लहसुन को मसाला सूची में शामिल करने की उठी मांग

1
543

कृषि उपजमंडी समिति कोटा के उपाध्यक्ष देवा भड़क ने कृषि मंत्री को लिखा पत्र

न्यूज चक्र @ कोटा

कृषि उपजमंडी समिति के उपाध्यक्ष देवा भड़क ने प्रदेश के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को पत्र लिखकर लहसुन को मसाला सूची में शामिल करने की मांग की है। जिससे किसानों को अक्सर होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सके।
भड़क ने पत्र में कहा है कि हाड़ौती में पिछले 10-15 वर्षों मंे लहसुन के उत्पादन क्षेत्र में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पादन भी काफी बढ़ा है। लेकिन किसानों को अपनी उपज का सही दाम कोटा की फल सब्जीमंडी में नहीं मिल पाता है। यदि लहसुन को मसाला सूची में शामिल कर लिया जाए तो किसान भामाशाहमंडी में आकर अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे किसानों के माल की सही तुलाई होने के साथ उसके दाम भी सही मिल सकेंगे। अभी हाल यह है कि कोटा जिले में मुख्य फल सब्जी में अधिक लहसुन बिकने आता है तो अतिक्रमियों के कारण अन्दर मंडी में घुसने तक की भारी समस्या रहती है। बिक्री के लिए चंद व्यापारी हैं, जो आपस में गठजोड़ कर कम दामों में लहसुन खरीद लेते हैं। बोली तक ठीक से नहीं लग पाती है। इससे किसानों को कम दाम में लहसुन बेचना पड़ता है। तुलाई में भी व्यापारी किसानों का शोषण करते हैं। तुलाई केवल किलो में होती है। यदि कट्टे की तुलाई में 40 किलो 800 ग्राम वजन आता है तो 800 ग्राम लहसुन का पैसा किसानों को नहीं दिया जाता है। यदि एक ट्रोली में 70 कट्टे लहसुन आता है तो 5० किलो लहसुन मुफ्त में चला जाता है। जिसकी बाजार कीमत 7000-8000 रुपए होती है। इस प्रकार एक ट्रोली लहसुन में ही किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि फल सब्जीमंडी में लहसुन बेचने आने वाले किसानों से व्यापारी छह प्रतिशत आढèत वसूलते हैं। वहीं भामाशाह मंडी के व्यापारियों की आढèत 2 प्रतिशत है। मसाला सूची में शामिल होने के बाद जब किसान भामाशाह मंडी में लहसुन बेचने आएंगे तो उन्हें 4 प्रतिशत आढèत का फायदा भी होगा।
भड़क ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसान हित में यह निर्णय नहीं लिया तो किसान संगठनों व किसानों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।