281पदक-छात्राओं को 200, 190 शोध उपाधियां-छात्राओं को 115

कोटा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: संकीर्णताओं, सीमाओं, भय और अवसाद से मुक्त करने वाली शिक्षा ही सच्ची शिक्षा : राज्यपाल कल्याण सिंह

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कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में पदक व उपाधियां प्रदान करते राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कल्याण सिंह।

न्यूज चक्र @ कोटा

राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि सच्ची शिक्षा और दीक्षा वही है जो संकीर्णताओं, सीमाओं, अज्ञान, भय, संदेह, निराशा व अवसाद के बंधनों से मुक्त कर अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए। सिह रविवार को यूआईटी के ऑडिटोरियम में आयोजित कोटा विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक व संरचनात्मक भूमिका निभाते हुए परिश्रम, संकल्प और निष्ठा से कार्य करें। विद्या प्राप्त करने के बाद संकीर्णताओं, भय, संदेह व अवसाद जैसे बंधनों से मुक्ति मिलती है।

ऋषि-मुनियों ने ज्ञानार्जन कर जनकल्याण के लिए समर्पित किया

भारत के गौरवमय इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों-आचार्यों ने कठिन तपस्या कर ज्ञानार्जन कर अपने आप को जनकल्याण के लिए समर्पित किया। भारत का प्राचीन साहित्य ज्ञान का भण्डार है। आज भी पूरा विश्व उसकी प्रासंगिकता मानता है। कुलाधिपति ने अतीत की शिक्षा प्रणाली तथा तक्षशिला व नालन्दा जैसे शिक्षण संस्थानों को ज्ञान का केन्द्र बताया। साथ ही वर्तमान विश्वविद्यालयों को भी उच्च श्रेणी का बना कर युवाओं का सर्वांगीण विकास करने की बात कही।
विश्वविद्यालय व विद्यार्थियों को कर्तव्य बताए
सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व जनकल्याण का ध्यान रखते हुए पाठ्यक्रमों को तैयार करे। युवाओं को भारतीय सामाजिक व्यवस्था, जीवन मूल्य, सांस्कृतिक गौरव, राष्ट्रीय भावना एवं कौशल विकास आधारित शिक्षा दिए जाने की जरूरत है। वहीं दीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे स्वावलम्बी बनने का प्रयास करें। स्वयं का उद्यम स्थापित कर देश के विकास को नई दिशा दें। देश को पुन: विश्व गुरू बनाने के लिए युवा सोच व स्फूर्ति के साथ स्वामी विवेकानन्द के दिए संदेश उठो, जागो और आसमान को छू लो का अनुसरण करते हुए कार्य करना होगा।
विद्यार्थियों के लिए ये खास सबक
राज्यपाल सिंह ने दीक्षार्थियों से रूबरू होते हुए कुलाधिपति के रूप में उन्हें कुछ सीख दीं। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी निराश-हताश नहीं हों। निरन्तर प्रयास करते रहें। प्रत्येक युवा जीवन का लक्ष्य तय कर उसे प्राप्त करने के लिए अपने पौरूष पराक्रम का उपयोग करें। सामाजिक सरोकार का भावार्थ बताते हुए कहा कि प्रत्येक सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी का योगदान होता है। गुरूजन, माता-पिता, समाज व देश का योगदान कभी नहीं भूलें। जिस गांव, मोहल्ले, शहर में रहते हैं, उनके लिए कार्य करें। नशामुक्ति, जुआमुक्ति, स्वच्छता व शिक्षा के लिए लोगों को रास्ता दिखाएं। यही सामाजिक सरोकार है।
कन्या नहीं पराया धन
दीक्षांत समारोह में विभिन्न श्रेणी के कुल 281 पदक प्राप्त करने वालों में 200 छात्राएं व 81 छात्र शामिल थे। शोध की 190 उपाधियों में से भी 115 छात्राओं को व 75 छात्रों को प्रदान की गईं। इस अनुपात को देखकर राज्यपाल ने छात्रों को सीख लेने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कन्या को पराया धन नहीं मानना चाहिए। वे आंगन की मणि के समान हैं। यह खुशी की बात है कि बालिकाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़कर देश-समाज का नाम रोशन कर रही हैं।
किस संकाय की कितनी उपाधियां
दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 281 पदक व 190 शोध उपाधियां प्रदान कीं। इनमें से कला संकाय में 45, विज्ञान में 117, समाज विज्ञान में 45, वाणिज्य में 38, विधि में 6, शिक्षा संकाय में 20 पदक प्रदान किए। साथ ही 190 शोध उपाधियां भी शोधार्थियों को दी गईं।
निजी विश्वविद्यालय भी लेंगे पांच-पांच गांवों को गोद: सराफ
दीक्षांत समारोह में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने बताया कि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा भी पांच-पांच गांवों को गोद लेकर उनमें जनजागृति व सर्वांगीण विकास के लिए कार्य शुरू किया जाएगा। केन्द्रीय स्तर पर नवीन शिक्षा नीति बनाई जा रही है। इसमें राजस्थान से अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिये गए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को यूजीसी के मापदंडों के अनुसार स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर कुलपति प्रो.पीके दशोरा ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। विधायक चन्द्रकांता मेघवाल, संदीप शर्मा व हीरा लाल नागर भी इस अवसर पर अतिथि के रूप में मौजूद थे। अंत में कुल सचिव डॉ.अम्बिका दत्त चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में महापौर महेश विजय, जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर, एसपी (सिटी) सवाई सिह गोदारा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

राज्यपाल ने किया स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा का अनावरण

राज्यपाल सिंह ने इस अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा का अनावरण भी किया। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन कर सुविधाओं के विस्तार की बात कही। विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर स्थापित प्रतिमा अनावरण के अवसर पर अन्य अतिथियों के साथ छात्रसंघ अध्यक्ष लोकेश गुंजल सहित सभी संकायों के विभागाध्यक्ष व छात्रासंघ पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

राज्यपाल सोमवार को डूंगरज्या गांव में

राज्यपाल सिंह सोमवार को जिले की दीगोद तहसील के डूंगरज्या गांव में ग्रामीणों से रूबरू होंगे। इसके लिए वे सर्किट हाउस से सुबह 10.10 बजे प्रस्थान कर 11 बजे डूंगरज्या पहुंचेंगे।
उल्लेखनीय है कि डूंगरज्या गांव को कोटा विश्वविद्यालय ने विकास के लिए गोद लिया है। वहां उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा गांव में की जा रही गतिविधियों की जानकारी भी दी जाएगी।

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कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मौजूद दीक्षार्थी, उनके अभिभावक,अधिकारी आदि।
कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मौजूद दीक्षार्थी, उनके अभिभावक  व अधिकारी आदि |
 आदि। कोटा। कोटा विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा का अनावरण करते राज्यपाल एवं कुलाधिपति सिंह।
कोटा। कोटा विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा का अनावरण करते राज्यपाल एवं कुलाधिपति सिंह।