हमारी गवर्नमेंट के समय भी मैंने तो विरोध किया था: ममता शर्मा

बूंदी जिले के ग्यारह गांवों को कोटा यूआईटी में शामिल करने के मसले पर महिला आयोग की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्य सरकार पर बरसीं तो उनकी पार्टी के नेताओं को भी दिखाया आईना

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बूंदी। सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करतीं महिला आयोग की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता शर्मा।

न्यूज चक्र @ बूंदी
महिला आयोग की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा कि बूंदी जिले के ग्यारह गांवों को कोटा यूआईटी में शामिल करने की साजिश वहां के चंद रसूखदार लोगों व प्रॉपर्टी डीलर्स के इशारे पर की जा रही है। मगर हम ऐसा नहीं होने देंगे। यह प्रक्रिया हमारी कांग्रेस गवर्नमेंट के समय ही शुरू हुर्इ थी। मगर मैंने उस समय भी इसके विरोध में आवाज उठाई थी। तब मेरे साथ पार्टी का और कोई नेता नहीं बोला था। ममता ने गुरुवार को सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ममता बूंदी से विधायक भी रह चुकी हैं। उन्होंंने कहा कि जब धारीवालजी मिनिस्टर  थे , उस समय हमारी गर्वनमेंट ने ही बूंदी के ग्यारह गांवों को कोटा यूआईटी में मिलाने की घोषणा की थी। मैंने तब भी इस बात का विरोध किया था। मगर उस समय हरिमोहन जी या अन्य कोई पार्टी का नेता इस बात के विरोध में नहीं था। उनका यह भी कहना था कि हालांकि इन गांवों को कोटा यूआईटी में मिलाने के माइनस के साथ प्लस पॉइंट भी हैं। वह ऐसे कि ये गांव बूंदी जिलेे में ही कहलाएंगे। इनका राजस्व भी जिले को ही मिलेगा। पंचायतराज भी आज ही की तरह काम करेगा। इसके बावजूद भी हम अपनी धरोहरों को खोने को तैयार नहीं हैं। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि इन गांवों की जमीन पर एयरपोर्ट भी प्रस्तावित होने की बात कही जा रही है। मगर इसकी तो आवश्यकता ही नहीं है। उनके अनुसार राज्य के पूर्व वित्त मंत्री व उनके श्वसुर बृजसुंदर शर्मा ने रामगंज में इसके लिए दो सौ बीघा जमीन रिजर्व कर दी थी। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता ने यह भी कहा कि वह सचिवालय जाकर इस योजना के विरोध में मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को भी ज्ञापन दे चुकी हैं।