कोलकाता: निर्माणाधीन पुल गिरने से बड़ा हादसा, करीब डेढ़ सौ लोग दबे, 14 मौतों की पुष्टि

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

कोलकाता में गुरुवार को गणेश टॉकीज के पास एक निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो गया। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस हादसे में अभी तक 14 लोग मारे गए और 78 घायल हुए हैं। इसके अलावा 150 लोगों के दबे रहने की आशंका है।पीएम मोदी ने कोलकाता हादसे पर शोक जताया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनडीआरएफ की टीम कोलकाता हादसे की जगह भेज दी गई और बचाव और राहत कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केन्द्रीय ग्रह राज्यमंत्री किरन रिजीजू ने कहा है कि हमारी टीमें लगातार पश्चिम बंगाल की टीमों के साथ संपर्क में हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घटना स्थल पर पहुंची। राज्य सरकार ने मरने वालों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपए और घायलों के लिए 2 लाख मुआवजे की घोषणा की।

एनडीआरएफ के 80 जवान घटनास्थल पर पहुंचे

एनडीआरएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने दिल्ली में कहा कि कोलकाता हवाई अडडे के करीब राजारहाट एनडीआरएफ कैंप से जवानों को भेजा गया है। यह एनडीआरएफ कैंप दुर्घटनास्थल से केवल 13 किमी दूर है। सिंह ने बताया, जवान तुरंत बचाव कार्य शुरू करने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं।क्या कहा प्रत्यक्षदर्शियों नेप्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई और उसके साथ ही पुल भरभरा कर गिर गया। उसने बताया कि पुल वहां से जा रहे वाहनों पर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, ‘पुल के मलबे के नीचे 100 से भी ज्यादा लोग दबे हो सकते हैं। काफी लोग हताहत हुए हैं। मलबे में मानव शरीर के अंग दिखाई दे रहे हैं और सड़कों पर खून बिखरा हुआ है।

इसके अलावा टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार, चश्मदीदों ने आशंका जताई है कि कम से कम 150 लोग दबे हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह पुल पिछले तीन साल से बन रहा थ राहत एवं बचाव कार्य में सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है।पुल के आस पास के इलाके में रहने वाले लोग डरे-सहमे हुए हैं। डर के मारे महिलाएं और बच्चे रो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कहा कि इस हादसे के लिए राज्य की ममता बनर्जी सरकार जिम्मेदार है।

इस हादसे को राज्य की ममता सरकार के लिए एक बड़े सेट बैक के रूप में भी देखा जा रहा है। क्योंकि कुछ ही समय बाद वहां विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस बेहद सकरे इलाके में पुल निर्माण को मंजूरी देना ही सवालों के घ्ोरे में था। विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने इस पूरे मामले पर राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उसे घ्ोरना शुरू कर दिया है। लोगों में भी खासा आक्रोश है। राहत कार्य के लिए जारी है। मगर नीचे दबे हुए लोगों को जिन्दा निकालना बहुत बड़ी चुनौती मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि पुल के टूटे हिस्से के नीचे दबे हुए लोगों की आवाजें आ रही हैं। वहां राहत कार्य के लिए सेना को भी बुलाए जाने की जानकारी मिल रही है। खास बात यह है कि गिरे पुल के इस हिस्से को रात को ही लगाया गया था। यह इलाका काफी भीड़भाड़ वाला है।