बाड़मेर के चौहटन में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई में पक्षपात के आरोप

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प्रसव पीड़ा से कहरा रही महिला की वेदना भी नहीं सुनी दस्ते के कर्मियों ने

एक दिन के नोटिस पर ही कार्रवाई, प्रशासन व भूमाफियाओं के गठजोड़ का आरोप

प्रवीण बोथरा @ बाड़मेर

चौहटन कस्बे में करीब एक स’ाह पूर्व ढहाए गए करीब पचास गरीब परिवारों के आशियानों का मसला अब और अधिक गर्माने लगा है। दशकों से इस जगह पर काबिज परिवारों को एक दिन के नोटिस पर ही बेघर कर दिया गया। मुस्लिम इंतेजामिया कमेटी के पूर्व सदर असरफ अली खिलजी व मुस्लिम छात्र संघ के प्रमुख इस्लाम बासनपीर इनकी जबरदस्त पैरवी में उतर आए। मौके पर पहुंचे और पीड़ितों का दुख-दर्द सुना। साथ ही पुरजोर तरीके से उन्हें सहायता का भरोसा भी दिया। इस दौरान पीड़ितों ने उनके साथ हुए बर्ताव की जो दास्तां सुनाई वो काफी दर्दनाक थी। गौरतलब है कि इससे पूर्व यह मसला जिला परिषद की बैठक में भी उठ चुका है। जिला परिषद सदस्य रूपसिंह राठौड़ ने तो इस मसले पर रोष जताया ही। चौहटन विधायक तरुण राय कागा भी इस कार्रवाई पर गम्भीर सवाल उठा चुके हैं।
खिलजी व बासनपीर को अपना दर्द सुनाते हुए पीड़ितों ने दावा किया कि जिस जमीन से उन्हें बेदखल किया गया है वह उनके द्बारा खरीदी हुई है। जबकि प्रशासन इसे अतिक्रमण बता रहा है। ऐसा भूमाफियाओं से मिली-भगत के कारण किया जा रहा है। मांगने पर भी हमारी जमीन का सही नक्शा नहीं दिया गया। प्रशासन ने एक दिन पहले तो नोटिस दिया और अगली सुबह आशियाने ढहाने शुरू कर दिए। यहां तक कि लोगों को अपने घरों से निकलने तक का मौका दिए बिना बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से हर तरफ हाहाकार मच गया। लोग सदमे से चीखने-चिल्लाने लगे। मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। सईदा व जानू खां के ऊपर दीवार गिर जाने से इन्हें गम्भीर चोटें आई हैं। बाबू देवी नामक महिला तो गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा से कहरा रही थी। उसे घर से खींच कर बाहर निकाल दिया। इस दौरान उसे चोट आई और बाहर खुले में ही बच्चे को जन्म दिया। इस प्रकार बुजुर्ग और बच्चों का ख्याल रखा न गर्भवती महिलाओं का लिहाज । इससे दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में आक्रोश व्या’ है। प्रशासन के खिलाफ आंदोलन पर उतरने वाले हैं।
खिलजी ने बताया कि 30 दिसम्बर को चौहटन आगोर में स्थित कच्ची बस्ती को अतिक्रमण बताकर हटा दिया गया। जबकि यहां ये परिवार करीब पचास सालों से रह रहे थे। इसके बावजूद इन्हें सिर्फ एक दिन का नोटिस दिया गया। अगले दिन सुबह ही चौहटन एसडीएम, तहसीलदार, डीएसपी, सरपंच आदि अतिक्रमण निरोधक दस्ते के साथ मौके पर पहुंच गए व कार्रवाई श्ुरू कर दी। जबकि कई परिवारों के पास तो जमीन का पट्टा तक मौजूद है। खिलजी का यह आरोप भी है कि इस कार्रवाई के दौरान कई लोगों को गम्भीर चोटें आईं। ऐसे ही एक घायल जानू खान को तो अधिक चोटें आने से इलाज के लिए डीसा के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इस कार्रवाई में ब्ोदखल कर दिए गए लगभग सभी परिवारों के पास और कोई ठिकाना नहीं है। सर्दी में उन्हें बाल-बच्चों के साथ भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अतिक्रमण पर दोहरे मापदंड क्यों?

चौहटन आगोर में 50 वर्षों से काबिज पट्टाशुदा लोगों को हटाने के लिए की गई इस कार्रवाई पर कई सामाजिक संगठनों ने भी सवाल खड़े किए हैं। खिलजी का ही कहना है कि चौहटन के चिपल नाड़ी में इन दिनों खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है। कई जेसीबी मशीनों और मजदूरों की सहायता से एक संस्था दिन-रात तालाब के आगोर की बेशकीमती जमीन को अपने कब्जे में कर रही है। वहां से रोज अधिकारी गुजरते हैं। मगर लगता है इतने बड़े अतिक्रमण पर उनकी आज तक नजर नहीं पड़ी है। इसी प्रकार चौहटन के चारों तरफ हजारों बीघा अन्य जमीन पर अतिक्रमण है। इन्हें नहीं हटाकर सिर्फ मुस्लिम व दलित परिवारों को ही बेघर किया गया है। अब ये सर्द रातों में खुले में सोने को मजबूर हैं।

ऐसा रहा दर्दनाक मंजर

बाबू देवी कार्रवाई के समय प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। मगर अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने उसे घसीटकर बाहर निकाला और घर पर बुलडोजर चला दिया। उसी समय उसने खुले आसमान के नीचे बच्चे को जन्म दिया। शहीदा बानो अन्दर सामान लेने गई। उस वक्त भी बुलडोजर नहीं रुका। बाहर निकलते वक्त बड़ा पत्थर उसके ऊपर गिर गया। जिससे उसकी बच्चेदानी बाहर आ गई। वह डीसा में भर्ती है। इसी तरह अंदर से सामान निकालते समय जानू खान का एक हाथ व एक पैर फ्रेक्चर हो गया। अस्सी वर्षीय हाजी हुसैन के आंसू अभी तक भी नहीं रुक रहे हैं। उसकी उम्र भर की कमाई एक घंटे में ही जमींदोज जो हो गई।

इस प्रकरण पर जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा व एसपी पारिस देशमुख का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उनके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई तो महापड़ाव

प्रशासन की मिली-भगत से मुस्लिम और दलित परिवारों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दोषियों पर जल्द कार्यवाही की जाए। वरना जिलेभर के मुस्लिम समाज के प्रमुख लोगों की बैठक बुलाकर कलक्ट्रेट के सामने महापड़ाव का निर्णय लिया जाएगा।
असरफ अली खिलजी, पूर्व सदर मुस्लिम इंतेजामिया कमेटी, बाड़मेर

फोटो कैप्शन
बाड़मेर। चौहटन में अतिक्रमण हटाने के नाम पर ढहाए गए आशियानों का बिखरा मलबा। मौके के अन्य नजारे।