राहुल गांधी, केजरीवाल जैसे नेता क्या जाने-अनजाने देशद्रोह का समर्थन नहीं कर रहे हैं ?

हेडली की गवाही में इशरत जहां के लश्कर आतंकी साबित हो जाने से ऐसे अनमेच्योर नेताओं पर और उठे सवाल | केवल अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं के चलते ये देश को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं | इनके लिए देश नहीं, राजनीति ही मुख्य |

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी अर्थात जेएनयू में अफजल गुरु जैसे आतंकी को शहीद बताते हुए “गो इंडिया गो बैक”.. “कश्मीर की आज़ादी तक जंग चलेगी”.. “भारत की बर्बादी तक जंग चलेगी”.. जैसे नारे लगे……..मतलब खुल कर देशद्रोह….वो भी ऐसी जगह, जहां उन्हे बचाने वाली धारा 370 भी नहीं है…..कितना जहर भरा हुआ है इन नौजवानों में अपने ही देश के खिलाफ….क्या ये किसी आतंकवाद से कम है….?
अब तो निश्चित रूप से आमिर खान और उनकी पत्नी को यह देश रहने लायक लग रहा होगा…..शाहरुख खान जैसे लोग भी बल्ले-बल्ले कर रहे होंगे साहब……….|
अब तो बस इंतजार है कि राहुल और केजरीवाल जैसे लोग कब इन्हें समर्थन देने पहुंचेंगे….और इनके साथ धरना देंगे |
कितनी बड़ी त्रासदी है इस असहिष्णु देश की…….
एक तरफ हमारे रक्षक सैनिक देश की रक्षा के लिए रोज जीवन कुर्बान कर रहे हैं…..अकल्पनीय कठिन परिस्थितियों में सीमा पर, ग्लेशियरों पर डटे हुए हैं….
दूसरी ओर जेएनयू जैसी घटना हो जाती है….कश्मीर में देश के झंडे जलाए जाते हैं…..रोहित वेमूला जैसे छात्रों का संगठन खतरनाक आतंकी को मिली फांसी के खिलाफ आंदोलन करता है…..और ऐसे छात्रों के समर्थन में राहुल बाबा और केजरीवाल जैसे कथित राजनेता पहुंच जाते हैं…..कोई नेता देश के मसले को यूएनओ में ले जाने की धमकी देता है…….क्या ऐसे नेताओं को….इनकी पार्टियों को देशद्रोही घोषित नहीं कर देना चाहिए ?….दूसरी और जो राजनीतिक पार्टियां ओर जो नेता ऐसी घटनाओं को मौन रहकर परोक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं….उन्हें भी क्या कहना चाहिए…..?
कश्मीर में व्याप्त आतंकवाद के बावजूद इसका प्रमुख कारण बन रही…..आतंकियों का प्रमुख सहारा बन रही धारा 370 को हटाने की मंशा का विरोध कर रहे नेताओं और राजनीतिक पार्टियों को क्या आतंकवादियों का सहयोग देने वाला मानकर देशद्रोही घोषित नहीं कर देना चाहिए ?
क्या ऐसे में इस तरह की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के समर्थकों को यह नहीं समझ जाना चाहिए कि वे भी जाने-अनजाने में देशद्रोह का हिस्सा बन रहे हैं | अभी-अभी हेडली की गवाही के हवाले से आई इस खबर से कि इशरत जहां को लश्कर ने ट्रेनिंग दी थी….ऐसी पार्टियों व नेताओं का चेहरा और भी साफ हो जाता है….क्योंकि ये सब खुलकर उसका समर्थन कर रहे थे | उसके मारे जाने पर आंसू बहा रहा थे |
अब एक और बड़ी बात….
जेएनयू की घटना को मीडिया में कोई खास तवज्जो नहीं मिल पाई…..ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बन पाई…..वो तो अगर कोई देशप्रेम से ओतप्रोत छात्र आरोपी छात्रों को थप्पड़ मार देता….तब बनती ब्रेकिंग न्यूज….भगवा आतंकवाद…..भगवा आतंकी |
-राजीव सक्सेना
एडिटर इन चीफ