श्री नवदुर्गा देवी महायज्ञ में 21 प्रकार के मेवों से निर्मित दिव्य महल होंगे आकर्षण

5 मार्च को होगा आयोजन। 51 शक्तिपीठों की 108 देवी प्रतिमाएं, 17 नवदुर्गा की बड़ी मूर्तियां तथा आराधना करते हुए ब्रह्मा-विष्णु-महेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। विश्व में पहले ऐसे आयोजन का दावा।

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न्यूज चक्र @ कोटा

श्री कैलादेवी चामुण्डा मित्र मण्डल ट्रस्ट की ओर से 5 मार्च को आयोजित किए जाने वाले श्री नवदुर्गा देवी महायज्ञ एवं दिव्य छप्पन भोग में 21 प्रकार के मेवों से बने महल प्रदर्शित किए जाएंगे । इन्हें छप्पन भोग के तहत माता को अर्पित किया जाएगा। वहीं इस कार्यक्रम के तहत सप्तचण्डी यज्ञ का पाठ प्रतिदिन किया जा रहा है। इसमें 11 आचार्यों के सानिध्य में रुद्र अभिषेक, श्री दुर्गा सप्ताती पाठ तथा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।

संयोजक अशोक अग्रवाल ने बताया कि आगरा और जगनेर के 30 कारीगरों के द्बारा 21 प्रकार के मेवों से ये महल तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें श्री नवदुर्गा को छप्पन भोग की झांकी के तहत अर्पित किया जाएगा। मुख्य कारीगर उस्ताद विष्णु सिंघल ने बताया कि महलों के निर्माण के लिए 50 किलो बादाम, 40 किलो इलाइची, 25 किलो मखाने, 60 किलो अंजीर, 40 किलो अखरोट, 50 किलो छिले हुए अखरोट की मींगी, 50 किलो साबुत बादाम, 60 किलो काजू, 20 किलो चिरोंजी व 40 किलो नमकीन पिस्ता मंगाए गए हैं। इसके अलावा 70 किलो छुंआरे, मूंगफली, मीठी गोली, चिलगोजा, संतरे की गोली, रंगीन बताश्ो आदि के द्बारा भी छप्पनभोग की झांकियां बनाई जा रही हैं।

कार्यक्रम संयोजक अशोक अग्रवाल ने दावा किया है कि यह विश्व का ऐसा प्रथम महायज्ञ होगा, जिसमें 51 शक्तिपीठों की 108 देवी प्रतिमाएं, 17 नवदुर्गा की बड़ी मूर्तियां तथा आराधना करते हुए ब्रह्मा-विष्णु-महेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि देश में 42 शक्तिपीठ हैं। 9 शक्तिपीठ बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल तथा चीन में स्थित हैं। 127 देवी मूर्तियों के निर्माण कार्य में मूर्तिकार जुटे हुए हैं। दुर्गा सप्ताती के 700 श्लोकों से पूर्ण आहुति दी जाएगी। इस आयोजन में 108 यजमान भाग लेंगे। वहीं 108 आचार्य विद्बानों के द्बारा रिद्धि-सिद्धि तथा गणेश का पूजन कराया जाएगा।