सलमान खान को बड़ी राहत, 18 साल बाद अवैध हथियार मामले में बरी

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न्यूज चक्र @ जोधपुर
एक्सपायर हो चुके लाइसेंसी हथियार रखने के मामले में आम्र्स एक्ट में फंसे बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को 18 साल बाद बुधवार को बड़ी राहत मिल गई। जोधपुर के सीजीएम कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। सरकार की ओर से केस लड़ने वाले वकील भवानी सिंह भाटी ने यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि सलमान के खिलाफ चिंकारा शिकार मामले में चार केस दर्ज हुए थे। इनमें से दो में उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी है। सलमान खुद के लिए लक्की मानी जाने वाली बहन अलवीरा के साथ फैसला सुनने के लिए कोर्ट में मौजूद थे।
गौरतलब है कि सलमान के सुबह देर तक कोर्ट में नहीं पहुंचने पर जज ने नाराजगी जताते हुए उन्हें आधे घंटे के भीतर हाजिर होने को कहा। अन्यथा लंच समय के बाद फैसला सुनाए जाने की बात कही। इसके बाद कोर्ट में पहले सलमान की बहन अलवीरा व कुछ समय बाद खुद सलमान अलग-अलग गाड़ियों मंे पहुंचे। इनके कोर्ट पहुंचते ही चंद मिनटों में जज ने उनका नाम पूछने के बाद उन्हें आम्र्स एक्ट मामले में बरी कर दिए जाने का फैसला सुना दिया। इसके तुरंत बाद सलमान व इसके बाद अलवीरा होटल के लिए रवाना हो गए। मीडियाकर्मियों ने दोनों से प्रतिक्रिया जानने की बहुत कोशिश की, मगर उन्होंने कोर्इ बात नहीं की। कोर्ट के बाहर उनके काफी समर्थक मौजूद थे। मगर सलमान या अलवीरा उनसे भी मुखातिब नहीं हुए। होटल पहुंचकर सलमान ने ट्वीट कर अपने समर्थकों का शुक्रिया अदा किया। उनके स्थानीय अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत के अलावा मुम्बर्इ से भी कुछ वकील साथ आए थे। फैसले के बाद वकील हस्तीमल सारस्वत ने कहा कि यह निश्चित रूप से फर्जी मुकदमा था। अदालत ने माना है कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा है। सलमान पर आरोप थे, पर किसी ने यह गवाही नहीं दी कि वो उस रात जोधपुर में थे।
उल्लेखनीय है कि सलमान के खिलाफ अक्टूबर 1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान हिरण शिकार के आरोप लगे थे। इसी मामले में आम्र्स एक्ट के तहत अवैध रूप से हथियार रखने का भी मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले पर 9 जनवरी को सुनवाई पूरी हुई थी।
विश्नोई समाज का फूटा आक्रोश
सलमान को बरी किए जाने से जहां उन्हें, उनके परिवार को व प्रशंसकों को भारी खुशी हुई, वहीं इस मामले को उठाने वाले विश्नाई समाज को रोष फूट पड़ा। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी राजस्थान का विश्नोई समाज वन्य जीवों, विशेषकर चिंकारा को अपनी संतान की तरह मानते हैं। विश्नोई समाज ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि  जज ने इस मामले में 102 पेज का फैसला दिया है। इसमें उन्होंने लिखा कि सलमान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की गलत धाराओं में केस दर्ज किया गया था। उस वक्त के जोधपुर के कलेक्टर ने समझ का इस्तेमाल नहीं किया। इन वजहों से कमजोर हुआ केस—-
 1. लाइसेंस एक्सपायर्ड नहीं था
– सलमान को बरी करते हुए अपने ऑर्डर में जज दलपत सिंह राजपुरोहित ने साफ तौर पर लिखा कि कथित शिकार के वक्त सलमान का लाइसेंस एक्सपायर्ड नहीं हुआ था, वह कुछ वक्त पहले रिन्यू हुआ था। सलमान के पास जो आर्म्स लाइसेंस था, वह 8 अगस्त 1999 तक वैलिड था। उसे ही आगे रिन्यू किया गया था।
– जज ने कहा, ”प्रॉसिक्यूशन यह साबित नहीं कर पाया कि सलमान के पास एक्सपायर्ड लाइसेंस वाला हथियार मौजूद था और उसका इस्तेमाल हुआ था। बेनिफिट ऑफ डाउट पर उन्हें बरी किया जाता है।”
2. गलत धाराओं में मामला दर्ज हुआ
