पठानकोट मामले की जांच से जुड़ेे डिप्टी एसपी की हत्या, एनआईए ने बताया सुनियोजित हमला

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एनआईए) ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुई अपने एक डिप्टी एसपी की हत्या को सुनियोजित हमला बताया है। इस हमले में उनकी पत्नी फरजाना भी गम्भीर घायल हुई हैं। वहीं दोनों बच्चों को कोई नुकसान नहीं हुआ। एनआईए के प्रवक्ता संजीव कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हत्यारे उन तक कैसे पहुंचे? उन्होंने कहा, सुनियोजित हमले में एनआईए के डिप्टी एसपी तंजिल अहमद की हत्या कर दी गई।
तंजिल अपनी पत्नी के साथ शनिवार रात एक बजे करीब उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक शादी से लौट रहे थे। उसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी। वह पिछले साढ़े छह साल से एनआईए में कार्यरत थे। वह मूल रूप से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से थे। इसमें वह सहायक कमांडेन्ट थे। प्रवक्ता के मुताबिक,बाइक पर आए हमलावरों ने उन्हे सहसपुर शहर के निकट नजदीक से कई गोलियां मारीं।
सूत्रों ने बताया कि डिप्टी एसपी को 21 गोलियां मारी गईं थीं। उनकी पत्नी को चार गोलियां लगी हैं। गोलीबारी की इस घटना में उनके दोनों बच्चे बाल-बाल बच गए। वारदात के बाद तंजिल को मुरादाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। रविवार शाम दिल्ली में उन्हे सुपुर्दे खाक कर दिया गया।  उनकी पत्नी नोएडा के एक अस्पताल में जिदगी और मौत के बीच झूल रही हैं। लखनऊ से एनआईए के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके थ्ो।

तंजिल अहमद सहसपुर के रहने वाले थे। उनके चचेरे भाई का कहना है कि वो भान्जी की शादी से वापस आ रहे थे। तभी उन पर हमला किया गया। दो आदमी मोटरसाइकिल से आए और ताबड़तोड़ फायरिग कीं। तंजिल हाल ही में भारत आई पाकिस्तान की जेआईटी टीम के साथ एनआईए के लाइजनिंग अफसर रूप में जुड़े थे। इसके अलावा वो बर्धमान हमले, नकली नोटों की जांच और इंडियन मुजाहिदीन के हमलों से जुड़ी जांच में भी शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2010 में बीएसएफ से डेपुटेशन पर एनआईए जॉइन किया था। वो सबसे बेहतरीन अधिकारियों में से एक माने जाते थे।

आतंकियों की शरणस्थली बनता जा रहा है बिजनौर

पश्चिम उत्तर प्रदेश का शांत माना जाने वाला बिजनौर जिला आतंकवादियों की शरणस्थली के रूप में पहचान बनाता जा रहा है। दिल्ली तक को हिला देने वाली यह वहां की तीसरी बड़ी घटना मानी जा रही है। इससे पहले 12 सितंबर 2014 को जाटान ब्लास्ट से बिजनौर में रहकर सिमी के भगोड़े आतंकियों के देश को हिलाने की साजिश रचने का खुलासा हुआ था। बम बनाने के दौरान हुए इस विस्फोट में इनमें से एक आतंकी महबूब झुलस गया। उसके साथी आतंकी साथी पुलिस व एटीएस की नाकाबंदी को धता बताकर उसे साथ लेकर फरार होने में कामयाब हो गए थे। बाद में दो आतंकी तेलंगाना में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। वहीं चार अन्य को उड़ीसा में गिरफ्तार किया गया। इस मामले की जांच कर रही एनआईए ने इन सब आरोपियों पर दस-दस लाख रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था।
जाटान ब्लास्ट के बाद डाकघर चौराहे पर लगे सीसी टीवी कैमरे से अक्टूबर 2013 में उनकी शिनाख्त खंडवा जेल से फरार सिमी आतंकी महबूब गुड्डू उर्फ मलिक पुत्र अब्दुल हकीम, असलम उर्फ मोहम्मद असलम उर्फ सोहेब उर्फ बिलाल उर्फ संतोष पुत्र मोहम्मद अय्यूब, अमजद पुत्र रमजान खान, जाकिर हुसैन सादिक उर्फ विक्की डॉन उर्फ विनय कुमार पुत्र बदरुल हुसैन तथा एजाजुद्दीन उर्फ एजाज उर्फ रियाज उर्फ राहुल पुत्र अजीजुद्दीन के रूप में हुई थी। इनका छठा साथी मोहम्मद सलिक उर्फ सल्लू बताया गया है।
ब्लॉस्ट की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने वहां से पेट्रोमेक्स के गैस सिलेंडर को काटकर बनाया गया अधबना बम, माचिस के चार-पांच बड़े कार्टन, माचिस की तीलियों से खुरचकर एकत्र बारूद, एक एल शेप पाइप के भीतर कोई विस्फोटक, डेटोनेटर, एक 9 एमएम पिस्टल, लैपटॉप व दो मोबाइल फोन बरामद किए थे।
फर्जी आईडी भी मिली थी। इससे पहले वर्ष 2000 में बिजनौर में नजीबाबाद नेशनल हाईवे पर एक स्कूल के पास पुलिस की कश्मीरी आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई थी। इसमें एक दरोगा शहीद हो गए थे और चार आतंकवादी मारे गए थे।