राष्ट्रवाद के लिए देवासुर संग्राम सा संघर्ष चल रहा है

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न्यूज चक्र @ कोटा

देश में राष्ट्रीयता का विस्मरण होता जा रहा है। राष्ट्रवाद और राष्ट्रद्रोह के बीच राष्ट्रवाद की स्थापना का संघर्ष चल रहा है। प्रत्येक कालखंड में संघर्ष के चेहरे बदलते रहे हैं। वर्तमान संघर्ष भी वैदिक काल के देवासुर संग्राम के समान ही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रान्त कार्यवाह हनुमान सिंह ने यह बात कही। वे शुक्रवार को आरएसएस की ओर से गुमानपुरा स्थित मल्टीपरपज स्कूल में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कोटा महानगर संघचालक ताराचंद गोयल भी मंच पर मौजूद थे।

सिंह ने कहा कि कभी आसुरी शक्तियां हिरण्यकश्यप, रावण और कंस के नाम से जानी जाती थीं। वहीं आज इन्हें आईएसआईएस या इस्लामिक स्टेट कहा जाता है। इनके नाम हर युग में बदले, लेकिन इनके कर्म अभी भी वही हैं। यजीदी महिलाओं की बोली लगाने वाले और सार्वजनिक रूप से बेगुनाह लोगों की हत्या करने के बाद बनाए गए वीडियो को देखकर समझा जा सकता है कि हजारों सालों पूर्व भारत पर आक्रमण करने वालों ने कैसा तांडव मचाया होगा।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें अब तक छिपकर काम करती रहीं थीं, लेकिन अब वे खुलकर सामने आने लगी हैं। एक विचार प्रणाली से प्रभावित लोगों ने नक्सलवाद को पनपाया और अपने ही लोगों को अपनों के खिलाफ बन्दूकें थमा दीं। उनके ही विचार को पुष्ट करने के लिए वे भारत के टुकड़े करने के नारे लगाते फिर रहे हैं। यह विचार भारत का नहीं बल्कि बाहर से आया है।

सिंह ने प्राचीन भारतीय विज्ञान की महत्ता बताते हुए कहा कि भारतीय काल गणना पूर्णतया वैज्ञानिक है। इसे पूरे विश्व ने अपनाया है। वहीं आज इस काल गणना को भारतीय जनसमुदाय ही भुलाने लगा है। पाश्चात्य कलेण्डर को मानने से भारतीय समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। देशकाल परिस्थिति के अनुसार उपयोगी विदेशी विचार को भी अपनाया जा सकता है। लेकिन काल बाह्य और अनुपयोगी विचारों को अपनाना सही नहीं है। आधुनिकता के नाम पर फिर से पूरे समाज को कुछ लोग नग्न संस्कृति की ओर धकेलना चाहते हैं। आज पूरे देश में परिवारों को फिर से संस्कारवान बनाने की आवश्यकता है। लोगों को परिवार नामक संस्था का महत्व समझाने की जरूरत है। समारोह में स्वयं सेवक सफेद शर्ट, खाकी निकर, काली टोपी सहित हाथों में दण्ड लेकर पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। इस दौरान स्वयंसेवकों ने दण्ड का प्रदर्शन भी किया।

दण्ड से दिखाई वीरता

कार्यक्रम के दौरान दण्ड के द्वारा विभिन्न क्रमिकाओं से स्वयं सेवकों ने अद्भुत वीरता और साहस का परिचय दिया। कार्यकर्ताओं ने स्वागता प्रकार प्रयोग 1 के द्वारा भगवा ध्वज को प्रणाम किया। इसके बाद सिरमार क्रमिका 1 तथा सिरमार क्रमिका 2 के द्वारा दण्ड से सिर पर प्रहार का प्रदर्शन किया। एक से अधिक शत्रु होने पर चारों दिशाओं में ध्यान रखते हुए साहस का प्रदर्शन षट्पदी चतुष्क के प्रयोग के द्वारा किया गया। इसके अलावा द्विमुखी गतियुक्त प्रहारश:, स्थालान्तर युग चतुष्क, भेद   द्विमार द्वय, भेद उर्णवृत चतुष्क, प्रहार मार तूर्यभ्रम चतुष्क, वाम मण्डल मार प्रकार 1 का भी प्रदर्शन किया गया।

योग में दिखाया शारीरिक संतुलन

इस अवसर पर हर उम्र के कार्यकर्ताओं ने अपने शरीर के अद्भुत संयोजन से सभी को नित्य अभ्यास का महत्व समझाया। इस अवसर पर ताड़ासन, उत्कट आसन, अर्धकटि चक्रासन, वीर भद्रासन प्रकार 1 तथा 2, त्रिकोणासन, वज्रासन व पद्मासन का प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने तिष्ठ योग और दण्ड योग के   द्वारा शारीरिक क्षमताओं और अभ्यास का परिचय दिया।

आद्य सरसंघचालक को प्रणाम

संघ की कार्यपद्धति के अनुसार वर्ष में एक बार संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार को पूर्ण गणवेश में ‘आद्य सरसंघचालक प्रणाम किया जाता है। संघ की ओर से चैत्र शुक्ल एकम् को डॉ.हेडगेवार का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। इस दौरान डॉ. हेडगेवार के चित्र के समक्ष माल्यार्पण करने के बाद आद्य सरसंघचालक प्रणाम किया गया।

मधुर स्वरलहरियों से गूंजा आसमान

प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने बताया कि कार्यक्रम में काव्यगीत ‘आज श्रद्धासुमन अर्पित, कर रहा हर्षित गगन, हे परम आराध्य केशव, युगपुरुष शत् शत् नमन्… की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद घोष के वाद्यों से निकल रही मधुर स्वर लहरियों के बीच भगवा ध्वज फहराया गया। घोष के आणक, वंशी, बैण्ड, झांझ तथा बिगुल के द्बारा ध्वज वंदन, ध्वज अवतरण समेत एक से बढ़कर एक कर्णप्रिय रचनाओं का वादन किया गया। कार्यक्रम के बाद सभी ने एक दूसरे को युगाब्द 5118 तथा नवसंवत्सर 2073 की बधाई दी।