं। पेशे से टीचर सिबगतुल्लाह दो बार विधान सभा चुनाव जीत चुके हैं।

अंसारी बंधुओं का किस-किस सीट पर प्रभाव?
बलिया, मऊ, गाजीपुर इसके साथ ही वाराणसी की कुछ सीटों पर भी अंसारी बंधुओं का दबदबा है। कुल मिलाकर 15 से 20 सीटों पर अंसारी बंधुओं की पकड़ मानी जाती है।