चौहटन प्रकरण: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में दर्ज हुआ मामला

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प्रवीण बोथरा @ बाड़मेर

चौहटन कस्बे की कच्ची बस्ती में गत 30 दिसम्बर को ढहाए गए अल्पसंख्यक व दलित परिवारों के करीब पचास परिवारों के अशियानों का मामला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने जांच के लिए दर्ज कर लिया है। मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के पूर्व सदर तथा अल्प संख्यक आयोग के पूर्व सदस्य असरफ अली खिलजी के प्रयासों से यह संभव हो सका है। इसके बाद से पीड़ितों को शीघ्र ही न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है।

खिलजी ने सर्किट हाउस में अल्पसंख्यकों की समस्याओं को लेकर हुई जनसुनवाई में अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय सदस्य प्रवीण दावर के समक्ष यह मसला उठाया। इसमें उन्होंने इस प्रकरण के लिए पूरी तरह चौहटन प्रशासन को दोषी बताया। उनका कहना था कि एक तरफ तो क्ष्ोत्र की करीब दो हजार बीघा जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। उस पर तो प्रशासन ने आंख्ों मूंद रखी हैं। वहीं द्बेषतावश व भूमाफियाओं से मिली-भगत होने से पचास वर्षों से काबिज अल्पसंख्यक व दलित परिवारों को उजाड़ दिया गया। इससे इनकी जिन्दगीभर की कमाई तबाह हो गई। वहीं इस दौरान महिलाओं के साथ बेहद बुरा बर्ताव भी किया गया। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को भी खींच कर घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद उसके घर को गिरा दिया। इस महिला का बाद बाहर खुले में ही प्रसव हुआ। इसी प्रकार एक अन्य महिला के ऊपर पत्थर गिरने से उसकी बच्चेदानी बाहर आ गई। एक व्यक्ति के हाथ-पैर फ्रेक्चर हो गए। खिलजी ने यह भी कहा कि इस प्रकार प्रशासन ने पूरी तरह बर्बरतापूणã कार्रवाई की। अगर पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय नहीं मिला तो उनका सरकार व प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा। इसे राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग ने गम्भीरता से लेते हुए जांच का फैसला किया।

उल्लेखनीय है कि चौहटन आगोर में बसे हुए इन परिवारों में से कइयों के पास तो जमीन के पट्टे तक बताए गए हैं। इसके बावजूद बिना किसी जांच के मात्र एक दिन के नोटिस पर ही अगले दिन सुबह से एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी मौके पर बुल्डोजर लेकर पहुंच गए। इन्होंने लोगों को संभलने व सामान निकालने का मौका तक दिए बिना घरों को ढहाना शुरू कर दिया। इससे इन परिवारों में हाहाकार मच गया था।