– जज ने लिखा कि सलमान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 (अवैध हथियार रखने) और धारा 27 (अवैध हथियार का इस्तेमाल करने) के तहत केस दर्ज करना ही गलत था।
– कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि जब लाइसेंस एक्सपायर होकर रिन्यू हो जाता है ताे ऐसी स्थिति में लाइसेंस होल्डर को हथियार थाने में जमा कराना होता है। सलमान ने इसी रूल को फॉलो नहीं किया। लाइसेंस मुंबई से जारी हुआ था। लिहाजा एक्सपायरी डेट के बाद हथियार भी वहीं के थाने में जमा कराया जाना था।
– कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में तो उनके खिलाफ केस ही दर्ज नहीं किया था। बेहतर होता इस मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 21 (हथियार एक्सपायर होने के बाद उसे जमा कराने) के तहत केस दर्ज किया जाता।
3. लाइसेंस इनवैलिड था, हथियार अवैध नहीं था
– सलमान के खिलाफ अवैध हथियार के इस्तेमाल की दलीलें दी गई थीं। लेकिन कोर्ट ने अपने फैसले में इस बारे में स्थिति साफ कर दी।
– कोर्ट ने कहा कि हथियार का लाइसेंस उस वक्त इनवैलिड था, लेकिन हथियार अवैध नहीं था। लिहाजा, सलमान पर आर्म्स एक्ट की धारा 3 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था। उन पर धारा 21 के तहत ही मामला बनता था।
4. हिरण को गोली लगने की बात ही साबित नहीं हो पाई
– जज ने कहा कि गोली लगने से हिरणों की मौत होने की पुष्टि नहीं हुई।
– दरअसल, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि एक हिरण के पैर में फ्रैक्चर था। लेकिन इससे ये साबित नहीं होता कि उसे गोली मारी गई थी।
5. कलेक्टर ने समझ नहीं दिखाई
– जज ने लिखा कि उस वक्त के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (रजत कुमार मिश्रा) ने समझ का इस्तेमाल नहीं किया। मामले में उन्होंने अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं किया। उनकी सक्रियता भी नहीं दिखी। पुलिस भी जांच को लेकर गंभीर नहीं थी।
6. प्रॉसिक्यूशन साबित नहीं कर पाया कि हथियार किसने मुंबई भेजे
प्रॉसिक्यूशन का आरोप था कि शिकार के बाद सलमान ने हथियार किसी आदमी के जरिए प्लेन से मुंबई भेज दिए। लेकिन वो ये नहीं बता पाए कि ये कब और किस शख्स के जरिए मुंबई भेजे गए?
जबकि सलमान के वकीलों ने ये साबित कर दिया कि हथियार पुलिस के कहने पर मुंबई से एक शख्स लेकर आया। जज ने तो केस की मंजूरी पर ही सवाल उठाया। फैसले में लिखा भी गया है कि डीएम ने फैक्ट चेक किए बगैर ही केस चलाने की इजाजत दे दी।
7. पुलिस ने ही आरोप ठीक से नहीं पढ़े
– हाईकोर्ट के वकील व्यास ने बताया, “जांच करने वाले पुलिस अफसर पर भी सवाल हैं। लूणा के थाना इंचार्ज ने खुद कोर्ट में कहा कि उससे चार्ज शीट फाइल करने के लिए कहा गया और उसने ऐसा कर दिया। उसने ये भी कहा कि वो तो आरोपों को ठीक से पढ़ भी नहीं पाया था।
सलमान के खिलाफ शिकार के 3 और आर्म्स एक्ट का 1 मामला
– 1998 में “हम साथ-साथ हैं” फिल्म की शूटिंग के दौरान सलमान खान पर 3 अलग-अलग जगहों पर हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा।
– जोधपुर के पास भवाद गांव में 2 काले हिरणों, घोड़ा फार्म में 1 काले हिरण और कांकाणी गांव में 2 काले हिरणों का शिकार किया गया था।
– भवाद और घाेड़ा फॉर्म में हुए शिकार के मामले में लोअर कोर्ट ने सलमान को 1 साल और 5 साल की सजा सुनाई थी।
– बाद में हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में सलमान को बरी कर दिया। अब इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
– सलमान पर आरोप था कि उन्होंने हिरणों के शिकार में जिन पिस्टल और राइफल का इस्तेमाल किया, उनके लिए जारी लाइसेंस की तारीख खत्म हो चुकी थी। इसी केस में जोधपुर की कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी किया।
– सलमान के खिलाफ शिकार के एक और मामले में 25 जनवरी को सुनवाई है।