सद्भावना यात्रा ने सरहद की सेना चौकियों पर पहुंच जाने हालात, दिया संदेश

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 पश्चिमी सीमा से (तनोट, जैसलमेर) / बाड.मेर

पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सरहद पर शांति एवं भाईचारे का संदेश लेकर निकाली जा रही सद्भावना यात्रा मंगलवार को तनोट पहुंची। यात्रा में शामिल सदस्यों ने मातेश्वरी तनोटराय मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश में अमन,चैन एवं भाईचारे की दुआ मांगी।
भारत-पाक से सटी अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर सद्भावना यात्रा ने लोंगेवाला में सीमा सुरक्षा बल के जवानों से रूबरू होकर भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान भारतीय सेना के गौरवशाली अतीत को विस्तार से जाना। इस दौरान फिल्म के जरिये भारतीय सेना के पाकिस्तानी को करारा जबाव देने व उस समय की विकट परिस्थितियों के बावजूद उसे रोककर रखने के लिए अपनाई गई रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। सीमा पर तैनात जवानों ने बताया कि पाकिस्तान की तनोट में नाश्ता करने व जैसलमेर में दिन का खाना तथा जोधपुर में रात का खाना खाने की रणनीति थी । अर्थात पाकिस्तान की सेना की यह गलतफहमी थी कि वह आराम से उसकी तय रणनीति के अनुसार भारत के इन इलाकों पर कब्जा कर लेगी। लोंगेवाला में भारतीय सेना की छोटी टुकड़ी तैनात थी। ऐसे में रात को पाकिस्तानी सेना की टैंक रेजीमेंट ने हमला बोल दिया। उस समय सूचना मिल जाने के बावजूद अंधेरा होने के कारण भारत की वायुसेना पाकिस्तान के हमले का जवाब देने की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में लोंगेवाला पर तैनात गिनती के जवानों पर ही पाकिस्तान की फौज को रोकने की जिम्मेदारी थी। ऐसा नहीं होने पर पाकिस्तानी सेना जैसलमेर के हवाई अड्डे पर कब्जा कर लेती। लोंगेवाला में तैनात जवानों ने पाक रेंजीमेंट को इसके बावजूद बेहद बहादुरी व धीरज के अलावा चतुराई से करारा जबाव दिया। हालांकि उसमें हमारे ज्यादातर सैनिक शहीद हो गए । मगर सुबह का उजाला होते ही भारतीय वायुसेना के जहाज दनदनाते हुए पहुंच गए और भारी बमबारी कर आ पाकिस्तानी की टैंक रेजीमेंट को तबाह कर दिया। उसके टैंक खिलौनों की तरह उड.ा दिए गए ।
सद्भावना यात्रा के सदस्यों ने इस दौरान विभिन्न सीमा चौकियों व ग्रामीण इलाकों में बेटियों को बचाने व उन्हें पढ़ाने,स्वच्छ भारत मिशन तथा सड़क सुरक्षा का संदेश भी दिया।

उल्लेखनीय है कि पश्चिमी सीमा पर इन दिनों सद्भावना यात्रा के जरिये आपसी भाईचारे, शांति व बेटी बचाने तथा स्वच्छ भारत मिशन का संदेश दिया जा रहा है। पहली मर्तबा गुजरात के कोटेश्वर से वाघा बॉर्डर तक सरहदी इलाकों में गुजरते हुए लोगों से रूबरू होने के साथ इस तरह का संदेश देने की पहल की गई है। सद्भावना यात्रा दल रास्ते में सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ ग्रामीणों को सड़क सुरक्षा संबंधित संदेश के जरिये भी रोड सेफ्टी के विविध पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है। साथ ही विकट परिस्थितियों में तैनात जवानों से मिलकर उनके देश के प्रति समर्पण व सरहद की हिफाजत को किए गए माकूल इंतजामों से रूबरू हो रहे हैं।

