साल में महज तीन घंटे विधानसभा चलाना लोकतांत्रिक संस्था का अपमान- तिवाड़ी

पं. दीनदयाल वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष एवं सांगानेर विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने बूंदी इकाई के स्नेह मिलन को संबोधित किया, हाड़ौती के दो दिवसीय दौरे के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे बूंदी

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न्यूज चक्र @ बून्दी
पं.दीनदयाल वाहिनी संस्थान की बून्दी इकाई का स्नेह मिलन समारोह रविवार को गौतम छात्रावास में आयोजित किया गया। इसमें जिलेभर से विभिन्न समुदायों के प्रबुद्धजनों व वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष एवं सांगानेर (जयपुर) विधायक घनश्याम तिवाड़ी मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरक्षण व अन्य मसलों को इस तरह उठाया कि उनके पक्ष में माहौल बन सके।
कार्यक्रम संयोजक संतोष कटारा व जिलाध्यक्ष पीताम्बर शर्मा ने बताया कि ‘सामाजिक समरसता एवं आर्थिक न्याय’ विषय पर आयोजित इस समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान ऐसा पहला राज्य होगा जिसकी विधानसभा में सालभर केवल तीन घंटे बैठक हुई। वह भी हंगामे के कारण बिना किसी कामकाज के स्थगित कर दी गई। तिवाड़ी ने इसे लोकतांत्रिक संस्था का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा चली तो वे अपने लोकसम्पर्क अभियान के दौरान प्राप्त हुए अनुभवों को सदन में रखेंगे। तिवाड़ी का कहना था कि वे दो दिन से लोकसम्पर्क अभियान के तहत हाड़ौती के दौरे पर रहे। इसी के अंतिम पड़ाव में वे बूंदी आए हैं।
हर जगह फायदा ढूंढ़ना लोक कल्याणकारी सरकार की प्रवृति नहीं
तिवाड़ी ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले साल में ही 17 हजार स्कूल बंद कर दिए। इसके बाद 4 हजार स्कूलों को और बंद कर दिया गया। इन स्कूलों को उनके शिक्षा मंत्री रहते सर्व शिक्षा अभियान के तहत खोला गया था। इन स्कूलों के बंद होने से जो 56 हजार शिक्षक अतिरिक्त हुए, इन पदों को समाप्त नहीं किया जाए। तिवाड़ी ने यह आरोप भी लगाया कि प्रदेश सरकार लोक कल्याणकारी कार्यों का निजीकरण कर रही है, इसे बंद किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा, चिकित्सा व परिवहन जैसे सार्वजनिक हित के क्षेत्रों में फायदा तलाशना लोक कल्याणकारी प्रवृति नहीं है। ये सामंती सोच का परिणाम है। लोकतंत्र में सामंतशाही का अंत करना जरूरी है।
सामाजिक समरसता के लिए वंचित वर्गों को आरक्षण जरूरी
तिवाड़ी ने यहां अपनी राजनीतिक चाल चलते हुए कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण गुर्जरों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। इससे उन्हे मिलने वाला 1 प्रतिशत आरक्षण भी हाईकोर्ट द्वारा खत्म कर दिया गया। अब उनकी हालत राजपूत और ब्राह्मणों जैसी हो गई है। दूसरी तरफ, वंचित वर्गों के 14 प्रतिशत आरक्षण का बिल विधानसभा में पास होने और राज्यपाल के दस्तखत होने के बावजूद सरकार ने नोटीफिकेशन जारी नहीं किया। इससे यह वर्ग भी आक्रोशित है। तिवाड़ी ने सवाल किया कि जब विधानसभा उसे लागू करना चाहती थी, किसी पार्टी में उस आरक्षण को लेकर कोई मतभेद नहीं, कोई समाज इसका विरोध नहीं कर रहा है, तो उसे लागू क्यूं नहीं किया गया। ऐसे समय में सरकार उनींदी सी सभी समाजों को लड़ाकर सामाजिक समरसता क्यों बिगाड़ना चाहती है। तिवाड़ी ने आरक्षण से वंचित वर्ग ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और कायस्थ जाति के गरीब लोगों को 14 प्रतिशत आरक्षण और विशेष ओबीसी को 5 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने की भी सरकार से मांग की।

मंत्री बनने की बजाए धरना देकर मंदिर बनाना मेरा सौभाग्यतिवाड़ी ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसे काम किए जो हमारी पार्टी की व्यवस्था के खिलाफ है। हम एक तरफ तो गौ रक्षा की बात करते हैं, दूसरी ओर 27 हजार गायें जयपुर की हिंगौनिया गौशाला में सरकार की नाक के नीचे मारी गईं। दीनदयाल वाहिनी ने संघर्ष किया, मैं स्वयं धरने पर बैठा, तब कहीं जाकर सरकार ने हाथ पैर हिलाए। मगर तब भी सरकार कुछ नहीं कर पाई तो गौशाला ही अक्षय पात्र को संभला दी। वहीं जयपुर में 200 मंदिरों का तोड़ा गया, झालावाड़ की स्थिति आपने भी देखी है। तिवाड़ी ने इस पर कहा कि मुझे लगता है कि मंत्री बनने की बजाय मंदिर बनवाने के लिए धरने पर बैठना मेरा सौभाग्य है। उन्होंने आर्थिक विषमता खत्म करने के लिए धन के विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता भी बताई।साथ ही कहा कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो इसके लिए पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की जरूरत है। यहां उन्होंने टिकिट बेचे जाने का आरोप भी लगाया। इस दौरान तिवाड़ी ने कार्यक्रम में मौैजूद लोगों से इस लड़ाई में उनका साथ मांगा और समर्थन में नारे भी लगवाए।

प्लूटोक्रेसी और पार्बोक्रेसी समाप्त करने के लिए हुई वाहिनी की स्थापना

तिवाड़ी ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र की स्थापना की गई थी। लोकतंत्र का मतलब उस तंत्र से है, जिसमें पहले कार्यकर्ता अपनी पार्टी का प्रत्याशी चुने और फिर जनता उन चुने हुए प्रत्याशियों में से अपने नेता का चयन करे। इसके लिए पार्टी में आंतरिक चुनाव जरूरी है। मगर आजकल हाईकमान जिसे कहता है वो ही चुनाव लड़ता है। उन्होंने देश की राजनीति में परिवारवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि जयललिता, करूणानिधि, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, शरद पंवार, नवीन पटनायक, मायावती, मुलायम सिंह और यहां प्रदेश में भी मां बेटे पार्टी के मालिक बने बैठे हैं। ये लोकतंत्र नहीं, परिवारशाही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शासन को समाप्त करने और पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की स्थापना करने के लिए ही दीनदयाल वाहिनी की स्थापना की गई है। मंच संचालन अनुराग शर्मा ने किया।अंत में जिलाध्यक्ष पिताम्बर शर्मा ने कार्यक्रम में आए लोगों का आभार जताया।

कोटा में भी हुआ कार्यकर्ता सम्मेलन

इससे पूर्व दोपहर को तिवाड़ी ने कोटा में टीलेश्वर महादेव के स्थान पर आयोजित वाहिनीे के कार्यकर्ता सम्मेलन में भी शिरकत कर इसी प्रकार के विचार प्रकट किए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत भी की। वे बारां व झालावाड़ के बाद कोटा पहुंचे थे।