जया किशोरी की कथा की पूर्णाहुति, फूलों की होली में झूम उठे श्रद्घालु

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jaya kishori 1श्री श्याम मंदिर कमेटी ने किया था आयोजन

न्यूज चक्र @ कोटा

श्री श्याम मंदिर कमेटी के सानिध्य एवं श्री श्याम सेवा संस्थान के आतिथ्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की मंगलवार को पूर्णाहुति की गई। इस दौरान फूलों की होली खेली गई तो पांडाल में श्याम के जयकारे गूंज उठे। कथावाचक जया किशोरी ने उद्धव ज्ञान, राजा परिक्षित मोक्ष की कथाओं का वर्णन किया। कथा के समापन पर व्यास पूजन किया गया तथा महाप्रसादी का वितरण हुआ।

कथा वाचक जया किशोरी ने उद्धव ज्ञान और परिक्षित मोक्ष का वर्णन करते हुए कहा कि दुनिया में ज्ञान पर प्रेम सदा भारी रहा है। ठाकुर जी से प्रेम करने के बाद मीराबाई ठाकुर जी में ही समा गईं थीं। जो ठाकुर जी को भजता है, वह ठाकुर जी का ही हो जाता है। ठाकुर जी उसे भी अपने में ही लीन कर लेते हैं। राजा परिक्षित को भी भागवत कथा सुनने के बाद मोेक्ष की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से कल्याण नहीं हो सकता है। इससे प्राप्त ज्ञान को जीवन में उतारना पड़ेगा। ईश्वर की भक्ति को सदा ह्द्य से लगा कर रखना पड़ता है।

उन्होंने गौमाता के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि गौ की सेवा करने वाले को मोक्ष जरूर मिलता है। गाय जीवन भर दूध पिलाकर हमारा पालन-पोषण करती है। गाय की सेवा भी ठाकुर जी की ही सेवा मानी गई है। ठाकुर जी जब मनुष्य रूप में अवतरित हुए तो उन्होंने गाय को ही अपना कर्म साध्य बनाया। वे गाय माता की सेवा में अपना बचपन और किशोरावस्था को गुजारते हैं। उन्होंने गाय माता के लिए प्लास्टिक की थैली का त्याग करने की बात भी कही।

इस दौरान जया किशोरी ने सजीव झांकियों के साथ ”किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए…जुबां पर राधा-राधा नाम हो जाए….अरे द्बारपालों कन्हैया से कह दो…दर पे सुदामा गरीब आ गया है… जैसे भजनों पर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने ”नानी बाई रो मायरो का भजन ”घणी दूर सूं दोड्या थारी गाडूली रे लार…गाड़ी में बैठा ले रे बाबा जाणो है नगरी अनजान… सुनाया तो भक्तों ने जयकारोंे से आसमान गूंजा दिया।

कथा के समापन पर एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्घालुओं को भजन सरिता में गोते लगवा दिए। मयूर नृत्य की प्रस्तुति पर श्रोताओं में उल्लास उमड़ रहा था तो ‘महारास के दौरान ”जय श्री राधे के जयकारे आसमान में गुंजायमान हो रहे थे। ”गोविंद बल्ल्भ हे बंसीधर…आओ रास रचाओ… भजन के साथ प्रस्तुत ‘महारास ने समां बांध दिया था। पुष्पों की महक से सारा पांडाल सराबोर हो उठा। भक्तों ने भी अपने साथ लाए गए फूलों के द्बारा ठाकुर जी को पुष्पांजलि अर्पित की।