काश, मजीठिया के लिए मीडिया पर भी हो सर्जिकल स्ट्राइक !

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पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट

शशिकान्त सिंह का विचारोत्तेजक लेख


भारतीय सेना के जांबाज जवानों द्वारा पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की खबर से देश झूम रहा है, नाच रहा है ।इसी बीच मुम्बई मिरर में आज धोनी पर बनी फिल्म का रिव्यू पढ़ा ।शीर्षक था सर्जिकल स्ट्राइकर । रिव्यू ने काफी कुछ सोचने को मजबूर कर दिया। काश हमारे लेबर अधिकारी भी माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों की पालना के लिए मीडिया के दफ्तरों में जा   सर्जिकल स्ट्राइक करते| तब उन्हें पता चल जाता कि कहां- कहां गड़बड़ी है। मजीठिया वेज बोर्ड की अधिसूचना में साफ़ लिखा है कि एक समाचार पत्र प्रबंधन की जितनी भी सहायक कंपनियां या शाखाएं हैं, उन सबको एकल यूनिट ही माना जाएगा।मगर अखबार मालिक अलग-अलग यूनिट का अलग-अलग टर्नओवर दिखा श्रम विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। कुछ अखबार मालिकों ने तो 20 जे का सहारा लिया है।इस 20 जे का फॉर्मेट देखकर ही समझ में आ जाएगा कि सब फर्जीवाड़ा है। 20 जे के फॉर्मेट को बाकायदा अखबार मालिकों ने टाइप कराया और दे दिया कर्मचारी को….कि नौकरी करनी है तो इसे भर कर दो।बेचारे कर्मचारी क्या करते…भर कर देना पड़ा । लेकिन पैसा होने से ही दिमाग थोड़ी चलता है, तो कानूनी सलाहकार की मदद ली जाती है | अब अगर मुर्गा खुद आपके पास कटने आ जाए तो इससे अच्छी बात और क्या है।यही हाल है लीगल एडवाइजरों का।अखबार मालिकों को लीगल एडवाइजरों ने एक फॉर्मेट दे  उसे सभी कर्मचारियों से भरवाने को को कह दिया। इसी टाइप किए हुए फॉर्मेट पर ही कर्मचारियों से धमका कर साइन करवाए गए। खास बात यह है कि इस पर कोई तारीख नहीं डलवाई गई।बोला गया डेट बाद में डाल देना।गरियाने का मन कर रहा है ऐसे कानूनी सलाहकारों को ।आप सोचिये अगर मैंने 20 जे भरा (हालांकि मैंने भरा नहीं है ) और वह भी स्वेच्छा से तो पूरा मेटर लिखूंगा या पूरा टाइप करके दूंगा। टाइप वाले की दुकान पर जाकर कभी नहीं कहूंगा कि आधा तुम टाइप करो , आधा हम हाथ से लिखेंगे ।आधा लिखकर और आधा टाइप करा करके तो कभी नहीं दूंगा।हम इतने पागल तो नहीं हैं कि डेट भी हाथ से ना लिखें और बाद में डेट टाइपिंग वाले के पास जाकर मशीन से टाइप कराएं।आरटीआई से एक साथी के द्वारा भरे गए ऐसे ही 20 जे की कॉपी मंगवाई तो उसमें यह गड़बड़ी मिली ।दूसरी चीज 20 जे उनके लिए होता है, जिनका वेतन मजीठिया से ज्यादा हो।सर्जिकल स्ट्राइक में लेबर विभाग सबसे पहले मालिकान से ये पूछे कि जनाब आपके कर्मचारियों ने अपनी इच्छा से 20 जे भरा है क्या ? अगर वे हां कहें तो उनसे यह बात लिखित में ले लेनी चाहिए । इसके बाद उनसे कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड से ज्यादा वेतन देने का प्रमाण मांगना चाहिए।देखिये , फिर कैसे इन अखबार  मालिकों की हालत खराब होती है ।इस सर्जिकल स्ट्राइक में ये भी देखना चाहिए कि मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक कितने कर्मचारियों को 10 साल से ऊपर काम करने पर प्रमोशन दिया गया।मेडिक्लेम और एलटीए कर्मचारियों को मिलता है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।और सभी स्थाई ,अस्थाई और ठेका पद्धति पर काम करने वाले कर्मचारियों की पूरी लिस्ट लेंनी चाहिए इस सर्जिकल स्ट्राइक में।सिर्फ इतना करने से ही देश के लाखों पत्रकारों का भला हो जाएगा।