पहली बार कानों को समझ आई आवाजें, तीनों बच्चों के खिले चेहरे

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिए गए नि:शुल्क श्रवण यंत्रों से मासूमों के सुनने की बाधा हुई दूर, इनमें दो बालिकाएं हैं शामिल

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बूंदी। जन्म से सुनने में अक्षम बच्चे नि:शुल्क मिले श्रवण यंत्रों के माध्यम से सुनने में सक्षम होने के बाद अधिकारियों व परिजनों के साथ।

न्यूज चक्र @ बूंदी
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले के जन्म से सुनने में अक्षम तीन बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ है। इन्हें नि:शुल्क श्रवण यंत्र मिले तो कानों में आवाज सुनाई देने लगी। इन बच्चों के परिजनों ने कभी इस बात की कल्पना ही नहीं की थी। मगर अब श्रवण यंत्रों मेंं माध्यम से सुनने में सक्षम हो चुके इन बच्चों सहित परिजनों के चेहरे भी खिले हुए हैं। इन परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपने बच्चों का इलाज करवा पाते या श्रवण यंत्र खरीद सकते।

चहकने लगी हैं जनेरा व पूजा

बूंदी की वार्ड संख्या 24 के निवासी शहजाद की लाडली जनेरा व कापरेन के नयागांव के राजेश की पुत्री पूजा जन्म से ही सुनने में अक्षम थी। अपनी लाड़लियों की इस स्थिति के चलते परिजन इनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहते थे। मगर कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे कुछ नहीं कर पा रहे थे। इसी दौरान बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केन्द्ग व विद्यालय में हुई जांच में जनेरा और पूजा को चिह्नि्त कर मेडिकल कॉलेज कोटा में भिजवाया गया। वहां चिकित्सकों ने इनकी जांच के बाद कान में सुनने की मशीन लगाई तो इन्हें भी आम बच्चों की तरह सुनाई देने लगा। फिर तो इन दोनों बच्चियों सहित इनके परिजनों की खुशी का पारावार नहीं रहा। इनके पिता शहजाद व राजेश भगवान व सरकार का आभार जताने लगे।

सूरज का भी सुधरा जीवन

जन्मजात बहरेपन की पीड़ा झेल रहा धनातरी गांव का सूरज भी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बदौलत आम बच्चों की तरह अब सुनने लगा है। राज्य सरकार की योजना ने उसके पिता नंदकिशोर की चिंता को भी दूर कर दिया है। नंदकिशोर ने इस पर कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम उनके जैसे परिवारों के लाड़लों के लिए वरदान साबित हो रहा है।