मुन्ना भाई हो गए आजाद, घर लौटे

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मुम्बई। पुण्ो की यरवदा जेल से सजा पूरी करके लौटे संजय दत्त पत्नी मान्यता दत्त के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा करते हुए।

न्यूज चक्र @ मुम्बई
जाने-अनजाने में हुए बड़े अपराध की सजा पूरी करके बॉलीवुड के सुपर स्टार संजय दत्त गुरुवार को पुणे की यरवदा जेल से आजाद हो घर पहुंच गए। जहां उनके परिजन, बच्चे और प्रशंसक बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे। वे जेल से सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर रिहा हुए। जहां से सीधे एयरपोर्ट पहुंच चार्टर प्लेन से मुम्बई आए। यहां सबसे पहले उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर पहुंच इष्ट देव के दर्शन किए। इसके बाद बड़ा कब्रिस्तान स्थित अपनी मां नर्गिस दत्त की कब्र पर जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। जहां से वे अपने पाली हिल वाले बंगले पहुंचे। वहां उनके चाहने वाले बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अपने संजू बाबा को देखते ही वे खुशी से झूम कर थिरक उठे। काफी देर तक यह सिलसिला चलता रहा।उल्लेखनीय है कि

 मुम्बई। संजय दत्त अपनी पत्नी मान्यता के साथ। (फाइल फोटो)

मुम्बई। संजय दत्त अपनी पत्नी मान्यता के साथ। (फाइल फोटो)
मुम्बर्इ। जेल से छूटे संजय दत्त मीडिया से बात करते हुए।
मुम्बर्इ। जेल से छूटे संजय दत्त मीडिया से बात करते हुए।

संजय दत्त को जेल में अच्छे आचरण के कारण सजा में करीब आठ महीने की छूट दी गई है।

धरती को प्रणाम कर तिरंगे को दी सलामी, कहा-मैं आतंकवादी नहीं हूं

संजय को 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में अवैध हथियार रखने के लिए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई थी। उन्हें 1993 में गिरफ्तार किया गया था। वह विचाराधीन कैदी के रूप में पहले ही 18 महीने की सजा काट चुके थे। बची हुई सजा काटने के लिए मई 2013 में उन्हें जेल भेजा गया था। संजय गुरुवार सुबह यरवदा कारागार से बाहर निकले। उनके हाथ में निजी सामान से भरा एक बड़ा थैला, फाइल व कागजातों से भरी हुआ एक पॉलीथिन बैग था। नीले रंग की कमीज व जींस पहने हुए थे। कारागार के मुख्य दरवाजे के पास पहुंचने पर उन्होंने नीचे झुक, धरती को छू उसे प्रणाम किया। इसके बाद कारागार की छत पर लहरा रहे तिरंगे की ओर मुड़ कर खड़े हुए। दायां हाथ उठाया और तिरंगे को भावुक होकर सलामी दी। सुबह रिहाई से पहले संजय ने पुलिस और कारागार के स्टाफ का धन्यवाद किया। जेल के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें लेने के लिए पत्नी मान्यता, दोनों बच्चे, बहन पूर्व सांसद प्रिया दत्त, उनके वकील, फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी व हजारों प्रशंसक मौजूद थे। देश-विदेश के मीडियाकर्मियों का भी जमावड़ा लगा हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद वह सीधे पुणे एयरपोर्ट पहुंचे। जहां से चार्टर्ड प्लेन में सवार हो मुम्बई के लिए रवाना हो गए। इस बीच उन्हाेंने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में कहा- मैं यहां उनके (प्रशंसक) समर्थन की वजह से हूं। मेरे दोस्तों, आजादी की राह आसान नहीं है। फिर मुम्बई पहुंच गए बोले मैं आतंकवादी नहीं हूं | टाडा कोर्ट से तो बरी हो गया था। मुझे आम् र्स एक्ट में ही सजा मिली थी | उसे पूरी करके आया हूं |

1993 में मुंबई बम धमाकों के बाद से संजय की रिहाई का ऐसे चला घटनाक्रम

मुम्बई में 12 मार्च 1993 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 257 लोगों की मौत हुई थी। वहीं करीब सात सौ लोग घायल हुए थे। इस मामले की जांच में संजय दत्त के पास अवैध हथियार पाए गए थे। ये हथियार बम धमाके के आरोपियों से उन्हें मिले थे। इस पर उनके खिलाफ आम् र्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस पर वे-
19 अप्रैल 1993 को गिरफ्तार हुए।
03 मई 1993 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
05 मई 1993 को बम्बई उच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत दी।
04 नवम्बर 1993 को 1993 विस्फोट के आरोपियों के खिलाफ एक समेकित आरोप पत्र दायर किया गया।
04 जुलाई 1994 को फिर गिरफ्तार हुए।
16 अक्टूबर 1995 को उच्चतम न्यायालय ने जमानत दी।
दिसंबर 1995: फिर गिरफ्तार हुए।
अप्रैल 1997 में जमानत पर रिहा हुए।
28 नवंबर 2006 को टाडा अदालत ने सजा सुनाई।
31 जून 2007 को अदालत ने उन्हें छह साल की सजा सुनाई।
31 जुलाई 2007 को हिरासत में लिए गए।
2० अगस्त 2007 को उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम जमानत दी।
22 नवंबर 2007 को फिर जेल भेजा गया।
27 नवंबर 2007 को उच्चतम न्यायालय ने जमानत दी
21 मार्च 2013 को उच्चतम न्यायालय ने छह साल की सजा को घटाकर पांच साल कर दिया।
16 मई 2013 को संजय दत्त ने टाडा अदालत में समर्पण किया। इस बीच संजय दत्त को कई मौको पर फर्लो भी मिला। आत्मसमर्पण के बाद वह तीन साल, ग्यारह महीने और 14 दिन जेल में रहे। इससे पहले जब वह गिरफ्तार हुए थे तो करीब 18 माह जेल में रहे थे।