कोटा में तनाव मुक्त शैक्षिक वातावरण के लिए अब चौबीसों घंटे हेल्प लाइन सुविधा

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न्यूज चक्र @ कोटा

आईआईटी, इंजीनियरिग व मेडिकल की कोचिग करने आने वाले देशभर की छात्रा-छात्राओं को तनावमुक्त रखने के लिए जिला प्रशासन की प्रेरणा से समाज सेवकों ने होप संस्था का गठन किया कर 21 जुलाई 2010 से हेल्प लाइन शुरू की थी। होप संस्था के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर जिला प्रशासन ने इस हेल्प लाइन के संचालन के लिए कुछ शर्तों के साथ अनापत्ति प्रदान कर दी है।

इन शर्तों की करनी होगी पालना

जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने बताया कि निर्धारित शर्तों के तहत तनाव प्रबंधन के लिए होप संस्था को वर्षभर चौबीसों घंटे हेल्प लाइन सेवा चालू रखनी होगी। इसका समाचार पत्रों व स्थानीय टीवी चैनलों के माध्यम से तथा कोचिग संस्थाओं व छात्रावासों में पेम्पलेट वितरण कर प्रचार-प्रसार करना होगा। हेल्प लाइन पर नियुक्त काउन्सलर को समय-समय पर मनोचिकित्सक एवं विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाना होगा। होप संस्था इस कार्य के अलावा क्षेत्र में कोई अन्य कार्य नहीं करेगी। संस्था को चैरिटी से प्राप्त होने वाली राशि व किये गए भुगतान के लिए सम्पूर्ण लेखा-जोखा रखना होगा। पांच हजार से अधिक राशि का भुगतान चेक के माध्यम से करना होगा। प्राप्त राशि रोकड़ में पांच हजार से अधिक नहीं रखी जाएगी। इससे अधिक राशि को बैंक के खाते में जमा कराना होगा। नकद की सुरक्षा एवं अभिरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था करनी होगी।
दस हजार रुपए से अधिक भुगतान के लिए च्ोक पर अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर से ही राशि आहरित की जा सकेगी। किसी भी प्रकार के व्यय व भुगतान की स्वीकृति देने के लिए संस्था के अध्यक्ष ही अधिकृत होंगे। संस्था में कार्यरत कर्मचारियों का पूर्ण विवरण मय आईडी संख्या के रिकॉर्ड में रखना होगा। कर्मचारियों को हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति के हस्ताक्षर करने होंगे। जिला प्रशासन से अधिकृत अधिकारी कभी भी संस्था का निरीक्षण कर सकेगा। संस्था मासिक प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्रस्तुत करेगी। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के उपरान्त संस्था के लेखों का चार्टेड एकाउन्टेंट से ऑडिट कराकर रिपोर्ट तीन माह में जिला प्रशासन को प्रस्तुत करनी होगी।
संस्था का कार्य संतोषजनक नहीं होने पर जिला प्रशासन द्बारा किसी भी समय कार्य के लिए दी गई एनओसी को निरस्त किया जा सकेगा। इस दौरान अर्जित की गई परिसम्पत्तियों व शेष राशि जिला प्रशासन को सुपुर्द करनी होगी। प्राप्त होने वाले कॉल का विवरण नाम, पते सहित रजिस्टर में अंकन एवं उस पर की गई कार्यवाही का रिकॉर्ड रखना होगा। हेल्प लाइन पर मुख्य रूप से अभिभावक व कोचिग संस्था के विद्यार्थियों से प्राप्त होने वाली शिकायतों को चिन्हित किया जाएगा। जिला प्रशासन, पुलिस, कोचिग संस्थानों, होस्टल संचालकों, विशेषज्ञों व आवश्यक व्यक्तियों के सम्पर्क नम्बर उपलब्ध रखने होंगे, ताकि प्राप्त समस्या का निस्तारण किया जा सके।