गुजरात के कोटेश्वर से प्रारंभ हुई सद्भावना यात्रा अब तक करीब 1800 किमी का सफर तय कर चुकी है। इस यात्रा ने कोटेश्वर में सीमा सुरक्षा बल की वाटर विंग, दलदली इलाकों में कमांडोज, रण ऑफ कच्छ की विकट परिस्थितियों में सरहद की हिफाजत के लिए तत्पर जवानों से रूबरू होकर उनकी कार्यशैली व देश के प्रति समर्पण को नजदीक से देखा। कोटेश्वर में डिप्टी कमाडेंट भवानीसिंह ने अरब सागर में सीमा सुरक्षा बल की तैनातगी, समुद्री इलाके की तरफ से पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखने के लिए किए गए माकूल इंतजामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सुंई गांव में गुजरात राज्य सरकार एवं सीमा सुरक्षा बल की ओर से पर्यटन को बढ.ावा देने के लिए सीमा दर्शन की अनूठी पहल से रूबरू होने का मौका मिला। सद्भावना यात्रा को पश्चिमी सरहद पर देखकर जवानों को बेहद ख़ुशी हुई । अपने घर-परिवार से कोसों दूर होने के बावजूद उनसे रूबरू होने के लिए कोई पहली मर्तबा उनके पास पहुंचा।

सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने सद्भावना यात्रा के सदस्यों को बताया कि दुश्मन की हर हरकत का करारा जबाव देने में सक्षम है। उनकी निगाह पर सरहद पार होने वाली हर हरकत पर रहती है। सदभावना यात्रा बाखासर, गडरारोड़, मुनाबाव समेत विभिन्न स्थानों पर जवानों से रूबरू हुई। मुनाबाव में डिप्टी कमाडेंट अनिल एस.रावत ने भारत-पाक के मध्य फ्लैग मीटिंग,थार एक्सप्रेस की आवाजाही, तारबंदी,फ्लड लाइटिंग, मुनाबाव पोस्ट के इतिहास व मराठा हिल के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि मराठा हिल पर तैनात जवानों ने किस तरह से पाकिस्तानी सैनिकों को करारा जबाव दिया। सद्भावना यात्रा ने जैसलमेर की विभिन्न सीमा चौकियों पर पहुंचकर सद्भावना एवं भाईचारे का संदेश दिया। लोंगेवाला पोस्ट पर सदभावना दल ने भारत-पाक युद्ध 1971 के वास्तविक अनुभवों को जाना।
सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत अतिरिक्त महानिदेशक एमएल बाथम की अगुवाई में निकाली जा रही सद्भावना यात्रा में सहायक जनसम्पर्क अधिकारी मदन बारूपाल, आईईसी कसंलटेंट सीसीडीयू अशोक राजपुरोहित, विजय कुमार, जसवंतसिंह, प्रवीण बोथरा, दीपक जैलिया, ठाकराराम मेघवाल, पप्पू कुमार बृजवाल, मोहन बृजवाल,मगा पर्वत शामिल हैं।

 

मुनाबाव से दिखाई हरी झंडी

पश्चिमी सरहद पर शांति, भाईचारे, स्वच्छता सहित बेटी बचाने का संदेश लेकर सोमवार को सद्भावना यात्रा मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय सीमा से जैसलमर के लिए रवाना हुई थी। इसे सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमाडेंट अनिल एस. रावत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। सीमा सुरक्षा बल , केयर्न इंडिया, इंडियन रेडकास सोसायटी, धारा संस्थान, नेहरू युवा केन्द्र, स्वच्छ भारत मिशन के सहयोग से इस  यात्रा का आयोजन किया जा रहा है | मुनाबाव में सद्भावना यात्रा के सदस्यों ने मुनाबाव अन्तरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन, थार एक्सप्रेस की आवाजाही, विकट परिस्थितियों में सरहद की हिफाजत के लिए तैनात जवानों की डयूटी प्रक्रिया व सीमा सुरक्षा बल के सिविक एक्शन आदि के बारे में जानकारी ली। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने सरहद की हिफाजत के लिए जवानों के सदैव चौकस रहने की बात कही। सीमा सुरक्षा बल के जवान कड.कड.ाती सर्दी हो या झुलसा देने वाली गर्मी या फिर भीषण बरसात, हर विकट परिस्थिति में सरहद की हिफाजत के लिए तैनात रहते हैं।