बारिश के नजारे देखिये और पढ़िये सटीक रिपोर्टिंग, जो कहीं और नहीं

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बूंदी। जयपुर रोड पर बनी हुई टनल के मार्ग की पहाड़ियों से बहता झरना।

न्यूज चक्र @ बूंदीnews chakra-barishnews chakra-barish 1news chakra-barish 2

शहर में बुधवार को करीब दो घंटे में ही 89 एमएम (साढ़े तीन इंच से अधिक) बारिश हो गई। इस दौरान हुई मूसलाधार व धीमी बारिश ने मौसम को खुशगवार बना देने के साथ लोगों को भी खुश कर दिया। आसपास पहाड़ों से झरने बहने लगे। इससे यहां किसी हिल स्टेशन का सा आभास होने लगा। दूसरी ओर इस बारिश से अधिकतर सड़कें व बाजारों ने दरिया का सा रूप ले लिया।आरयूआईडीपी के निर्माण कार्यों में रही खामियां भी और उजागर हुईं। जगह-जगह सीवरेज लाइनों के धंसते जाने के साथ किए गए गड्ढों को नहीं भरने से भी लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते रहे।
फौ फटने के साथ ही रुक-रुककर हल्की बूंंदाबांदी होने लगी थी। यह क्रम काफी देर तक जारी रहा। इसी के साथ खासी उमस भी बनी हुई थी। इसी से सुबह उठकर दफ्तरों व अन्य कामधंधों के लिए तैयार होने वाले लोगों सहित स्कूलों के लिए रवाना हो रहे बच्चों को भी कुछ देर में तेज बारिश होने की संभावना लगने लगी थी। हालांकि सात बजे बाद बादलों को चीरती हुई तेज चुभने वाली धूप छिटक गई। मगर साढ़े दस बजे करीब अचानक मौसम में तब्दीली आई व बादल घिरने लगे। ग्यारह बजे तो तेज बारिश शुरू हो गई। बीच-बीच में कुछ ठहराव के साथ यह दौर एक घंटे से भी अधिक समय तक जारी रहा। इसके बाद धीमी व रिमझिम बारिश एक घंटे तक हुई।

हर बारिश में होता है शहर बदहाल, मगर कोई नहीं संजीदा

इस ऐतिहासिक व पर्यटन नगरी में कुछ देर की जरा सी बारिश ही जगह-जगह जलप्लावन के से हालात पैदा कर देती है। चौमुखा बाजार, चौगान गेट, नागदी बाजार आदि तो पूरी तरह दरिया का रूप धारण कर लेते हैं। इसके अलावा कोटा रोड, नैनवां रोड, माझी साहब का कुंड इलाका, इन्दिरा कॉलोनी ही नहीं सिविल लाइन क्षेत्र, लाइन पुलिस रोड, खोजागेट रोड, लंकागेट रोड, चित्तोड़ रोड पर भी बुरा हाल हो जाता है। इस बारिश में ही ऐसा ही हुआ। सड़कों को छोड़ दें तो हर जगह डेढ़ से दो फीट तक पानी भरा हुआ था। हर बार होने वाले इन हालातों का कारण शहर से निकल रहे दशकों पुराने बड़े-बड़े नालों पर अवैध निर्माणों का हो जाना है। यहां तक कि ऐसे नाले पर ही मजिस्ट्रेट कॉलोनी तक बस गई। इसी से हालातों की विकटता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पानी की निकासी के सारे रास्ते या तो पूरी तरह बंद हो गए या काफी सकरे। इसके अलावा नालियों व बचे हुए नालों के हिस्सों की भी समय पर सही तरीके से सफाई नहीं कराया जाना भी इसका कारण है। यहां तक कि हर बारिश में कलक्ट्रेट कार्यालय परिसर तक में भारी मात्रा मेंं पानी भर जाता है। यह कई बार तो तीन-चार दिन तक भरा रहता है। मगर शहरवासियों को इन विकट हालातों से प्रभावी तरीके से छुटकारा दिलाने के लिए कभी भी न तो प्रशासनिक स्तर पर कोर्इ पहल हुई, न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इसके लिए आवाज उठाई। शहरवासी व मीडिया भी सिर्फ बारिश के दौरान इस मसले पर फुसफुसा कर बाद में सब भूल जाते हैं।

आरयूआईडीपी के कार्यों की खामियों पर क्यों नहीं सख्त एक्शन

इसी प्रकाश शहर को साफ-सुथरा व सुंदर बनाने के नाम पर आरयूआईडीपी के द्बारा यहां लम्बे समय से सीवरेज लाइन डालने के साथ सड़क निर्माण के कार्य किए जा रहे हैं। मगर इनमें रहने वाली भारी खामियां भी बारिश उजागर कर रही है। करीब दस दिन पूर्व भी शहर में रात के समय हुई मूसलाधार बारिश से जिला चिकित्सालय में रेडक्रॉस के पास वाले प्रवेश द्बार से निकाली गई सीवरेज लाइन काफी नीचे धंस गई थी। इससे हुए गड्ढे में पानी भर जाने से वह नजर नहीं आ रहा था। इस हालात से अनजान लोगों के इसमें गिर कर बुरी तरह घायल होने के आसार पैदा हो गए थे। वो तो गनीमत रही कि आसपास के दुकानदार घंटों तक वहां खड़े रहकर लोगों वहां से निकलने से रोकते रहे। बाद में पुलिस ने आकर मोर्चा संभाला। इसी ही स्थिति इस बार भी हुई है। सिटी कोतवाली से निकल रही सीवरेज लाइन भी बैठ गई।

 

बूंदी। चौमुखा बाजार में दो घंटे की बारिश से ही भरा पानी।
बूंदी। चौमुखा बाजार में दो घंटे की बारिश से ही भरा पानी।
बूंदी। तेज बारिश से सिटी कोतवाली में धंसी सीवरेज लाइन।
बूंदी। तेज बारिश से सिटी कोतवाली में धंसी सीवरेज लाइन।
बूंदी। लंका गेट के हालात।
बूंदी। लंका गेट के हालात।