संसार एक रंगमंच, हम सब कलाकार

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित किया जा रहा है खुशनुमा जिन्दगी जीने की कला पर कार्यक्रम

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bk 4b k 2bk 3न्यूज चक्र @ बूंदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से आजाद पार्क में आयोजित पांच दिवसीय खुशनुमा जिन्दगी जीने की कला विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए ब्रह्माकुमारी रचना दीदी ने कहा कि यह संसार एक रंगमंच है। हम सब इसमें एक्टर हैं।

रचना दीदी ने आगे कहा कि हर एक का अपना-अपना पार्ट है। किसी का नेगेटिव पार्ट है तो किसी का पॉजिटिव रोल है। हम अपनी जिन्दगी को एक अभिनय समझते हैं। डिटेच रहकर ,साक्षी होकर अपना पार्ट निभाते हैं तो उसका आनंद आता है। गीता में इसी बात को ऐसे कहा गया है कि जो हुआ वह अच्छा है,जो हो रहा है वह बहुत अच्छा है। और जो होने वाला वह और भी अच्छा होगा। इसके पीछे बहुत ही गूढ़ रहस्य है। इसमें ही जीवन का सार समाया हुआ है। जब हम इस बात को अच्छी तरह समझ जाएंगे, तब ही जीवन में सच्ची खुशी को प्राप्त कर सकते हंै।

उनका कहना था कि आज एक-दूसरे के विचारों व भावनाओं को न समझने के कारण ही हमारे संबंधों में तनाव हो रहा है। संबंधों में मधुरता के लिए तीन बातें आवश्यक है। पहला मेरा मेरे साथ संबंध। दूसरा मेरा दूसरों के साथ संबंध। तीसरा मेरा परमात्मा के साथ संबंध। पहला व तीसरा संबंध हमने नहीं जोड़ा है। जब हम भगवान के सामने जाते हैं तो कहते हैं भगवान मुझे माफ कर देना। मैं तो नीच हूं ..,कपटी हूं…,नालायक हूं..आदि -आदि…। मगर विडम्बना है कि हम यह बात दुनिया के सामने नहीं बताते हैं। अर्थात हमने जो कहा वो हम स्वीकार नहीं करते हैं। अर्थात भगवान से ही झूठ बोल रहे हैं। आपका बच्चा आप से आकर कहे कि मैं तो बुद्धू हूं ,बेकार हूं..,नालायक हूं.. तो आपको कैसा लगेगा। क्या आप उसे प्यार करेंगे ? नहींं ना…. तो फिर भगवान कैसे पसन्द करेगा। भगवान को भगवान न समझें, बल्कि वह आपका सच्चा संबंधी है। भक्त पहलाद ने भगवान को भगवान कभी नहीं समझा, बल्कि सदा पिता के रूप में ही देखा, समझा। मीरा ने भी सदा साजन के रूप में भगवान को अपना बनाया। सती अनुसुईया ने भी भगवान को अपना बच्चा बनाकर रखा। द्रोपदी ने भगवान को अपना भाई बनाया। भगवान को भगवान न समझ अपना अच्छा सखा, साजन ,पिता ,टीचर ,सतगुरू व बच्चा बनाओ तो संबंधों का सच्चा सुख मिलेगा।

हम अपने जीवन में मन की एकाग्रता से कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं। जो चाहे वह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। हम बीती हुई बातों को सोचते रहते हैं। इससे हमारी मानसिक क्षमता घटती जाती है। राजयोग मेडिटेशन सकारात्मक संकल्प के माध्यम से जीवन जीने की ऐसी सुन्दर कला है कि हम अपने मन को जीत कर जगत को जीतने वाले और प्रकृतिजीत भी बन जाते हैं।अपने अंतर्मन को जीत कर पूरे विश्व को सुखमय बना सकते हैं। बीमारियों के मकड़जाल से बच सकते हैं। उन्हांेने इस अवसर पर सभी को मेडिटेशन कराकर शान्ति का अनुभव कराया।

आजाद पार्क में चल रहे शिव दर्शन मेले में 12 ज्योर्तिलिंगम के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मेले मेंे टीवी कलाकारों द्बारा मनमोहक प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं। इस अवसर पर प्रस्तुत किए जा रहे ड्रामा सर्वोच्च सत्ता को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं।