तकनीक के साथ नए तरीकों को अपनाएं अधिकारी: आलोक

जिले के प्रभारी सचिव ने विभागीय कार्यों की समीक्षा कर दिए निर्देश

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न्यूज चक्र @ कोटा

जिले के प्रभारी सचिव आलोक ने अधिकारियों से अपील की है कि वे तकनीकी और नवाचारों को अपनाते हुए विभागीय कार्य करें। आलोक गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर स्थित टैगोर हॉल में आयोजित विभागीय योजनाओं, अभियानों व गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
करीब तीन घंटे चली इस बैठक में प्रभारी सचिव ने सभी विभागों की योजनाओं, वृहत परियोजनाओं, बजट घोषणा तथा पूर्व में स्वीकृत व संचालित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिला कलक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर, एडीएम कल्पना अग्रवाल, एडीएम सिटी सुनीता डागा, नगर निगम आयुक्त शिवप्रसाद नकाते, जिला परिषद के सीईओ जुगल किशोर मीणा आदि अधिकारी मौजूद थे।
प्रभारी सचिव ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की समीक्षा करते हुए सभी स्वीकृत कार्य तय समय 30 जून तक पूरे करने के निर्देश दिए। ये पूरी तरह तकनीकी मापदंडों पर खरे व गुणवत्ता पूर्ण हों। उन्होंने भामाशाह योजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही कोटा के प्रवेश स्थलों का सौंदर्यीकरण करने, अतिक्रमण मुक्त सुन्दर व स्वच्छ शहर बनाने, नयापुरा में स्पोर्ट्स जोन बनाने, अमृत योजना में पुराने कोटा के लिए पेयजल उपलब्ध करवाने, सीवरेज उपचारित जल के औद्योगिक उपयोग, कृषक सेवा केन्द्रों का निर्माण पूरा करने, आजीविका मिशन से अधिकाधिक युवाओं को कौशल समृद्ध बनाने व जिले में ही रोजगार दिलाने सहित विभिन्न मुद्दों की भी विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए।
ई-इनिशिएटिव में अग्रणी राजस्थान

प्रभारी सचिव ने कहा कि भामाशाह योजना और राजस्व रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन जैसे ई-इनिशिएटिव में राजस्थान देश में अव्वल है। इसे और प्रभावी बनाने के लिए सम्पूर्ण राजस्व रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन कार्य को प्राथमिकता पर रखते हुए इसे गति दी जाए। इससे योजनाओं का क्रियान्वयन ना केवल सरल और पारदर्शी होगा, वरन फिजूल के वाद-विवाद और झगड़ों से भी मुक्ति में ये नवाचार सहायक बनेंगे।

तेज गर्मी के मद्देनजर मुस्तैद रखें तैयारियां

प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभागीय कार्यों को समय पर अंजाम देेने के साथ आगामी दिनों के दृष्टिगत सभी तैयारियां दुरुस्त रखें। इनमें सड़कों की स्थिति में सुधार करने, मौसमी बीमारियों की आशंका के मद्देनजर सभी व्यवस्थाएं रखने, पानी की स्वच्छता और सैम्पलिग के प्रति गंभीरता बरतने, विद्युत व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने, पेयजल समस्याग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरोें से आपूर्ति सुचारू रखने, सभी टैंकरों में जीपीएस लगाने, जल स्रोतों के शुद्धिकरण पर विशेष निगरानी रखने व अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने की बात शामिल थी।