भाजपा के अब 13 की जगह 21 मंडल होंगे

पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष महिपत सिंह हाड़ा ने पत्रकार वार्ता में दी जानकारी

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न्यूज चक्र @ बूंदी
भारतीय जनता पार्टी संगठन के जिले में अब 13 की जगह 21 मंडल गठित कर दिए गए हैं। मंडलों के इस विस्तार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक पार्टी की पहुंच बनाना है। जिससे कि उस तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सम्भव हो सके। पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष महिपत सिंह हाड़ा ने यह बात कही। वे रविवार को होटल प्रतापगढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हाड़ा ने पत्रकारों से राज्य के आगामी बजट के लिए जिले के विकास से संबंधित सुझाव भी मांगे।
जिलाध्यक्ष हाड़ा ने बताया कि सोमवार को जयपुर में पार्टी की बैठक है। उसमें उन्हेंं जिले के विकास के लिए मिलने वाले सुझावों को रखना है। इस पर विशेषकर पर्यटन को बढ़ावा देने सहित यहां के चूड़ा उद्योग जैसे कला उद्योगों को प्रश्रय दिए जाने के मुद्दे सामने आए। यह बात भी उठी कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद सालों बाद भी बूंदी विकास से काफी दूर है।
26 जनवरी के बाद होगी कार्यकारिणी व मंडल अध्यक्षों की घोषणा
हाड़ा ने एक सवाल के जवाब में बताया कि प्रदेश से सभी मंडलों की सूची स्वीकृत होकर आ गई है। विधायक व सांसद सहित सभी वरिष्ठ पार्टीजनों से विचार-विमर्श कर नए मंडल अध्यक्षों की भी घोषणा कर दी जाएगी। जिला कार्यकारिणी की घोषणा भी मंडल अध्यक्षों के साथ या फिर इसके दो-चार दिन बाद कर दी जाएगी।
पुराने पदाधिकारियों को भी समाहित करने का रहेगा प्रयास
इसी क्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि वे जिला कार्यकारिणी में पुराने पदाधिकारियों को भी समाहित करने का प्रयास करेंगे। यह बात ऐसे पदाधिकारियों को खुश करने वाली है।
गुटबाजी कम हुई
जब हाड़ा से पार्टी में व्याप्त  गुटबाजी जैसी समस्या के निपटारे के लिए पूछा गया तो उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा कि यह अब कहा दिख रही है। इस संबंध में उन्होंने जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के ठीक बाद बुलाई गई पार्टी की बैठक व मुख्यमंत्री के आगमन पर हुर्इ सभा का भी हवाला दिया। इसमें मंच पर विभिन्न गुटों के माने जाने वाले सभी प्रमुख नेता मौजूद रहे थे। जबकि सालों से ऐसे मौकों पर काफी बिखराव नजर आता था। हाड़ा के इस प्रभाव की पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी चर्चा भी रही थी। इस अवसर पर केशवराय पाटन प्रधान प्रशांत मीणा , पूर्व जिलाध्यक्ष शौकीन चंद राठौड़, रामेश्ववर मीणा लाड़पुरा आदि भी मौजूद थे।