कांग्रेस के बैनर तले आए भाजपाई

25
1227
बूंदी। सांसद ओम बिड़ला से बूंदी के 11 गांवों को कोटा यूआईटी में शामिल किए जाने की योजना का विरोध जताते पूर्व विधायक व भाजपा नेता ओम प्रकाश शर्मा, साथ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्य मंत्री हरिमोहन शर्मा आदि भी हैं।

न्यूज चक्र @ बूंदी
कोटा के निकटवर्ती 11 गांवों को कोटा यूआईटी में शामिल करने की प्रक्रिया का विरोध करने के लिए सोमवार को आश्चर्यजनक रूप से पूर्व राज्य मंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता हरिमोहन शर्मा के नेतृत्व में भाजपा का एक धड़ा आ गया। शर्मा के लेटरहैड पर बनाए गए ज्ञापन पर इन बड़े भाजपाईयों ने बाकायदा हस्ताक्षर किए और सांसद ओम बिरला को सौंपा। यहां बिरला ने भी इस मसले पर उनके साथ होने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि बूंदी जिले के इन 11 गांवों को कोटा यूआईटी में शामिल करने की घोषणा गत कांग्रेस शासन में होने के बाद इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। उस समय भाजपा ने तो इसका विरोध किया था। मगर कांग्रेस खुलकर कभी भी विरोध में नहीं रही। वहीं अब इस प्रक्रिया का विरोध करने के अगुवा दिग्गज कांग्रेसी शर्मा का बनना व इनके नेतृत्व में भी बड़े भाजपार्इयों का आना चर्चा का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि इन भाजपाईयों में पूर्व विधायक ओम प्रकाश शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष कुंज बिहारी बील्या, पार्षद मुकेश माधवानी, संजय लाठी जैसे नाम शामिल हैं। कांग्रेस नेता व नगर परिषद के पूर्व सभापति सदाकत अली, पूर्व पालिकाध्यक्ष नुरूद्दीन, चर्मेश शर्मा, गोपाल दाधीच आदि भी साथ थे। ये नेता अपनी बात रखने अटल सेवा केन्द्र में चल रही जनसुनवाई के दौरान बिरला के समक्ष पहुंचे। इस पर उन सहित जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल ने भी खड़े होकर इनकी बात सुृनी व सहयोग का आश्वासन दिया।
इस मसले पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बील्या का कहना है कि हरिमोहन जी तो कह रहे हैं कि किसी भी कॉमन व्यक्ति को नेतृत्व सौंपा जाए तो मुझे ऐतराज नहीं है। बील्या से जब पूछा गया कि कांंग्रेस के राज की स्कीम का विरोध करने के लिए वे कांग्रेस नेता के ही नेतृत्व में क्यों हैं, तो वे कोई जवाब नहीं दे सके। पार्षद माधवानी ने बताया कि हरिमोहन जी के लेटरहैड पर ज्ञापन लिखा हुआ था। हम सबने उसी पर साइन किए।
यहां बता दें कि भाजपा का हरिमोहन शर्मा के साथ आया धड़ा विधायक अशोक डोगरा का विरोध गुट माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि कोटा के सीमावर्ती 11 गांवों  को गत कांग्रेस राज में ही कोटा यूआईटी के अधीन लाने का फैसला होकर इसकी घोषणा भी हो गई थी | इस खबर व इस मुद्दे पर भाजपा की ओर से हुए विरोध की खबरों ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं | मगर तब कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी थी | इसका कारण एक तत्कालीन मंत्री का प्रभाव माना गया | यह चर्चा आम थी कि उन बड़े मंत्री जी ने ही यह फैसला कोटा के बड़े प्रॉपर्टी डीलर्स को फायदा पहुंचाने की गरज से उनके इशारे पर ही किया है | इधर, अब इस मुद्दे के दुबारा गर्माने पर कांग्रेस का रुख पूरी तरह बदला नजर आ रहा है | पूर्व पार्टी जिलाध्यक्ष व वित्त राज्य मंत्री रहे हरिमोहन शर्मा ने मोर्चा खोला | कुछ दिन पूर्व प्रेस कान्फ्रेंस कर विरोध करने का ऐलान किया |

+++इस खबर पर कांग्रेस व भाजपा के नेता व आमजन भी अपने विचार देना चाहें तो उनका न्यूज चक्र पर स्वागत है |