अखिलेश व रामगोपाल के निष्कासन से कार्यकर्ताओं का फूटा रोष, आत्मदाह तक की कोशिश

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21न्यूज चक्र @ लखनऊ

पिछले कई दिनों से सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में जारी भारी मनमुटाव का शुक्रवार को क्लाइमेक्स हो गया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पत्रकार वार्ता कर सीएम अखिलेश यादव सहित राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिए जाने की घोषणा की। जैसे ही यह बात फैली पार्टी में आग सी लग गई। अखिलेश व रामगोपाल के समर्थकों का हुजूम उनके निवास पर उमड़ पड़ा। कार्यकर्ता फूट फूट कर रोते दिखे। कुछ ने तो आत्मदाह तक की कोशिश की।
उल्लेखनीय है कि पार्टी कई महीनों से अखिलेश व रामगोपाल यादव तथा मुलायम व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के खेमे में बटी हुई थी। मामला बुधवार को तब और गर्मा गया जब मुलायम यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की उसमें अखिलेश के कई करीबियों को नजर अंदाज कर दिया गया। वहीं जिन नेताओं को अखिलेश नापसंद करते थे तथा जिनके खिलाफ वे पूर्व में एक्शन ले चुके थे, उन्हे टिकट दे दिए गए। इस पर अखिलेश ने गुरुवार को अपने पसंद की 235 उम्मीदवारों की लिस्ट अलग से जारी कर  इलेक्शन लड़ने के लिए तैयारी शुरू करने को कह दिया। वहीं इसी क्रम में रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को पार्टी की मीटिंग बुलाने की घोषणा कर दी। इससे तमतमाए मुलायम ने शाम को पत्रकार वार्ता बुलाई। उनके साथ शिवपाल भी थे। इससे करीब एक घंटे पहले रामगोपाल यादव को नोटिस भेज उनसे जवाब मांगा गया था। मगर उनका जवाब आता, इससे पहले ही पत्रकार वार्ता में पहले रामगोपाल को छह साल के लिए निष्कासित करने की घोषणा की। इसी के साथ आश्चर्यजनक रूप से शिवपाल के कहने पर मुलायम ने अखिलेश के भी छह साल के लिए निष्कासन का ऐलान कर दिया। इस बीच जो खबर आ रही है उसके अनुसार इस आदेश से अखिलेश व रामगोपाल के समर्थक भारी संख्या में मुलायम व शिवपाल के घर पर भी जमा हो गए। वहां उन्होंने शिवपाल के पोस्टर फाड़े। कुछ समर्थकों ने तो अपने पर पेट्रोल डाल आत्मदाह की कोशिश की। मौके पर भारी संख्या मेंं पुलिस बल तैनात है।

बेटे को पार्टी से निकालते समय मुलायम के हर शब्द में दिखा दर्द

जब उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं तो मुख्यमंत्री अलग से उम्मीदवार क्यों घोषित कर रहे हैं। इन दोनों पर कार्रवाई के अलावा मेरे पास कोई और रास्ता नहीं बचा था।

सपा में इस समय हाहाकर मचा हुआ है। सुप्रीमो मुलायम सिंह ने आखिरकार बागी तेवर अख्तियार करने वाले अपने बेटे और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से 6 साल के निकाल ही दिया। मुलायम ने पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को भी पार्टी से बेदखल कर दिया है। दोनों को नोटिस जारी करने के कुछ ही देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुलायम ने अपने सख्त तेवर दिखाते हुए दोनों को बाहर करने का ऐलान कर दिया। संभवत:  यह पहली बार है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को ही पार्टी ने बाहर निकाल दिया हो।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम सिंह ने कहा कि हमने पार्टी बचाने के लिए दोनों को 6 साल के लिए निकाल दिया है। जब उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं तो मुख्यमंत्री अलग से उम्मीदवार क्यों घोषित कर रहे हैं।  इन दोनों पर कार्रवाई के अलावा मेरे पास कोई और रास्ता नहीं बचा था। मुख्यमंत्री अगर पार्टी विरोधी काम करेगा तो कैसे चलेगा। पार्टी हमारी प्राथमिकता है। हमारे लिए समाजवादी पार्टी प्राथमिकता है। हमें समाजवादी पार्टी बचानी है।

इससे बड़ी अनुशासनहीनता नहीं हो सकती। रामगोपाल अखिलेश का भविष्य खत्म कर रहे हैं। मुख्यमंत्री समझ नहीं पा रहे हैं। हमने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इतिहास में किसी ने ऐसा किया कि अपने बेटे को मुख्यमंत्री बना दिया। मेरा स्वास्थ्य खराब है क्या। इन लोगों से ज़्यादा दौरा करता हूं।

विशेष अधिवेशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि एक दिन में क्या अधिवेशन बुलाया जा सकता है? कम से कम 10 दिन का वक्त दिया जाता है। हमें पूछा भी नहीं, बताया भी नहीं। ऐसा कैसे हो जाएगा, कैसे एक दिन में सब आ जाएंगे। शिवपाल भी विधायक हैं। इन्हें भी पता नहीं। सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील है कि अधिवेशन में शामिल न हों।

विशेष अधिवेशन हम भी बुलाते तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करते। न तो पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक हुई और ना ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। हमें पूछ लेते कि हम संसदीय दल की बैठक बुलाना चाहते हैं। इन्होंने चुनाव से पहले जानबूझ कर ऐसा किया।

24 घंटे ऐसे चला यूपी की सत्‍ता की उठा-पटक का खेल

 सूत्रों की मानें तो सीएम अखिलेश यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव की चालें 24 घंटे भी नहीं चलीं। बेटे की चाल से पहले पिता सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने ही वजीर को पीट दिया। गुरुवार की देर रात कालीदास मार्ग पर बनी रणनीति को 19 विक्रमादित्‍य मार्ग पहुंचने से पहले ही सपा सुप्रीमो ने रणनीति की हवा निकाल दी। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव की मंशा पार्टी पर कब्‍जा कर शिवपाल यादव को बाहर का रास्‍ता दिखाने की थी। इसके लिए गुरुवार की देर रात अखिलेश यादव और उनके समर्थक रणनीति बनाते रहे थे। रणनीति ये थी कि पार्टी विधायकों, पदाधिकारियों और कद्दावार मंत्रियों का समर्थन दिखाकर अखिलेश सपा सुप्रीमो को अपने पक्ष में कर लेंगे। शिवपाल यादव को निष्‍कासित करा कर मैनपुरी से सांसद धर्मेन्‍द्र यादव को प्रदेश की कमान सौंपने की तैयारी थी।

एक जनवरी को जल्‍दबाजी में सपा का राष्‍ट्रीय अधिवेशन बुलाना भी इसी कड़ी का हिस्‍सा था। ज्यादा से ज्‍यादा संख्‍या में अखिलेश समर्थक लखनऊ में जुटाए जा रहे थे। लेकिन इससे पहले ही बाजी पलट गई। किसी तरह से अखिलश और रामगोपाल यादव की बनाई रणनीति की भनक सपा सुप्रीमो को हो गई। पार्टी को लेकर अखिलेश और रामगोपाल यादव कोई कदम उठाते इससे पहले ही सपा सुप्रीमो ने दोनों को सपा से छह-छह साल के लिए निष्‍कासित कर दिया।