फिर क्यूं बहके मंत्री मीणा के बोल

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राजस्थान के जनजातीय मंत्री नंदलाल मीणा ने एक बार फिर बेवकूफाना या बेहद चालाकी भरा बयान देकर खुद को सुर्खियों में ला दिया। मीणा ने कल उदयपुर में जनजातीय सम्मेलन में मौताणा जैसी कुरीति की अजीब तर्कों से वकालत की। मैं चूंकि उस आदिवासी बहुल जिले सिरोही में लम्बे समय तक पत्रकारिता कर चुका हूं, जहां इस कुरीति के चलते सिरोही सहित निकटवर्ती उदयपुर जिले तक के पुलिस व सामान्य प्रशासन के महीनों तक हाथ-पांव फूलते देखा है, परिवारों को तबाह होते देखा है, दिल दहला देने वाले नजारे देखे हैं…..इसलिए कह सकता हूं कि जिस कुरीति को अपराध घोषित कर देना चाहिए, उसकी मंत्री द्वारा तरफदारी करना शर्मनाक तो है ही….राज्य सरकार पर भी सवाल है ।

उल्लेखनीय है कि किसी व्यक्ति की संदेहास्पद मौत होने पर अक्सर उसके परिवारजन व नाते-रिश्तेदार ही नहीं अपितु पूरे गांव वाले एकत्र हो उसकी मौत के लिए संदेह के आधार पर किसी को भी जिम्मेदार घोषित कर उसके घर के बाहर शव को ले जाकर रख देते हैं । इसके बाद समाज की पंचायत उस कथित आरोपी पर दो-चार लाख से लेकर दस लाख और उससे भी ज्यादा तक का जुर्माना ठोक देती है | फिर जब तक आरोपी पक्ष वह रकम नहीं चुका देता, अर्थात मौताणे की रकम नहीं दे देता, तब तक शव वहीं पड.ा रहता है । इस बीच चाहे कितने भी दिन, सप्ताह क्यूं न बीत जाएंड, शव बुरी तरह सड. जाए, उसमें कीड.े पड. जाएं….कोई फर्क नहीं पड.ता | यहां तक कि जाति-पंचायत के आगे बेबस आरोपी पक्ष को अक्सर जबरन दादागिरी से तय जुर्माना चुकाने के लिए अपना घर-बार सहित सब कुछ बेचना पड़ता है । जुर्माना नहीं चुकाने पर आरोपी सहित उसके परिवार को समाज से बाहर कर दिया जाता है । इससे उस परिवार को जो तकलीफ होती है, उसे वह ही समझ सकता है | ऐसे भी मामले सामने आते हैं ,जब किसी के आत्महत्या कर लेने पर उसके परिवारजन संदेह के आधार पर किसी को भी मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा देते हैं | यहां तक हुआ है कि आत्महत्या कहीं लटक कर की है तो, जुर्माना नहीं मिल जाने तक शव वहीं लटका रहता है । चाहे कितने भी सप्ताह गुजर जाएं । किसी विवाहित महिला की संदेहास्पद परिस्थतियों में मौत हो जाए तो, चाहे कारण कुछ भी हो, ससुराल पक्ष की शामत आ जाती है । प्रशासन पहले तो ऐसे मामलों में मूकदर्शक बना रहता था, मगर भारी छिछालेदार होने पर अब कुछ मामलों में सख्ती देखने को मिली है ।

यहां यह बताना भी जरूरी है कि भाजपा के यह वरिष्ठ नेता पहले भी कई बार इस तरह के भारी विवादास्पद बयान देकर पार्टी को ढाणी परेशानी में डाल चुके हैं ।

राजीव सक्सेना