23 वर्ष के युवा ने बदली समाज सेवा की परिभाषा

अपने जुनून के चलते ब्लडमेन के रूप में पहचान बना चुके सुरेन्द्र अग्रवाल किरवाड़ रात-दिन जरूरतमंदों को रक्त दिलाने के लिए रहते हैं फिक्रमंद

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न्यूज चक्र @ जयपुर
स्टूडेंट हेल्प सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रवाल किरवाड़ा ने समाज सेवा को एक नया रूप देकर न जाने कितने लोगों को खून की कमी से मरने से बचाया है। उनके इस प्रयास का ही नतीजा है कि रक्त क्रान्ति जागृति अभियान के तहत राज्य भर में डेंगू व चिकनगुनिया से पीड़ित 7-8 मरीजों के लिए रोज रक्त,आरडीपी व एसडीपी की व्यवस्था की जा रही है।
सुरेन्द्र ने रक्त क्रान्ति के नाम से वॉट्सएप ग्रुप बना राज्य भर के रक्तदाताओं व अन्य समाज सेवियों को जोड़ रखा है। इसका उद्देश्य राज्यभर के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति करना है। सुरेन्द्र का दावा है कि वे जयपुर जीवनदाता वॉट्सएप ग्रुप के शरद हिगड़ और नरेंद्र नेगी के साथ मिलकर राज्यभर में लगभग 5 हजार एसडीपी की व्यवस्था कर चुके हैं। वहीं अपने पूरे पांच साल के प्रयास में करीब 90 हजार लोगों को रक्त उपलब्ध करवाने का दावा भी करते हैं। इस प्रकार यह रक्तसेवा का अनुकरणीय उदाहरण है। इसी प्रकार राज्यभर में रक्त क्रान्ति के अभियान को सफल बनाने के लिए सुरेन्द्र ने जगह-जगह पर अपनी टीमें भी बना रखी हैं। ये सभी हर समय फोन व सोशल मीडिया के माध्यम से जरूरतमंदों की सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं। उनकी पहल पर राज्यभर के जरूरतमंदों की सेवा के साथ रोगियों के परिजनों का रिकॉर्ड भी लिया जाता है, जिससे वे भी आगे इस अभियान में सहयोग कर सकें। सोशल मीडिया पर जागरुकता अभियान के तहत रक्त के बारे में जानकारी के साथ उससे होने वाले लाभ व आवश्यकता पर जोर दिया जाता है। कोटा जिले में ही वर्ष 2016 में डेंगू व चिकनगुनिया के प्रकोप के मौसम में उन्होंने बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को आरडीपी व एसडीपी उपलब्ध करवाई। सुरेन्द्र के अनुसार इस दौरान कमसे कम तीन सौ रोगी लाभांवित हुए। उनके ग्रुप के राजेन्द्र माहेश्वरी व राकेश वैष्णव को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्बारा इसी सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
कोटा शहर के मुकेश विजय, नीरज सुमन, सोनल गुप्ता, सौरभ अग्रवाल, घनिष्ट जिदल ,रोहित सिह,अमन कालरा,सन्नी ढींगरा व नितेश मालव ने वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से लोगाें को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध करवाई। रात को सोने से पहले भी सुरेन्द्र यह तय कर लेते हैं कि उनके पास या ग्रुप के अन्य लोगों से जिन भी व्यक्तियों ने रक्त के लिए सम्पर्क किया है, उन सभी की जरूरत पूरी हुई या नहीं। इन सबसे संतुष्ट होने के बाद ही वे सोते हैं। रक्त सेवा के अलावा भी सुरेन्द्र सर्दियों के मौसम में गरीब व असहायों के लिए रजाई, कम्बल की व्यवस्था भी करवाते हैं, तो गर्मी के मौसम में चप्पल बंटवाते हैं। इनके लिए बाकायदा कैम्प तक लगाए जाते हैं। बड़े स्तर पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। सहायता चाहने वालों के लिए उन्होंने अपना हेल्प लाइन नंबर 9549528262 भी जारी किया हुआ है। सुरेन्द्र व उनकी टीम के सदस्य सालभर सक्रिय रहकर अपना जन्मदिन भी जरूरतमंद बच्चों के साथ ही मनाते हैं।
करोली से कोटा आए तब जगा समाज सेवा का जुनून
सुरेन्द्र बताते हैं कि वे करीब पांच साल पहले अपने गांव करोली जिले के किरवाड़ा कोटा सीए की पढ़ार्इ करने के लिए आए थे । इस दौरान उन्होंने देखा कि लोगों को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर भारी मशक्कत करनी पड़ती है। व्यवस्था नहीं होने पर जान तक चली जाती है। उन्होंने खुद अपने साथियों व अन्य परिचितों की इस काम में मदद करने के लिए कई नेताओं से मदद मांगी तो उन्होंने भी बहाने बनाते हुए टाल दिया। तभी से सुरेन्द्र ने इस सेवा कार्य का संकल्प लिया।