देशभर के ज्योतिषियों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए

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दो दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन सम्पन्न

न्यूज चक्र @ बूंदी

वेदांग ज्योतिष अनुसंधान संस्था, कोटा एवं अध्यात्म ज्योतिष अनुसंधान संस्थानम्, बून्दी के संयुक्त तत्वावधान में जैन दादाबाड़ी में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषियों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला परिषद, बून्दी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अम्बरीश मेहता थ्ो। उन्होंने कहा कि ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कठिन साधना की आवश्यकता होती है। उन्होंने शुक्र वलय पर व्याख्यान भी दिया। साथ ही कहा कि ज्योतिषियों को चाहिए कि वे आमजन को सही रास्ता दिखाएं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष आचार्य धीरेन्द्र ने कहा कि हमें लोगों के सामने ऐसी बात रखनी चाहिए जो उनके गले उतरे। उन्हांेने ज्योतिष में कालसर्प योग को भ्रम मात्र बताया। साथ ही कहा कि कालसर्प दोष योग का ज्योतिष में कोई स्थान नहीं है। ज्योतिष का काम व्यतियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हे सद्मार्ग की तरफ ले जाना है। विवाह के लिए मात्र गुण मिलान करके ही विवाह सम्बन्धी जातकों को सुझाव नहीं देना चाहिए। उनकी जन्म पत्रिका का भी मिलान करना चाहिए। उन्होंने हस्तरेखा शास्त्र को भी विज्ञान बताया।
कार्यक्रम में बद्रीनारायण शास्त्री ने रमला शास्त्र एवं लाल किताब, महावीर प्रसाद जोशी ने मानव जीवन पर ग्रहांे का प्रभाव, भागीरथ जोशी नें गणित साहित्य, मुकेश जैन ने दिशाएं, राजेश दिक्षित ने यात्रा में चन्द्रमा एवं योगिनी का महत्व, सूर्यनारायण पाण्डे ने कालसर्प दोष, सुरेश जोशी ने रोग, ओम प्रकाश शर्मा ने मेलापक, भारत सिंह गहलोत ने नाड़ी दोष व परिहार, ग्वालेरा ने शिक्षा, पंडित अमृतलाल व्यास ने भृकुटदोष, जगदीश वेदी ने कर्मकांड विषय पर व्याख्यान दिए। अन्य ज्योतिषियों ने भी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
कार्यक्रम में समाजसेवी प्रेमचन्द कोठारी ने ज्योतिषियों को शाल ओढ़ाकर प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिह्न् भेंट किए। इस अवसर पर प्रदीप जोशी द्बारा प्रकाशित कालदर्शन रघुनाथ जंत्री का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के संयोजक ओमप्रकाश शर्मा ने देशभर से आए ज्योतिषियों को गजलक्ष्मी मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि यह 75० वर्ष पुराना है। महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान गजलक्ष्मी अभिषेक के जल से राहत मिलती है। सम्मेलन में 47० व्यक्तियों की जन्म पत्रिका देखकर परामर्श दिया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्रजराम गौतम ने किया।