रजत के लिए न्याय मांगने उमड़े शहरवासी, परिचित व परिजन

मौन जुलूस निकाला,मोमबत्तियां जला कर दी श्रद्धांजलि

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न्यूज चक्र @ बूंदी

माटूंदा गांव के सरपंच एवं भाजपा किसान मोर्चा के छोटे पुत्र रजत के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग सहित उसकी आत्मा की शांति के लिए शनिवार शाम जिला मुख्यालय पर विशाल मौन जुलूस निकाला गया। अंत में अहिंसा सर्किल पर पहुंच कर मोमबत्तियां जला उसे श्रद्धांजलि दी गई। इसमें खास बात यह रही कि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठ कर सभी दलों के प्रतिनिधियों के अलावा आरएसएस के कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हुए। महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। हर जगह पुलिस का खास बंदोबस्त था।
यह आयोजन आईडीबीआई बैंक के रजत के सहकर्मियों व मित्रों ने किया था। इसमें रजत की मां रेणुबाला शर्मा सहित अन्य परिजन व रिश्तेदार भी बड़ी संख्या में शमिल थे। इसके लिए शाम साढ़े पांच बजे का समय घोषित किया गया था। जुलूस को छह बजे रवाना होना था। मगर पांच बजे तक ही निर्धारित स्थल सीनियर सैकंडरी स्कूल के मैदान पर बहुत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एकत्र को चुके थे। इसके चलते छह बजे से पूर्व ही इस मौन जुलूस को रवाना कर दिया गया। इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग आकर शामिल होते रहे। कई गांवों से भी इसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व ग्रामीण आए। जुलूस में शामिल पुरुषों ने शोक व विरोध स्वरूप अपनी बांहों पर महिलाआें ने मुंह पर काली पट्टी बांध रखी थी। यह सीनियर सैकंडरी स्कूल के मैदान से शुरू होकर महावीर सर्किल, इन्दिरा मार्केट,कोटा रोड होते हुए महावीर सर्किल पर पहुंचा। यहां परिजनों व अन्य लोगों ने मोमबत्तियां जला कर रजत को श्रद्धांजलि दी। इसी के साथ लोगों ने रजत के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार कर उसे न्याय देने की मांग को लेकर नारेबाजी भी की। जुलूस में शामिल लोगों व महिलाओं ने इस संबंध में स्लोगन लिए कई छोटे-बड़े बैनर व पोस्टर भी हाथ में लिए हुए थे। एक पोस्टर पर रजत के फोटो के साथ लिखा हुआ था-मेरा क्या कसूर था। जुलूस में शामिल गणमान्य शहरवासियों में मुकेश माधवानी,रूपेश शर्मा, टीकम जैन, संजय तम्बोली, भरत शर्मा, चर्मेश शर्मा, गौरव शर्मा, डॉ. मनोज शर्मा, हुमेरा कैसर, सुनील हाड़ौती आदि शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि 21 मार्च की रात करीब साढ़े आठ बजे बूंदी से बाइक पर गांव लौटते समय रास्ते में घात लगाकर बैठे आरोपियों ने रजत की हत्या कर दी थी। शरीर पर मिले घाव व पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अलावा मौके के हालात भी इस बात की गवाही दे रही है। मगर लोगों का कहना है कि पुलिस इसे दुर्घटना का रूप देने पर तुली हुई है। इसमें विशेषकर सदर थानाधिकारी की भूमिका की आलोचना हो रही है।