नाबालिग से दुष्कर्म के तीन दोषियों को बीस साल का कारावास

दो अन्य नाबालिग आरोपियों की तीन साल की सजा बरकरार

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न्यूज चक्र @ बूंदी
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार व्यास ने गुरुवार को नाबालिग लड़की से एक साल पुराने दुष्कर्म के मामले में तीन दोषियों को बीस साल के कठोर कारावास व कुल तीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर इन्हें एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। इस मामले में शामिल दो अन्य नाबालिग आरोपियों को किशोर न्यायालय पहले ही तीन साल की सजा सुना चुका था। इनकी अपील को न्यायाधीश ने खारिज कर अधिनस्थ न्यायालय के द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा।
यह मामला इन्द्रगढ़ थाना क्षेत्र का है। थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में पीड़ित नाबालिग की ओर से कहा गया था कि उसके गांव के पवन कुमार पुत्र ओम प्रकाश माली, सूर्य प्रकाश पुत्र हेमराज माली व रामहेत पुत्र हेमराज प्रजापत सहित दो नाबालिग लड़कों ने 27 मार्च 2015 व 25 अप्रेल 2015 को उससे दुष्कर्म किया। आरोपियों ने गांव के सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र में वारदात को अंजाम दिया। इस बीच ये उससे संबंध बनाने के लिए लगातार दबाव डालते रहे थे।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों के बयान कराने के साथ 19 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। लोक अभियोजक भूपेन्द्र सहाय सक्सेना ने पीड़ित के पक्ष में तर्क रखे। वहीं एडवोकेट राजकुमार दाधीच ने इसकी ओर से पैरवी की। इस पर न्यायाधीश व्यास ने फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों पवन, सूर्य प्रकाश व रामहेत को आईपीसी की धारा 376 (डी) के तहत बीस-बीस वर्ष के कठोर कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं पोस्को एक्ट की धारा 3/4 के तहत सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। यह जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
वहीं बाकी दो नाबालिक आरोपियों ने भी जिला एवं सत्र न्यायालय में किशोर न्यायालय के द्वारा उन्हें दी गई तीन-तीन वर्ष की सजा के खिलाफ अपील की थी। न्यायाधीश ने इस अपील का भी निस्तारण करते हुए उसे खारिज कर दिया। इस प्रकार इनकी सजा भी बरकरार रहेगी।